'तेहरान PM नेतन्याहू को नरक में भेजेगा...', ईरानी सेना प्रमुख रेजाई ने इजरायल और अमेरिका को दी धमकी
Iranian Military Chief Rezaei: ईरान और अमेरिका के बीच अभी भी हालात सामान्य नहीं हैं. साथ ही ईरान और इजरायल के बीच लेबनान मुद्दे पर सहमति नहीं बन पा रही है. वहीं ईरान के मेजर जनरल मोहसेन रेजाई ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर ईरान की नाकाबंदी जारी रही तो दोनों देशों के बीच गंभीर टकराव हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल के साथ नया संघर्ष शुरू हुआ तो हालात और गंभीर हो जाएंगे.
ईरानी समाचार एजेंसी IRIB के मुताबिक, अल-मनार को दिए इंटरव्यू में रेजाई ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर भी तीखी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि ईरान नेतन्याहू को "नरक में भेज देगा. रेजाई ने दावा किया कि नेतन्याहू की नीतियों और कार्रवाई से इजरायल के अस्तित्व पर खतरा और बढ़ गया है.
In an interview with Al-Manar, Iran’s SNSC Secretary, Major Gen. Rezaei, said:
— IRIB (Islamic Republic of Iran Broadcasting) (@iribnews_irib) August 27, 2026
We will prove that Netanyahu’s major mistakes have brought the end of the Zionist regime’s existence closer. The Islamic Republic of Iran will send Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu to hell.
नेतन्याहू पर लगायाा गंभीर आरोप
रेजाई ने यह भी आरोप लगाया कि नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे की हत्या की ईरानी साजिश के बारे में झूठी जानकारी फैलाई थी, और दावा किया कि इन रिपोर्टों ने ट्रंप को घबरा दिया था और उनके निर्णय लेने की प्रक्रिया को बाधित कर दिया था. उन्होंने आगे कहा कि नेतन्याहू ने ट्रंप की हत्या की ईरानी साजिश के बारे में झूठी खबरें फैलाकर ट्रंप को डरा दिया और उनके निर्णय लेने की प्रक्रिया को बाधित कर दिया. इस खबर से डरकर ट्रंप एक फूड ट्रक कर्मचारी की तरह इधर-उधर भागने लगे.
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दहिये और बेरूत को बताया रेड लाइन
लेबनान के साथ इजरायल के संघर्ष की स्थिति पर, रेजाई ने कहा कि दहिये और बेरूत "हमारी रेड लाइन" हैं और चेतावनी दी कि भविष्य में होने वाला कोई भी संघर्ष पिछले युद्धों से अलग होगा. रेजाई ने आगे कहा कि हम स्थिति पर पूरी गंभीरता से नजर रख रहे हैं. इजरायल को लेबनान के कब्जे वाले क्षेत्रों से पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. अगर संघर्ष फिर से शुरू होता है, तो हम एक नए चरण के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं; भविष्य में होने वाला कोई भी युद्ध पहले के युद्धों से अलग होगा.
जवाबी कार्रवाई की दी धमकी
रेजाई ने कहा कि अमेरिका का सैन्य कार्रवाई से हटकर आर्थिक दबाव बनाने पर जोर देना दिखाता है कि सैन्य हमले बेअसर रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका आर्थिक दबाव बढ़ाता है, तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई करेगा. इसके तहत क्षेत्र में अमेरिकी आर्थिक हितों को निशाना बनाया जा सकता है.
7 से 8 करोड़ बैरल तेल निर्यात का दावा
ईरान के तेल निर्यात को लेकर रेजाई ने दावा किया कि युद्धविराम के दौरान ईरान ने करीब 7 से 8 करोड़ बैरल तेल का निर्यात किया. उन्होंने कहा कि ईरान ने इस दौरान नौसैनिक नाकाबंदी को तोड़ने में सफलता हासिल की. रेजाई ने चेतावनी दी कि अगर ईरान पर नाकाबंदी जारी रखी गई, तो वह पूरी ताकत से जवाब देगा और क्षेत्र में अमेरिकी आर्थिक हितों को निशाना बनाएगा. उन्होंने कहा कि नाकाबंदी जारी रखना अमेरिका के साथ गंभीर टकराव का कारण बन सकता है.
इससे पहले 24 अगस्त को, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ नवीनतम प्रतिबंधों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे तेहरान और उसके कार्यों का समर्थन करने वालों से उचित रूप से भारी कीमत वसूलते हैं.
