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Tibet में Flash Floods से 5 लोगों की मौत, 558 लापता होने की पुष्टि

के जे एम वर्मा बीजिंग, 28 अगस्त चीन ने शुक्रवार को कहा कि तिब्बत में चीन-नेपाल सीमा पर स्थित एक भूमि पत्तन क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ के बाद पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 558 लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं। बुधवार को तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरोंग काउंटी में आई बाढ़ ने सीमा के पास के गांवों और कस्बों को अपनी चपेट में ले लिया था।

नेपाल में इस आपदा में 538 लोगों की मौत हुई है। तिब्बत के आपातकालीन प्रबंधन विभाग के अनुसार, क्षेत्र में मृतकों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है जबकि 558 लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों में 260 की पहचान विदेशी नागरिकों के रूप में की गई है लेकिन उनकी राष्ट्रीयता की जानकारी अभी साझा नहीं की गई है।

चीन और भारत के बीच संबंधों में सुधार के बाद बड़ी संख्या में भारतीय तीर्थयात्री कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तिब्बत पहुंचे हैं। बताया गया है कि कुछ भारतीय तीर्थयात्री तिब्बत-नेपाल सीमा पर स्थित आव्रजन भवन में मौजूद थे, जब अचानक आई बाढ़ ने उसे बुरी तरह प्रभावित किया। आव्रजन भवन को भीषण बाढ़ के पानी से घिरते दिखाने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर आए हैं।

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, इससे पहले शुक्रवार को चीनी अधिकारियों ने बताया कि ग्यिरोंग काउंटी से 1,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें 555 पर्यटक और 499 स्थानीय लोग शामिल हैं। सरकारी समाचार पत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ के अनुसार, अब इलाके में कोई पर्यटक फंसा हुआ नहीं है।

तिब्बत में लापता विदेशी पर्यटकों का विवरण पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि बीजिंग संबंधित दूतावासों के साथ विवरण को लेकर समन्वय कर रहा है। क्षेत्र में बचाव अभियान जारी है और नागरिक उड्डयन प्राधिकरण भी इसमें शामिल हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, बृहस्पतिवार तक नागरिक उड्डयन सेवाओं ने 324 बचावकर्मियों को आपदा प्रभावित क्षेत्र में पहुंचाया और 24 टन बचाव उपकरण, दैनिक उपयोग की वस्तुएं तथा चिकित्सा सामग्री पहुंचाई।

अचानक आई बाढ़ से चीन की ओर बंदरगाह तक जाने वाली सड़कें कट गईं और संचार तथा बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। सरकारी प्रसारक सीजीटीवी ने बताया कि आपात संचार व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को बहाल करने की दिशा में चरणबद्ध प्रगति हुई है। उद्योग एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि एक दूरसंचार बेस स्टेशन को सफलतापूर्वक बहाल किया गया, दो नए बेस स्टेशन चालू किए गए और 5जी इंटर-नेटवर्क रोमिंग सुविधा भी सक्रिय कर दी गई।

बृहस्पतिवार देर रात चीन ने स्तर-4 चेतावनी जारी की। इसमें दो नदियों के संगम पर बनी नई झील के प्राकृतिक बांध के टूटने और निचले इलाकों में बाढ़ आने के गंभीर खतरे की चेतावनी दी गई। चीनी अधिकारियों के अनुमान के अनुसार, छुओचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी इस झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका है।

अगले तीन दिनों में इसमें तीन लाख घन मीटर और पानी आने की संभावना है, जिससे प्राकृतिक बांध के टूटने की आशंका बढ़ गई है।

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ये क्या बड़ा खेल हो गया? सऊदी को पछाड़ भारत बना केन्या का नंबर 1 तेल सप्लायर

एक ऐसा देश जिसे कभी कच्चे तेल के लिए पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर माना जाता था, आज वह दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों को उनके अपने ही खेल में मात दे रहा है। भारत ने इतिहास रच दिया है। पहली बार भारत ने सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात यानी यूएई जैसे तेल के दिग्गजों को पछाड़ते हुए अफ्रीका के एक बेहद महत्वपूर्ण देश केन्या का सबसे बड़ा पेट्रोल सप्लायर बनने का गौरव हासिल किया है। यह सिर्फ एक व्यापारिक समझौता नहीं बल्कि ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स में भारत के बढ़ते वर्चस्व और न्यू इंडिया की फॉरेन पॉलिसी का सीधा सबूत है। दरअसल केन्या जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दशकों से सऊदी अरब और यूएई पर निर्भर था आज भारत की ओर क्यों देख रहा है? इसके पीछे एक बड़ी वजह है सुरक्षा और स्थिरता का भरोसा। हाल के समय में मिडिल ईस्ट के हालात और ग्लोबल सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने केन्या को डरा दिया था। 

