नेपाल में फिर बाढ़ की संभावना, बिहार में आएगी तबाही?:गंगा और गंडक उफन रहीं, अबकी ग्लेशियर टूटा तो नियंत्रण में नहीं रहेंगे हालात
‘हालात काबू में हैं, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है।’ नेपाल में तबाही के बाद CM सम्राट चौधरी के इस बयान ने बिहार के 21 जिलों के लोगों को फौरी तौर पर राहत तो दी है। लेकिन साथ ही आगे की चुनौती के लिए भी आगाह कर दिया है। नेपाल में क्या फिर तबाही आने वाली है, अगर आई तो बिहार का क्या होगा, गंगा-गंडक-कोसी में क्या चल रहा, समझेंगे; बूझे की नाही में…। क्या नेपाल में फिर से बाढ़ आने की संभावना है? वैज्ञानिकों ने आगे के खतरे से इनकार नहीं किया है। एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि घाटी की अस्थिर ढलानें और आंशिक रूप से ढहा हुआ ग्लेशियर आने वाले दिनों में मलबे के नए बहाव से दूसरी बाढ़ की स्थिति पैदा कर सकता है। नेपाल के गृह मंत्री सूडान गुरुंग ने कहा कि ल्हेन्डे नदी अभी पूरी तरह से साफ नहीं हुई है। 'इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) ने कहा कि बादलों के ढके होने के कारण क्षेत्र की उपग्रह से निगरानी करने में भी दिक्कत आई है। वहीं, काठमांडू यूनिवर्सिटी के जलवायु शोधकर्ता और प्रोफेसर रिजन भक्त कायस्थ ने कहा, 'शुरुआत में चिंता थी कि ऊपर की ओर एक और बड़ी झील बन सकती है, लेकिन अभी तक ऐसी झील के अस्तित्व की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।' कायस्थ ने कहा, 'जोखिम अभी भी बना हुआ है। बढ़ता तापमान ग्लेशियरों के पिघलने, बर्फ और चट्टानों के टूटने तथा हिमालय में हिमस्खलन की संभावना को बढ़ाता है। लेकिन हम सटीक रूप से यह नहीं कह सकते कि अगली घटना कहां होगी।' नेपाल में ग्लेशियर टूटेगा तो बिहार को खतरा क्यों बिहार से करीब 400 फीट की ऊंचाई (समुंद्र तल से) पर स्थित नेपाल की सभी नदियों का पानी घूम फिर कर बिहार ही आता है। इससे नदियों के 3 रूट से ऐसे समझिए… रूट-1ः नेपाल की नारायणी से चंपारण, सारण तबाह रूट-2ः नेपाल की सप्तकोशी से सहरसा-सुपौल का एरिया प्रभावित रूट-3ः UP के रास्ते भी बिहार में आता है नेपाल का पानी मतलब यह कि नेपाल के उत्तर में हादसा हो या पश्चिम में सारा पानी बिहार ही पहुंचेगा। ऐसे में नेपाल की नदियों की हलचल का बिहार पर ज्यादा असर पड़ता है। अब नीचे के मैप से समझिए…नदियों का रूट …दूसरा ग्लेशियर टूटा तो क्या बिहार में बिगड़ेंगे हालात? बिल्कुल। अभी ताजा हालात है कि नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को आई बाढ़ के बाद बिहार के गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं। वाल्मीकिनगर बैराज से हर घंटे औसतन डेढ़ लाख से ज्यादा क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, गंडक में 3 मीटर ऊंची लहरें