लद्दाख से ऐसी खबर आई है जो पाकिस्तान के लिए 1.4 बिलियन लीटर के शौक से कम नहीं है। , लद्दाख प्रशासन ने एक मास्टर प्लान तैयार किया है सिंधु नदी के सीने पर एक साथ 36 डैम्स का जाल बिछाने का। वो पानी जो अब तक खैरात में सरहद पार जा रहा था। अब भारत की बंजर जमीन को सोना बनाने वाला है। मात्र 56 करोड़ के बजट में लद्दाख ने वो दांव खेल दिया है जो पाकिस्तान के रणनीतिकारों ने सोचा भी नहीं था।दरअसल लद्दाख के एलजी हैं विनय कुमार सक्सेना जी जिन्होंने प्रपोजल जलशक्ति मंत्रालय को भेज दिया है। उसकी बारीकियां अब आप भी समझ लीजिए। यह कोई साधारण इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट नहीं है। यह लद्दाख की भूगोल और पाकिस्तान की टेंशन बदलने वाला कदम है। अब भारत का एक्शन प्लान क्या है? पहला प्लान है लेह में सात रॉक डैम्स। यह बनेंगे सिंधु यानी कि इंडस रिवर के ऊपर। दूसरा प्लान है कारगिल में 29 आरसीसी डैम्स। यह बनेंगे सुरू नदी पर जो सिंधु की सबसे ताकतवर ट्रिब्यूटरीज में से एक है।
अब हैरानी की बात यह है कि भारत के यह पहला रॉक डैम महज 7 दिन में और 10 लाख की लागत में बनकर तैयार हो गया था। अब उसी प्रूफ ऑफ कांसेप्ट को अब स्केल अप किया जा रहा है। 36 डैम्स एक साथ और इसकी गूंज दूर तक जाएगी। अब पाकिस्तान को सबसे बड़ा डर इस बात का है कि भारत अब रन ऑफ द रिवर प्रोजेक्ट से आगे बढ़कर स्टोरेज और डायवर्जन की ओर बढ़ चुका है।
ये पाकिस्तान के लिए बुरे सपने जैसा क्यों है?
इसका सबसे महत्वपूर्ण पॉइंट है स्ट्रेटेजिक लेवरेज। यह रॉक डैम्स भले ही छोटे दिखे लेकिन जब यह 36 की संख्या में होंगे तो यह लाखों करोड़ों लीटर पानी के फ्लो को कंट्रोल करेंगे। दूसरा पॉइंट है डायवर्जन मास्टर क्लास। हाल ही में भारत ने सिंधु का 90 मिलियन लीटर पानी डाइवर्ट किया था। अब इन 36 डैम्स के जरिए भारत के पास वह स्विच होगा जिससे वह तय करेगा कि लद्दाख की प्यास पहले बुझेगी। तीसरा महत्वपूर्ण पॉइंट है सिंधु पर कब्ज़ा। सिंधु नदी पाकिस्तान की लाइफलाइन है। भारत का उस पर एक भी पत्थर रखना पाकिस्तान की धड़कने बढ़ा देता है। यहां तो पूरे 36 डैम्स की बात हो रही है। यह प्रोजेक्ट दुनिया का सबसे इकोनॉमिकल इरीगेशन मॉडल बनने वाला है। इसे आर्थिक चमत्कार भी कहा जा सकता है क्योंकि इसकी कुल लागत 56 करोड़ है। फायदा है 18,600 एकड़ जमीन की सिंचाई और प्रति एकड़ खर्च मात्र ₹00 जहां दुनिया में बड़े डैम्स बनाने में सालों लग जाते हैं। पर्यावरण को नुकसान भी होता है। लेकिन लद्दाख का यह नेचुरल रॉक मॉडल पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए खेती की तस्वीर बदल देगा। यह लद्दाख के उन किसानों के लिए आजादी का पैगाम है जो कोल्ड डेजर्ट में पानी के लिए तरसते थे। खैर कुल मिलाकर यह सिर्फ डैम्स नहीं है। यह भारत की वो उभरती हुई शक्ति है जो अपने संसाधनों पर अपना हक जताना जानती है।
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शिरीष बी प्रधान
काठमांडू, 28 अगस्त नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद तलाश और बचाव अभियान के दौरान और शव बरामद होने से मृतकों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 538 हो गई। इस बीच, तिब्बत की सीमा पर हिमस्खलन के कारण बनी एक झील के जलस्तर में वृद्धि से फिर से बाढ़ आने के खतरे को देखते हुए अभियान सावधानी के साथ चलाया जा रहा है। नेपाल पुलिस ने एक बयान में कहा कि आठ जिलों से शव बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, नवलपरासी पूर्व से 134, चितवन से 221, गोरखा से 46 और नुवाकोट से 37 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह, धादिंग से 33, तनहूं से 28, नवलपरासी पश्चिम से 27 और रसुवा से 12 शव बरामद किए गए हैं। बयान के अनुसार, इस घटना के तीसरे दिन भी तलाशी और बचाव अभियान जारी रहा।
इसके लिए 7,451 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया, जिनमें नेपाल सेना के 2,391 जवान भी शामिल हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने कहा कि इस सप्ताह की शुरुआत में जिस स्थान पर विनाशकारी अचानक बाढ़ आई थी, वहां जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में एक और बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है। यह चेतावनी बुधवार को आई उस अचानक बाढ़ के बाद जारी की गई है, जिसने रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया था।
इस बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और हजारों लोग लापता हो गए। एनडीआरआरएमए ने तलाशी और बचाव अभियानों में शामिल लोगों के साथ-साथ विभिन्न कारणों से भोटेकोशी और त्रिशूली क्षेत्रों में रह रहे लोगों से अत्यधिक सतर्क रहने और किसी भी खतरे की स्थिति में तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
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