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केन्या को यह डर सताने लगा था कि क्या सऊदी और यूएई उसे भविष्य में सुरक्षित रूप से तेल मुहैया करा पाएंगे। अब तेल का संकट किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकता है। ऐसे में केन्या ने एक साहसिक फैसला लिया। उसने अपने पुराने पार्टनर्स को पीछे छोड़ते हुए भारत को अपना प्राइम सप्लायर चुन लिया। इस समय केन्या के तमाम बड़े तेल कॉन्टैक्ट्स भारत की झोली में आ रहे हैं। यह भारत की विश्वसनीयता का प्रमाण है कि एक अफ्रीकी देश ने उस पर अपनी पूरी इकॉनमी की चाबी सौंप दी है। अब यहां एक तकनीकी सवाल यह उठता है कि कई लोग कहेंगे कि सऊदी और यूएई तो कच्चे तेल के राजा हैं तो भारत ने उन्हें कैसे पछाड़ा? दरअसल इसका जवाब बहुत सीधा है। 

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अफ्रीका के 90% से ज्यादा देश कच्चा तेल खरीदते ही नहीं। क्यों? क्योंकि कच्चे तेल को रिफाइन करना यानी उसे पेट्रोल, डीजल या विमान ईंधन में बदलना एक बहुत ही खर्चीला और जटिल काम है। एक रिफाइनरी खड़ी करने में अरबों डॉलर लगते हैं और उसे चलाने की तकनीक हर देश के पास नहीं होती है। अफ्रीकी देश यह भारी खर्च अफोर्ड नहीं कर सकते हैं। इसलिए वह सीधा फिनिश्ड प्रोडक्ट यानी कि पेट्रोल और डीजल मंगाते हैं और यही भारत का सबसे मजबूत पक्ष है। भारत दुनिया का रिफाइनिंग हब बन चुका है। हमारे पास दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरीज हैं। भारत कच्चा तेल खरीदता है। उसे वर्ल्ड क्लास क्वालिटी में रिफाइन करता है और फिर पूरी दुनिया को बेचता है। केन्या के मामले में भी यही हुआ। उन्हें पेट्रोल चाहिए था और भारत ने उन्हें सबसे बेहतर डील और सुरक्षा दे दी है। यह जीत सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि सामरिक भी है। 

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याद कीजिए जब पहले कभी केन्या या अफ्रीकी देशों में तेल का संकट आता था तो वह किसकी तरफ देखते थे? अमेरिका, रूस या सबसे ज्यादा चीन पर। चीन ने पिछले दो दशकों में अफ्रीका में भारी निवेश करके वहां के देशों को अपने कर्ज के जाल में फंसाया। लेकिन भारत की रणनीति अलग है। भारत निर्भरता नहीं साझेदारी में विश्वास रखता है। केन्या का भारत को चुनना यह सुनिश्चित करता है कि वो चीन के पाले में ना जाए। यह भारत की विदेश नीति की एक बहुत बड़ी डिप्लोमेटिक विक्ट्री है।

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गंभीर से भिड़ने वाले पिच क्यूरेटर पर गिरी गाज, 'ओवल कांड' को लेकर लिया गया एक्शन

Lee Fortis gautam gambhir clash: पिछले साल भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर के साथ तीखी बहस को लेकर चर्चा में आने वाले फोर्टिस को अब इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के एक कर्मचारी के साथ कथित तौर पर हुए विवाद के बाद छुट्टी पर भेज दिया गया है. यह घटना द ओवल में द हंड्रेड मुकाबले की तैयारियों के दौरान हुई. रिपोर्ट्स की मानें तो दोनों के बीच बहस इतनी बढ़ गई थी कि इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड का कर्मचारी भावुक होकर रो पड़ा. Fri, 28 Aug 2026 16:41:01 +0530

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