उठ सकती हैं, फ्लैश फ्लड आने की भी आशंका है। अब 2 कारणों से समझिए, कैसे बिगड़ सकते हैं हालात… 1. गंगा-गंडक उफान पर, पानी का बढ़ रहा दबाव बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के मुताबिक, 27 अगस्त की शाम 4 बजे तक गोपालगंज के डुमरियाघाट में गंडक, पटना में गंगा, खगड़िया में बुढ़ी गंडक, सीवान के दरौली में घाघरा, कटिहार के कुरसेला में कोसी नदी खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं। नेपाल के पानी के कारण गंडक और गंगा में पानी का फ्लो बढ़ रहा है। खगड़िया में गंगा और बूढ़ी गंडक में पानी के कारण 20 पंचायतों में 50 हजार से ज्यादा घर पानी में डूब गए हैं। अगर नेपाल में दूसरा ग्लेशियर टूटा तो बिहार में हालात खराब हो जाएंगे। क्योंकि अभी ही नदियों में पानी काफी बढ़ गया है। आगे पानी आने पर तबाही ही मचेगी। CM सम्राट चौधरी ने 27 अगस्त को निरीक्षण करने के बाद कहा, ‘खतरा अभी टला नहीं है। भगवान की कृपा रही तो सब ठीक होगा।’ 2. अगले 5 दिन तक बिहार और नेपाल में बारिश का अलर्ट नेपाल और बिहार में अगले 5 दिन तक यानी 2 सितंबर तक बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, आज यानी 28 अगस्त को बिहार में तेज बारिश का अलर्ट है। वहीं, नेपाल में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। हालांकि, 29 अगस्त से 2 सितंबर तक नेपाल और बिहार में रुक-रुक कर धीमी बारिश की चेतावनी दी गई है। अगर मौसम विभाग का अनुमान सही साबित हुआ तो यह बिहार के गंडक, कोसी, गंगा के किनारे रहने वाले लोगों को खासा दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। …लेकिन राहत की 2 बातें पहली- बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के मुताबिक, नेपाल की सभी 22 नदियों का जलस्तर 27 अगस्त की शाम 5 बजे तक खतरे के निशान से नीचे हैं। खास बात है कि त्रिशूली यानी नारायणी और भोटेकोशी यानी सप्तकोशी नदी खतरे के निशान से क्रमशः 4 और 3 फीट नीचे बह रही है। मतलब अभी वहां नदियों में ज्यादा पानी नहीं है। अगर थोड़ी बारिश हुई भी तो नदियां उफान नहीं मारेंगी, बशर्ते ग्लेशियर या बादल न फट जाए। दूसरी- जल संसाधन विभाग के मुताबिक, गंडक बैराज का अपस्ट्रीम 353.770 फीट और डाउनस्ट्रीम 350.930 फीट है। जो तय मानक 362 फीट से करीब 8 फीट कम है। इसका मतलब हुआ कि अभी बैराज पर 8 फीट ज्यादा तक पानी स्टोर किया जा सकता है। अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम के पानी के स्तर में मामूली अंतर (2.84 फीट) बता रहा है कि बांध के गेट खुले हुए हैं और बांध पर ज्यादा दबाव नहीं है। मतलब पानी की गति सामान्य व नियंत्रित है।
मेंटल हेल्थ- 25 साल बाद पेरेंट्स के घर लौटी हूं:यहां मन नहीं लग रहा, अपनी अकेली जिंदगी याद आती है, क्या मैं स्वार्थी हूं?
