Nepal Flash Floods: त्रिशूली बाजार में अचानक घुसा सैलाब, कीचड़ और मलबे के बीच मची अफरा-तफरी, देखें वीडियो
नेपाल के नुवाकोट जिले का त्रिशूली बाजार बुधवार को कुछ ही मिनटों में एक व्यस्त कस्बे से तबाही के मंजर में बदल गया। सामने आए डरावने वीडियो में सड़क पर भागते लोग, रास्ता बदलने की कोशिश करती गाड़ियां और तेजी से बाजार की ओर बढ़ता मटमैला पानी दिखाई दे रहा है। पानी के साथ मिट्टी, पत्थर और भारी मलबा भी बहता चला आया, जिसने देखते ही देखते पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया।
वीडियो की शुरुआत में सब कुछ सामान्य नजर आता है। बाजार की सड़कों पर लोगों की आवाजाही थी और वाहन आ-जा रहे थे। लेकिन हालात बदलने में ज्यादा वक्त नहीं लगा। जैसे ही पानी का तेज बहाव बाजार की तरफ बढ़ा, लोगों ने सुरक्षित जगहों की ओर भागना शुरू कर दिया। कार और मोटरसाइकिल सवार भी किसी तरह उस रास्ते से निकलने की कोशिश करते दिखे। इस अफरा-तफरी के बीच एक स्कूल बस भी दिखाई दी। कुछ ही देर में सड़कें पानी और मलबे से भर गईं और लोगों के लिए वहां से निकलना मुश्किल हो गया।
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सैलाब का असर इतना तेज था कि देखते ही देखते त्रिशूली का बाजार क्षेत्र पानी, गाद, चट्टानों और मलबे के नीचे दबने लगा। कई जगह सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं, जबकि पुल और दूसरी संरचनाएं भी तेज बहाव में बह गईं या बुरी तरह टूट गईं। कई हिस्सों में मोटी कीचड़ की परत जम गई, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया।
त्रिशूली में हुई यह तबाही नेपाल के पहाड़ी इलाकों में बुधवार को आई बड़ी प्राकृतिक आपदा का हिस्सा है। नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास बड़े भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद भारी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टान और कीचड़ हिमालयी नदी तंत्र में उतर आया। तेज बहाव ने नदी किनारे बसे इलाकों और आसपास के गांवों में भारी नुकसान पहुंचाया।
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नुवाकोट जिले में हालात बेहद गंभीर बताए जा रहे हैं। कई गांवों को भारी नुकसान पहुंचा है और कुछ जगहों पर घरों तथा दूसरी इमारतों के पूरी तरह तबाह होने की खबर है। बाढ़ के पानी में सड़कें और पुल बह जाने से कई समुदायों का संपर्क बाकी इलाकों से टूट गया। इसका सीधा असर राहत और बचाव अभियान पर भी पड़ा है। मलबे और कीचड़ के बीच फंसे लोगों की तलाश के लिए बचाव दल भारी मशीनों की मदद ले रहे हैं। टीमें उन जगहों पर लगातार काम कर रही हैं जहां लोगों के दबे होने या लापता होने की आशंका है। मुश्किल यह है कि कई इलाकों तक पहुंचने वाले रास्ते खुद बाढ़ में तबाह हो चुके हैं।
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नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने बाढ़ से प्रभावित नुवाकोट का दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी एजेंसियां पूरी क्षमता के साथ राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। फिलहाल प्राथमिकता लापता लोगों को तलाशना, घायलों को इलाज उपलब्ध कराना और प्रभावित परिवारों तक जरूरी मदद पहुंचाना है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में अब तक कम से कम 469 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 1,500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 290 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि आपदा के बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। हिमालयी क्षेत्र के कई हिस्सों में भारी बारिश जारी रहने के कारण अधिकारियों ने आगे भी बाढ़ और भूस्खलन की आशंका जताई है। त्रिशूली बाजार की तस्वीरें इसी खतरे की गंभीरता दिखाती हैं—जहां कुछ मिनट पहले तक रोजमर्रा की जिंदगी चल रही थी, वहीं अचानक पानी, पत्थर और मलबे का ऐसा सैलाब आया कि लोगों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा। नेपाल के प्रभावित पहाड़ी इलाकों में अब राहत और बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे में फंसे और लापता लोगों तक पहुंचना है।