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भाई की कलाई पर कब बांधें राखी? रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त के साथ ग्रहण का भी रखें ध्यान
भाई-बहन के प्यार और विश्वास का त्योहार रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त को मनाया जाएगा। त्योहार को लेकर घरों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। बहनें भाइयों के लिए राखी और मिठाई खरीद रही हैं, वहीं भाई भी अपनी बहनों को खास तोहफा देने की तैयारी में हैं। इस बार रक्षाबंधन को लेकर एक राहत वाली बात यह है कि राखी बांधने के दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा।
भद्रा को लेकर हर साल लोगों के मन में सवाल रहता है कि राखी कब बांधें और किस समय राखी बांधने से बचना चाहिए। इस बार भद्रा 27 अगस्त को ही समाप्त हो जाएगी। ऐसे में 28 अगस्त को भाई पूरे दिन अपनी बहनों से राखी बंधवा सकेंगे। हालांकि राहुकाल का समय जरूर ध्यान में रखना होगा।
27 अगस्त को ही खत्म हो जाएगा भद्राकाल
रक्षाबंधन से एक दिन पहले यानी 27 अगस्त को भद्रा काल रहेगा। दी गई जानकारी के अनुसार, भद्रा 27 अगस्त की सुबह 9:08 बजे से रात 9:32 बजे तक रहेगी। इसका मतलब है कि 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन राखी बांधते समय भद्रा की बाधा नहीं रहेगी।
धार्मिक परंपरा में भद्रा के दौरान राखी बांधने से बचने की मान्यता है। इसी वजह से रक्षाबंधन पर लोग सबसे पहले भद्रा का समय देखते हैं और इसके बाद राखी बांधने का समय तय करते हैं। इस बार भाई-बहनों को इस बात की चिंता नहीं करनी होगी, क्योंकि भद्रा 27 अगस्त की रात में ही समाप्त हो जाएगी।
28 अगस्त को राखी बांधने में नहीं होगी भद्रा की रुकावट
इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। 28 अगस्त को भद्रा खत्म होने के बाद ही राखी का त्योहार मनाया जाएगा। इसलिए बहनें अपने भाई को पूरे दिन राखी बांध सकती हैं।
रक्षाबंधन पर भद्रा को लेकर सबसे ज्यादा असमंजस उन परिवारों में रहता है, जहां सुबह ही राखी बांधने की तैयारी होती है। इस बार ऐसे परिवारों के लिए स्थिति आसान है। 28 अगस्त को भद्रा नहीं होने के कारण राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
राहुकाल में राखी बांधने से बचें
28 अगस्त को सुबह 10:31 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक राहुकाल रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार राहुकाल के दौरान शुभ काम करने से बचा जाता है। इसलिए इस समय राखी बांधने की बजाय इसके पहले या बाद का समय चुना जा सकता है।
रक्षाबंधन पर अगर परिवार सुबह राखी बांधना चाहता है तो राहुकाल शुरू होने से पहले यह रस्म पूरी की जा सकती है। वहीं, दोपहर 12:07 बजे के बाद भी भाई की कलाई पर राखी बांधी जा सकती है।
रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण
28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन खंडग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका समेत हिंद महासागर, प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक मान्य नहीं होगा और रक्षाबंधन की पूजा व अन्य धार्मिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।
नेशनल अवार्ड प्राप्त खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी इस स्थिति में आती है कि पृथ्वी की गहरी छाया चंद्रमा को पूरी तरह नहीं ढक पाती है बल्कि आंशिक भाग को ढकती है तो चंद्रमा का गहरी छाया से ढका भाग ग्रहणग्रस्त दिखाई देता है, इसे आंशिक चंद्र ग्रहण या पार्शियल लुनर इकल्प्सि कहते हैं ।
एक गणितीय अनुमान के अनुसार विश्व की लगभग 41 प्रतिशत जनसंख्या इसे देख सकेगी । 12 अगस्त को हुए सूर्य ग्रहण के 15 दिन के अंतराल से यह घटना होने पर सोशल मीडिया में बताया जा रहा है कि 15 दिन के अंतर से ग्रहण होना अनिष्ट करता है जबकि वैज्ञानिक तथ्य है कि कोई भी ग्रहण अकेला नहीं होता है। हर ग्रहण जोड़ी के रूप मे 15 दिन के अंतर पर होता है । आज तक जितने भी ग्रहण हुए है उनके 15 दिन के अंतर पर दूसरा ग्रहण होता ही है । इसलिए यह ग्रहण कोई अनोखी घटना नहीं है ।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी धार्मिक मान्यता या शुभ-अशुभ दावे की पुष्टि नहीं करता।
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