लॉरेंस का घर पूछा तो झिझका दुकानदार:बुजुर्ग बोले- 110 किल्ले जमीन, 3-4 कोठियां, लैंडलॉर्ड का बेटा; चंडीगढ़ जाकर गलत संगत में पड़ा
पंजाब के अबोहर का दुतारांवाली गांव। बाहर गांव का बोर्ड, अंदर जाती सड़क के दोनों तरफ खेत। कहीं बैलगाड़ी गुजर रही है तो कहीं पेड़ के नीचे ताश खेलते बुजुर्ग। यही गैंगस्टर लॉरेंस का गांव है। लॉरेंस इस वक्त अहमदाबाद की साबरमती जेल में बंद है और कई गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी है। गांव में पहुंचते ही लॉरेंस का घर पूछा तो किराना दुकानदार थोड़ा झिझका, फिर रास्ता बता दिया। आगे मंदिर के पास मिले बुजुर्गों से बात हुई तो जुर्म की चर्चा से पहले लॉरेंस के बचपन की बातें सामने आईं- क्रिकेट, स्कूल और गांव का खेल का मैदान। ग्रामीणों के मुताबिक, लॉरेंस के परिवार के पास करीब 110 किल्ले जमीन और 3-4 कोठियां हैं। एक ग्रामीण ने कहा, 'उसे फिरौती मांगने की जरूरत नहीं थी।' ग्रामीणों के मुताबिक, आखिरी बार लॉरेंस को 10-12 साल पहले गांव में देखा गया था। तब से वह सिर्फ मीडिया में ही नजर आता है। वहीं, ग्राउंड में खेल रहे बच्चों ने लॉरेंस के बारे में कैमरे पर बात करने से इनकार कर दिया। घर पूछने पर दुकानदार झिझका, फिर मंदिर का रास्ता बताया गांव में लॉरेंस का घर और उसके दादा की याद में बना मंदिर तलाशने के लिए टीम ने एक किराना की दुकान पर रुककर रास्ता पूछा। दुकानदार पहले थोड़ा झिझका, लेकिन बाद में मंदिर की तरफ जाने का रास्ता बता दिया। आगे बढ़ने पर मंदिर के पास पेड़ के नीचे कुछ बुजुर्ग ताश खेलते मिले। टीम ने अपना परिचय दिया तो उन्होंने बातचीत शुरू की। दादा की याद में मंदिर, यहीं मिले गांव के बुजुर्ग दुतारांवाली में लॉरेंस के दादा की याद में मंदिर बना हुआ है। इसी मंदिर के पास मिले बुजुर्गों से बातचीत में लॉरेंस के बचपन की बातें सामने आईं। बुजुर्गों ने बताया कि बचपन में लॉरेंस खेलकूद में आगे रहता था। उसे क्रिकेट का शौक था। क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए घर से पैसे लाता था गांव निवासी अशोक कुमार ने लॉरेंस के बचपन को याद करते हुए कहा कि वह खेलकूद में ज्यादा ध्यान देता था। अशोक के मुताबिक, लॉरेंस गांव में क्रिकेट टूर्नामेंट करवाने के लिए अपने घर से पैसे लगाता था। लॉरेंस हमारे गांव में बहुत अच्छा लड़का था। लॉरेंस नशे के खिलाफ रहता था और नशा करने वाले युवाओं को रोकता-समझाता था 5वीं तक साथ पढ़े, तब कोई गैंग या ग्रुप नहीं था लॉरेंस के साथ पांचवीं कक्षा तक पढ़े दर्शी राज ने भी उसके बचपन की बातें बताईं। उन्होंने कहा कि उस समय लॉरेंस खेलकूद में रहता था और बच्चों को खेलवाने के लिए अपने घर से पैसे लगाता था। दर्शी राज ने बताया कि वह खुद मध्यम परिवार से हैं। उनके मुताबिक, लॉरेंस ने उन्हें भी अपनी तरफ से खेलवाने के लिए पैसे दिए थे। उन्होंने कहा कि लॉरेंस पढ़ाई में भी अच्छा था और स्कूल के शिक्षकों के साथ उसका रिश्ता पिता-पुत्र जैसा था। बचपन में उसका कोई गैंग या ग्रुप नहीं था। वह खेल की भावना में रहता था। परिवार के पास 110 किले जमीन, 3-4 कोठियां बातचीत में लॉरेंस के परिवार की संपत्ति का भी