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Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 538 हुई, राहत कार्य तेज

शिरीष बी प्रधान काठमांडू, 28 अगस्त नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद तलाश और बचाव अभियान के दौरान और शव बरामद होने से मृतकों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 538 हो गई। इस बीच, तिब्बत की सीमा पर हिमस्खलन के कारण बनी एक झील के जलस्तर में वृद्धि से फिर से बाढ़ आने के खतरे को देखते हुए अभियान सावधानी के साथ चलाया जा रहा है। नेपाल पुलिस ने एक बयान में कहा कि आठ जिलों से शव बरामद किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, नवलपरासी पूर्व से 134, चितवन से 221, गोरखा से 46 और नुवाकोट से 37 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह, धादिंग से 33, तनहूं से 28, नवलपरासी पश्चिम से 27 और रसुवा से 12 शव बरामद किए गए हैं। बयान के अनुसार, इस घटना के तीसरे दिन भी तलाशी और बचाव अभियान जारी रहा।

इसके लिए 7,451 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया, जिनमें नेपाल सेना के 2,391 जवान भी शामिल हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने कहा कि इस सप्ताह की शुरुआत में जिस स्थान पर विनाशकारी अचानक बाढ़ आई थी, वहां जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में एक और बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है। यह चेतावनी बुधवार को आई उस अचानक बाढ़ के बाद जारी की गई है, जिसने रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया था।

इस बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और हजारों लोग लापता हो गए। एनडीआरआरएमए ने तलाशी और बचाव अभियानों में शामिल लोगों के साथ-साथ विभिन्न कारणों से भोटेकोशी और त्रिशूली क्षेत्रों में रह रहे लोगों से अत्यधिक सतर्क रहने और किसी भी खतरे की स्थिति में तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।

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Orry ने खोला जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर का राज, Amrita Singh को लेकर किया बड़ा खुलासा

ओरहान अवत्रामणि, जिन्हें लोग ओरी के नाम से जानते हैं, ने अपनी जिंदगी के एक बेहद मुश्किल दौर के बारे में बात की है। एक बातचीत के दौरान ओरी ने दिग्गज एक्ट्रेस अमृता सिंह से जुड़े एक कथित दर्दनाक अनुभव को याद किया और बताया कि 2021 में इस घटना ने उन्हें किस तरह प्रभावित किया था।

ओरी ने इस दौर को अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल और अंधेरे समय में से एक बताया। उन्होंने कहा कि इस अनुभव का उन पर लंबे समय तक असर रहा और वह ऐसी स्थिति से गुजरे, जिसका उन्होंने पहले कभी सामना नहीं किया था।

बहुत मुश्किल और बुरा दौर था

पिंकविला के साथ बातचीत में ओरी ने 2021 की उस घटना का जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने अमृता सिंह को अमृता अली खान कहकर संबोधित किया। ओरी ने कहा कि 2021 में जब अमृता सिंह ने उन्हें कथित तौर पर ट्रॉमा दिया, तो वह उनके लिए बहुत मुश्किल था। उन्होंने कहा कि उन्होंने इससे पहले कभी ऐसा कुछ अनुभव नहीं किया था और यह उनकी जिंदगी का बेहद बुरा दौर था।

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इस अनुभव ने ओरी को बना दिया मजबूत

ओरी ने बताया कि उनके करीब रहने वाले लोग उस समय उन्हें समझाते थे कि इस मुश्किल दौर से निकलने के बाद वह और मजबूत हो जाएंगे। हालांकि, उस समय वह ऐसी बातें नहीं सुनना चाहते थे। वह बस चाहते थे कि किसी तरह वह दौर खत्म हो जाए। बाद में उन्हें एहसास हुआ कि इस अनुभव ने उन्हें अंदर से काफी बदल दिया है। उन्होंने बताया कि इसके बाद छोटी-छोटी बातें उन्हें पहले की तरह प्रभावित नहीं करती थीं।

ओरी के मुताबिक, जब वह पब्लिक फिगर बने और शुरुआत में उन्हें सोशल मीडिया पर काफी नफरत का सामना करना पड़ा, तब भी इसका उन पर ज्यादा असर नहीं हुआ। उनका मानना है कि 2021 में जिस ट्रॉमा से वह गुजरे, उसने उन्हें मानसिक तौर पर इतना मजबूत बना दिया था कि बाद में मिलने वाली नफरत उन्हें ज्यादा परेशान नहीं कर सकी।

खतरों के खिलाड़ी 15 से भी जोड़ा अनुभव

ओरी ने अपनी इस मानसिक मजबूती को खतरों के खिलाड़ी 15 के अनुभव से भी जोड़ा है। वह इस समय शो में कंटेस्टेंट के तौर पर हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक तरह से वह उस अनुभव के लिए अमृता को धन्यवाद भी देना चाहते हैं। ओरी के मुताबिक, उस मुश्किल दौर ने उन्हें आगे आने वाली चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से मजबूत बनाया। उन्हें लगता है कि खतरों के खिलाड़ी 15 में जब उन्हें अपनी सीमाओं तक पहुंचाया गया, तब यह मजबूती साफ दिखाई दी।

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आखिर हुआ क्या था? ओरी ने नहीं बताया