सवाल- मेरी उम्र 45 साल है। पिछले 25 सालों से मैं घर से दूर रह रही थी। पहले पढ़ाई और फिर जॉब के लिए। एक साल पहले ही मैं अपने होमटाउन में पेरेंट्स के घर में शिफ्ट हुई हूं। लेकिन जैसा मैंने सोचा था, वैसा बिल्कुल फील नहीं हो रहा। मुझे लगा था कि इतने साल बाद घर लौटना अच्छा लगेगा। ज्यादा सुकून और खुशी होगी। लेकिन इसका ठीक उल्टा हुआ है। मुझे ज्यादा तनाव और अकेलापन महसूस होने लगा है। यहां मेरा बिल्कुल मन नहीं लगता। मुझे अपनी अकेली जिंदगी की याद आती है। बेंगलुरू में मेरा घर और मेरी सिंगल लाइफ। ये बात मैं अपने पेरेंट्स से कैसे कहूं कि मुझे इस घर में रहना अच्छा नहीं लग रहा। मैं अपनी मेंटल हेल्थ को कैसे ठीक रखूं? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आपकी भावनाएं गलत नहीं हैं। 25 साल तक घर से दूर रहना बहुत लंबा समय होता है। इस दौरान आपने सिर्फ पढ़ाई और नौकरी नहीं की, बल्कि अपनी पूरी जिंदगी अपने तरीके से जीना सीखा है। आपने तय किया होगा कि कब उठना है, कब खाना है, किससे मिलना है, कब घर से बाहर जाना है, छुट्टी कैसे बितानी है और कितना समय अकेले रहना है। अब एक साल से आप फिर उसी घर में हैं, जहां कभी आपकी जिंदगी की शुरुआत हुई थी। लेकिन इस बीच आप खुद बहुत बदल चुकी हैं। इसलिए घर वही होने के बावजूद आपका अनुभव पहले जैसा नहीं है। यह जरूरी नहीं कि आपका अपने माता-पिता से प्यार कम हो गया है। हो सकता है कि आपको सिर्फ अपनी पुरानी स्वतंत्र जिंदगी की कमी महसूस हो रही हो। घर लौटने की खुशी की जगह तनाव क्यों? लंबे समय तक अकेले रहने के बाद जब कोई व्यक्ति माता-पिता के साथ वापस रहने लगता है तो उसे अपनी आजादी कम होती हुई महसूस हो सकती है। माता-पिता का ये पूछना कि– ये उनका प्यार और चिंता का तरीका हो सकता है। लेकिन इतने साल अपने फैसले खुद लेने के बाद यही बातें आपको रोक-टोक जैसी लग सकती हैं। इसी तरह परिवार के साथ खाना, हर दिन बातचीत करना और अपनी दिनचर्या में दूसरों को शामिल करना माता-पिता के लिए सामान्य हो सकता है। लेकिन आपको अपने अकेलेपन और पर्सनल स्पेस की जरूरत ज्यादा महसूस हो सकती है। इसमें किसी एक को गलत ठहराने की जरूरत नहीं है। दोनों की जरूरतें अलग हो सकती हैं। परेशानी की असल वजह क्या है? पहले यह समझें कि आपको वास्तव में परेशानी किस बात से है, जैसेकि– इन सवालों के जवाब आपको असली समस्या को समझने में मदद करेंगे। माता-पिता से बात कैसे करें? सबसे जरूरी बात यह है कि माता-पिता से यह न कहें कि “मुझे आपके साथ रहना अच्छा नहीं लगता।” ऐसा सुनकर उन्हें लग सकता है कि आप उनके प्यार या घर को अस्वीकार कर रही हैं। इसके बजाय अपनी परेशानी को अपनी जरूरत के रूप में बताएं। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें– पहले चिट्ठी लिखना भी अच्छा विकल्प अगर आपको लगता है कि आमने-सामने बात करते समय आप अपनी बात ठीक से नहीं कह पाएंगी, तो पहले माता-पिता को एक पत्र भी लिख सकती हैं। यहां मैं आपके लिए एक काल्पनिक खत लिख रहा हूं। आप इसमें अपने मन की बातें लिख सकती हैं। प्यारे मम्मी-पापा, मैं आप दोनों से एक जरूरी बात कहना चाहती हूं। शायद सामने बैठकर मैं इसे ठीक से न कह पाऊं। इसलिए पत्र लिख रही हूं। सबसे पहले मैं आपको बताना चाहती हूं कि इतने साल बाद घर लौटने पर आपने जिस तरह मुझे अपनाया, उसके लिए मैं बहुत आभारी हूं। मुझे पता