Thane Ashram School का रसोइया गिरफ्तार, पहले भी POCSO मामले में जा चुका है जेल
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में एक सरकारी आश्रमशाला की 22 नाबालिग छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोप में इस सप्ताह की शुरुआत में गिरफ्तार किया गया रसोइया पहले भी यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत जेल जा चुका है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, वह आदतन अपराधी है और पिछले मामले में निलंबित किए जाने के बावजूद बाद में उसे बहाल कर दिया गया था।
एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना (आईटीडीपी), शहापुर की परियोजना अधिकारी तेजस्विनी आर. जी. ने बताया कि शहापुर के टेंभा स्थित आश्रमशाला में काम करने वाला आरोपी गणपति गावली पहले आघई की एक अन्य आश्रमशाला में भी इसी तरह के आरोपों का सामना कर चुका है। उन्होंने बताया कि इस सप्ताह की शुरुआत में गिरफ्तारी के बाद गावली को निलंबित कर दिया गया है। तेजस्विनी ने कहा, ‘‘आदतन अपराधी गावली की सेवानिवृत्ति में केवल 10 महीने बाकी हैं।
आघई की एक अन्य आश्रमशाला में पॉक्सो अधिनियम अपराधों को लेकर भी उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था और तब उसे निलंबित किया गया था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि बाद में उसे किसने और किन परिस्थितियों में बहाल किया।’’ टेंभा स्थित आश्रमशाला की छात्राओं ने 24 अगस्त को पहली बार अधिकारियों से शिकायत की थी। इसके बाद अधीक्षक ने मामला प्रधानाध्यापक के पास भेजा।
प्रधानाध्यापक ने तत्काल जनजातीय विकास विभाग को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी। तेजस्विनी ने बताया कि इसके बाद शहापुर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा, ‘‘इस बात में कोई संदेह नहीं है कि वह इस तरह की हरकतों में शामिल था।
17-18 छात्राओं का एक ही तरह की शिकायत करना अपने आप में इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उनके आरोप सही हैं।’’ अधिकारियों के अनुसार, गावली को इससे पहले आघई आश्रमशाला में छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जेल से रिहा होने के बाद उसे मुरबाड की मोरोशी आश्रमशाला में तैनात किया गया था। टेंभा आश्रमशाला में हालिया तबादले से पहले वह वहीं कार्यरत था।
Nepal Flash Floods: त्रिशूली बाजार में अचानक घुसा सैलाब, कीचड़ और मलबे के बीच मची अफरा-तफरी, देखें वीडियो
नेपाल के नुवाकोट जिले का त्रिशूली बाजार बुधवार को कुछ ही मिनटों में एक व्यस्त कस्बे से तबाही के मंजर में बदल गया। सामने आए डरावने वीडियो में सड़क पर भागते लोग, रास्ता बदलने की कोशिश करती गाड़ियां और तेजी से बाजार की ओर बढ़ता मटमैला पानी दिखाई दे रहा है। पानी के साथ मिट्टी, पत्थर और भारी मलबा भी बहता चला आया, जिसने देखते ही देखते पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया।
वीडियो की शुरुआत में सब कुछ सामान्य नजर आता है। बाजार की सड़कों पर लोगों की आवाजाही थी और वाहन आ-जा रहे थे। लेकिन हालात बदलने में ज्यादा वक्त नहीं लगा। जैसे ही पानी का तेज बहाव बाजार की तरफ बढ़ा, लोगों ने सुरक्षित जगहों की ओर भागना शुरू कर दिया। कार और मोटरसाइकिल सवार भी किसी तरह उस रास्ते से निकलने की कोशिश करते दिखे। इस अफरा-तफरी के बीच एक स्कूल बस भी दिखाई दी। कुछ ही देर में सड़कें पानी और मलबे से भर गईं और लोगों के लिए वहां से निकलना मुश्किल हो गया।
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सैलाब का असर इतना तेज था कि देखते ही देखते त्रिशूली का बाजार क्षेत्र पानी, गाद, चट्टानों और मलबे के नीचे दबने लगा। कई जगह सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं, जबकि पुल और दूसरी संरचनाएं भी तेज बहाव में बह गईं या बुरी तरह टूट गईं। कई हिस्सों में मोटी कीचड़ की परत जम गई, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया।
त्रिशूली में हुई यह तबाही नेपाल के पहाड़ी इलाकों में बुधवार को आई बड़ी प्राकृतिक आपदा का हिस्सा है। नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास बड़े भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद भारी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टान और कीचड़ हिमालयी नदी तंत्र में उतर आया। तेज बहाव ने नदी किनारे बसे इलाकों और आसपास के गांवों में भारी नुकसान पहुंचाया।
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नुवाकोट जिले में हालात बेहद गंभीर बताए जा रहे हैं। कई गांवों को भारी नुकसान पहुंचा है और कुछ जगहों पर घरों तथा दूसरी इमारतों के पूरी तरह तबाह होने की खबर है। बाढ़ के पानी में सड़कें और पुल बह जाने से कई समुदायों का संपर्क बाकी इलाकों से टूट गया। इसका सीधा असर राहत और बचाव अभियान पर भी पड़ा है। मलबे और कीचड़ के बीच फंसे लोगों की तलाश के लिए बचाव दल भारी मशीनों की मदद ले रहे हैं। टीमें उन जगहों पर लगातार काम कर रही हैं जहां लोगों के दबे होने या लापता होने की आशंका है। मुश्किल यह है कि कई इलाकों तक पहुंचने वाले रास्ते खुद बाढ़ में तबाह हो चुके हैं।
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नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने बाढ़ से प्रभावित नुवाकोट का दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी एजेंसियां पूरी क्षमता के साथ राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। फिलहाल प्राथमिकता लापता लोगों को तलाशना, घायलों को इलाज उपलब्ध कराना और प्रभावित परिवारों तक जरूरी मदद पहुंचाना है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में अब तक कम से कम 469 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 1,500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 290 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि आपदा के बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। हिमालयी क्षेत्र के कई हिस्सों में भारी बारिश जारी रहने के कारण अधिकारियों ने आगे भी बाढ़ और भूस्खलन की आशंका जताई है। त्रिशूली बाजार की तस्वीरें इसी खतरे की गंभीरता दिखाती हैं—जहां कुछ मिनट पहले तक रोजमर्रा की जिंदगी चल रही थी, वहीं अचानक पानी, पत्थर और मलबे का ऐसा सैलाब आया कि लोगों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा। नेपाल के प्रभावित पहाड़ी इलाकों में अब राहत और बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे में फंसे और लापता लोगों तक पहुंचना है।
This is how the flood entered Trishuli Bazaar.#Nepal#Flashflood pic.twitter.com/XRVk5kX9ur
— Dr. Kiran J Patel (@kiranpatel1977) August 27, 2026
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