ओरी ने अमृता सिंह के साथ हुए विवाद के बाद अपने ऊपर पड़े भावनात्मक असर के बारे में तो बात की है, लेकिन उन्होंने अभी तक यह नहीं बताया कि असल में उनके बीच क्या हुआ था।

जब उनसे इस घटना की पूरी जानकारी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसका सीधा जवाब देने से बचते हुए बस इतना इशारा किया कि गलत व्यवहार का अपना नतीजा होता है। अमृता सिंह के साथ ओरी का यह विवाद उनकी निजी जिंदगी तक भी पहुंचा। इस वजह से अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान के साथ उनकी दोस्ती पर भी असर पड़ा है।

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  Sports

Rishabh Pant के 50 Test के बाद Ravichandran Ashwin की दो टूक सलाह: अब टीम की जरूरत के हिसाब से खेलें

रिषभ पंत ने श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला में 168 रन बनाकर दो अर्धशतक जरूर लगाए, लेकिन उनके प्रदर्शन को लेकर रविचंद्रन अश्विन पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। भारत के पूर्व ऑफ स्पिनर का मानना है कि पंत को अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के साथ-साथ मैच की स्थिति को समझने और टीम की जरूरत के मुताबिक फैसले लेने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अश्विन ने अपने कार्यक्रम ‘अश की बात’ में पंत की बल्लेबाजी पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि केवल आंकड़ों के आधार पर पंत के प्रदर्शन का आकलन करना सही नहीं होगा। उनके मुताबिक, पंत जिस तरह के जोखिम लेते हैं, उसमें यह समझना जरूरी है कि कब आक्रमण करना है और कब विकेट बचाकर खेलना है।

पंत की आक्रामक शैली पिछले कुछ महीनों से चर्चा का विषय रही है। उनके प्रशंसक अक्सर उनकी इसी बेखौफ बल्लेबाजी को उनकी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं, क्योंकि वह मुश्किल परिस्थितियों में भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, अश्विन का कहना है कि टेस्ट क्रिकेट में हर परिस्थिति में एक ही अंदाज से बल्लेबाजी करना टीम के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

उन्होंने पिछले साल गुवाहाटी में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पंत के आउट होने का उदाहरण भी दिया। उस मुकाबले में शुभमन गिल की गैरमौजूदगी में पंत भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे थे। उन्होंने मार्को यानसन की गेंद पर आगे बढ़कर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर के हाथों में चली गई।

अश्विन ने साफ किया कि उन्हें पंत के आक्रामक खेल से समस्या नहीं है। उनकी आपत्ति उन मौकों को लेकर है जब मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण स्थिति में हो और बल्लेबाज अनावश्यक जोखिम उठा ले। उन्होंने कहा कि वीरेंद्र सहवाग और एडम गिलक्रिस्ट जैसे बल्लेबाज भी आक्रामक क्रिकेट खेलते थे, लेकिन मैच की स्थिति को नजरअंदाज करके इस तरह के जोखिम नहीं लेते थे।

गौरतलब है कि पंत अब तक 50 टेस्ट मैच खेल चुके हैं। अश्विन के अनुसार, इतने अनुभव के बाद उनसे ज्यादा जिम्मेदारी की उम्मीद की जानी चाहिए। उन्होंने पंत को किसी विशेष प्रतिभा के नाम पर अतिरिक्त छूट देने के विचार पर भी सवाल उठाया। अश्विन का कहना है कि यशस्वी जायसवाल जैसे युवा खिलाड़ियों में भी असाधारण क्षमता है, इसलिए सिर्फ विशेष प्रतिभा होने के आधार पर किसी खिलाड़ी को आलोचना से बचाना उचित नहीं है।

अश्विन ने सिडनी और ब्रिस्बेन में पंत की शानदार पारियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंत ने वहां बेहतरीन पारियां खेलीं, लेकिन टेस्ट जीतने के लिए केवल एक खिलाड़ी का प्रदर्शन पर्याप्त नहीं होता। वॉशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर जैसे खिलाड़ियों का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण रहा था। उनके मुताबिक, टेस्ट मैच को जीत तक पहुंचाने के लिए 11 खिलाड़ियों का योगदान चाहिए, जबकि एक गलत फैसला पूरे मैच को हाथ से निकाल सकता है।

बता दें कि पंत फिलहाल भारत की एकदिवसीय और टी20 टीम से बाहर हैं और मुख्य रूप से टेस्ट क्रिकेट में ही भारतीय टीम का हिस्सा हैं। अश्विन मानते हैं कि अगर पंत अपनी बल्लेबाजी में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव लाते हैं तो उनके लिए सीमित ओवरों की टीम में वापसी का रास्ता भी खुल सकता है।

अश्विन ने यहां तक कहा कि जिस दिन पंत को उनकी कमियों के बारे में साफ और ईमानदार प्रतिक्रिया मिलने लगेगी, वह तीनों प्रारूपों में दोबारा भारत के लिए खेलने की स्थिति में पहुंच सकते हैं। उनके मुताबिक, पंत की प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन अब उनके खेल में जिम्मेदारी और बेहतर निर्णय लेने की जरूरत है। यही बदलाव उन्हें एक शानदार टेस्ट बल्लेबाज से फिर से भारत के तीनों प्रारूपों के भरोसेमंद खिलाड़ी में बदल सकता है।
Fri, 28 Aug 2026 18:54:00 +0530

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