है कि मेरे लिए आपके मन में बहुत प्यार है और आप चाहते हैं कि मैं आपके साथ रहूं। लेकिन पिछले 25 सालों में मेरी जिंदगी बहुत बदल गई है। मैं लंबे समय तक अकेले रही हूं। मुझे अपने समय, काम, फैसले और निजी जगह को अपने तरीके से संभालने की आदत हो गई है। घर लौटने के बाद मुझे महसूस हुआ कि मैं अपनी उस स्वतंत्र जिंदगी को बहुत याद कर रही हूं। इसका मतलब यह नहीं है कि मैं आपसे दूर होना चाहती हूं। मैं सिर्फ यह समझने की कोशिश कर रही हूं कि आपके साथ रहते हुए अपनी स्वतंत्रता कैसे बनाए रखूं। मैं चाहती हूं कि हम मिलकर कुछ बातें तय करें। जैसे हम कितना समय साथ बिताएं, मुझे कब अपने काम या अकेले रहने का समय चाहिए और किन निजी फैसलों में मुझे अपनी आजादी बनाए रखने की जरूरत है। मैं यह भी समझती हूं कि मेरे घर लौटने के बाद आपको भी अपनी दिनचर्या में बदलाव करना पड़ा होगा। इसलिए मैं सिर्फ अपनी बात नहीं रखना चाहती। मैं आपकी परेशानी भी समझना चाहती हूं। मैं घर छोड़कर आपसे दूर नहीं जाना चाहती। मैं ऐसा रास्ता ढूंढना चाहती हूं, जिसमें हमारा रिश्ता भी अच्छा रहे और मैं अपनी स्वतंत्र पहचान भी बनाए रखूं। प्यार के साथ। घर में तय करें कुछ स्पष्ट सीमाएं माता-पिता के साथ रहने का मतलब यह नहीं है कि आपकी सारी स्वतंत्रता खत्म हो जाए। आप मिलकर कुछ ऐसी बातें तय कर सकते हैं, जिनसे दोनों पक्ष सहज रहें। मसलन– लेकिन सीमाएं तय करते समय सिर्फ अपनी सुविधा के बारे में न सोचें। माता-पिता की भी अपनी दिनचर्या है। 25 सालों में उन्होंने भी अपने घर को अपने तरीके से चलाया होगा। इसलिए उनसे भी यह पूछें— “मेरे यहां रहने से आपको किन बातों से परेशानी हो रही है?” इस सवाल से बातचीत एकतरफा नहीं रहेगी। दोनों पक्ष अपनी जरूरतें समझा पाएंगे। अपनी मेंटल के लिए क्या करें? सबसे पहले खुद को दोष देना बंद करिए। यह मत सोचिए कि “मुझे तो खुश होना चाहिए, फिर मैं दुखी क्यों हूं?” भावनाएं इस तरह काम नहीं करतीं। अपनी पुरानी जिंदगी की वे चीजें वापस अपनी दिनचर्या में शामिल करें, जिनसे आपको अच्छा महसूस होता था। दोस्तों से मिलें, अकेले बाहर जाएं, टहलें, एक्सरसाइज करें, पढ़ें या अपने किसी पुराने शौक के लिए समय निकालें। सबसे जरूरी है कि आपकी पूरी जिंदगी सिर्फ घर और माता-पिता के इर्द-गिर्द न सिमट जाए। आपकी अपनी सामाजिक जिंदगी, काम, दोस्त, रुचियां और निजी समय भी जरूरी है। चार से छह सप्ताह तक कुछ बदलाव करके देखिए। फिर खुद से पूछिए– अगर बदलावों के बाद भी लगातार उदासी बनी रहे, किसी काम में मन न लगे, नींद या भूख में बड़ा बदलाव आए, बहुत ज्यादा चिंता हो, रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें या जीवन को लेकर निराशा बढ़ने लगे, तो काउंसिलर से बात करना सही रहेगा। अंतिम बात आखिर में एक बात याद रखिए, माता-पिता से प्यार करने और उनके साथ न रह पाने की इच्छा, दोनों बातें एक साथ सच हो सकती हैं। आपको अपने माता-पिता और अपनी स्वतंत्र जिंदगी में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है। शायद आपको घर छोड़ने या खुद को बदलने से पहले एक नया तरीका खोजने की जरूरत है— माता-पिता के साथ एक वयस्क बेटी की तरह रहना, न कि 25 साल पहले वाली बेटी की तरह। इससे रिश्ता भी बचेगा, अपनापन भी बना रहेगा और आपकी स्वतंत्र जिंदगी भी रहेगी।
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