This is how the flood entered Trishuli Bazaar.#Nepal#Flashflood pic.twitter.com/XRVk5kX9ur
— Dr. Kiran J Patel (@kiranpatel1977) August 27, 2026
Nepal Floods: मृतकों की संख्या 469 पहुंची, 1400 से ज्यादा लोग अब भी लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
नेपाल में बुधवार को आई भयानक फ्लैश फ्लड से मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है। वहीं, 178 भारतीयों समेत 1400 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। नेपाल पुलिस ने शुक्रवार को इस बड़ी त्रासदी में हुई मौतों के आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि की है।
नेपाल पुलिस के मुताबिक, भोटे कोशी-त्रिशूली कॉरिडोर के आसपास पानी में बह गए या फंसे सैकड़ों लोगों की तलाश के लिए बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है। चीन ने भी पुष्टि की है कि तिब्बत की ओर तीन लोगों की मौत हुई है।
288 भारतीयों से नहीं हो पा रहा संपर्क
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के ताजा आंकड़ों के अनुसार, नेपाल में 910 लोग लापता हैं या उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसमें भारतीय विदेश मंत्रालय का वह आंकड़ा भी शामिल है, जिसके मुताबिक गुरुवार देर शाम तक 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा था। नेपाल ने अभी तक मृतकों की राष्ट्रीयता के आधार पर कोई सूची जारी नहीं की है। इसलिए यह साफ नहीं है कि मरने वालों में कितने भारतीय नागरिक शामिल हैं।
तिब्बत में 558 लोगों के लापता होने की खबर
सीमा पार तिब्बत में चीनी अधिकारियों ने गुरुवार सुबह तक 558 लोगों के लापता होने की जानकारी दी थी। बीजिंग ने भी लापता लोगों का देश के हिसाब से आंकड़ा जारी नहीं किया है। ऐसे में यह पता नहीं चल पाया है कि लापता लोगों में कितने भारतीय या दूसरे देशों के नागरिक हैं। इसके अलावा, करीब 200 भारतीय तिब्बत में फंसे हुए हैं और उन्होंने मदद की गुहार लगाई है।
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288 लापता भारतीयों में 73 जलविद्युत कर्मचारी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नेपाल में संपर्क से बाहर 288 भारतीय नागरिकों में से 73 लोग त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले कर्मचारी हैं।
कैलाश यात्रा पर गए लोग भी फंसे
लापता लोगों में पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के वे समूह भी शामिल हैं, जो तिब्बत में कैलाश पर्वत की यात्रा पर जा रहे थे या वहां से लौट रहे थे। इनमें कई लोग तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल के रहने वाले हैं।
गुरुवार दोपहर 1 बजे तक तमिलनाडु के 21 पर्यटकों को सुरक्षित बचा लिया गया था और उन्हें काठमांडू लाया जा रहा था। वहीं, तिब्बती क्षेत्र में फंसे करीब 200 अन्य भारतीयों ने भी भारतीय अधिकारियों से मदद मांगी है।
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नेपाल के आंकड़ों में क्यों है अंतर?
नेपाल पर्यटन बोर्ड की सूची में आंकड़े कुछ अलग हैं। इसमें 178 भारतीयों को लापता या संपर्क से बाहर बताया गया है। इसका कारण यह है कि भारत की ओर से बताए गए 288 के आंकड़े में जलविद्युत परियोजना के कर्मचारी और ऐसे दूसरे समूह भी शामिल हैं, जो नेपाल की पर्यटन सूची में नहीं आते। नेपाल की पर्यटक सूची में सबसे बड़ा समूह भारतीय नागरिकों का ही है।
573 लोगों को हवाई उड़ानों से बचाया गया
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने बताया कि गुरुवार को 69 हवाई उड़ानों के जरिए 573 लोगों को बचाया गया। इसके साथ ही सेना और निजी कंपनियों के अतिरिक्त हेलीकॉप्टरों को भी जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल करने के लिए तैयार रखा गया है।
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