जिक्र आया। ग्रामीणों के मुताबिक, परिवार के पास करीब 110 किले जमीन और 3-4 कोठियां हैं। उसके पिता खेती से जुड़े रहे हैं। गांव निवासी कृष्ण कुमार ने कहा कि परिवार आर्थिक रूप से संपन्न है। उन्होंने कहा कि जब परिवार के पास अपनी जमीन-जायदाद है तो लॉरेंस को किसी से रंगदारी मांगने की जरूरत नहीं थी। उन्होंने गांव में जरूरतमंद परिवारों की मदद और लड़कियों की शादी में पैसे देने की बात भी कही। कृष्ण कुमार ने कहा कि लॉरेंस के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी थी। उनका कहना है कि परिवार के पास अपनी जमीन थी, इसलिए लॉरेंस को किसी से रंगदारी मांगने की जरूरत नहीं थी। कृष्ण कुमार के मुताबिक, लॉरेंस पढ़ाई में अच्छा था। चंडीगढ़ जाने के बाद उसकी जिंदगी बदल गई। उन्होंने कहा- लॉरेंस ईमानदार लड़का था और अच्छी पढ़ाई कर रहा था। चंडीगढ़ गया और वहां किसी गलत संगत में पड़ गया। इसके बाद उसकी जिंदगी बदलती चली गई। आखिरी बार करीब 10-12 साल पहले देखा गांव निवासी शालू के मुताबिक, उन्होंने लॉरेंस को करीब 10-12 साल पहले आखिरी बार देखा था। शालू ने बताया कि उस समय लॉरेंस क्रिकेट खेलने के लिए ग्राउंड की तरफ जा रहा था। मंदिर के पास मुलाकात हुई तो उन्होंने लॉरेंस से हाथ भी मिलाया था। इसके बाद वह गांव नहीं आया। बच्चे ग्राउंड में खेलते मिले, लेकिन लॉरेंस पर बात नहीं की गांव के ग्राउंड में बच्चे खेलते मिले। टीम ने उनसे लॉरेंस के बारे में बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कैमरे पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया। उन्होंने ऐसा क्यों किया, इसकी वजह उन्होंने नहीं बताई। चंडीगढ़ से साबरमती जेल तक: लॉरेंस की कहानी ****************** ये खबर भी पढ़ें… लॉरेंस के भाई बोले- गैंगस्टर इमेज से फैमिली परेशान:सलमान खान ने माफी को मुद्दा बनाया; डाकू-आतंकियों जैसे सुधरने का मौका मिले सलमान खान मुकाम धाम आकर माफी मांग ले तो बिश्नोई समाज और लॉरेंस उसे माफ कर देंगे,लेकिन न जाने उसके दिमाग में क्या बैठा है, माफी को इश्यू बना दिया, काले हिरण के शिकार केस में फंसे बॉलीवुड एक्टर के लिए ये कहना है लॉरेंस के चचेरे भाई रमेश बिश्नोई का। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI इन्वेस्टिगेशन के लिए लॉरेंस को अमेरिका ले जाने की बात कह चुकी है। इसको लेकर लॉरेंस के पारिवारिक सदस्य ने दैनिक भास्कर से एक्सक्लूसिव बातचीत की। रमेश बिश्नोई ने कहा कि लॉरेंस हाई सिक्योरिटी जेल में बंद है तो वहां से नेटवर्क कैसे चला रहा, अमेरिकी जांच एजेंसी का दावा हिंदुस्तान के खिलाफ साजिश है (पढ़ें पूरी खबर)
नेपाल की बाढ़ में हरियाणा की डॉक्टर लापता:70 टीम मेंबर्स के साथ गई, आखिरी VIDEO कॉल में बोलीं-रक्षाबंधन पर आऊंगी; पिता परिषद चेयरमैन रहे
नेपाल में आई भीषण बाढ़ में हरियाणा के भिवानी की डॉक्टर प्रियंका चौधरी भी लापता हो गई। वे फिनलैंड के 70 डॉक्टरों की टीम के साथ शिवरात्रि पर नेपाल घूमने के लिए आई थी। 13 दिन के टूर के बाद उन्हें 26 अगस्त को लौटना था, लेकिन इससे ही वे बाढ़ की चपेट में आ गई। उनके पिता रमेश ओला भिवानी जिला परिषद के चेयरमैन रह चुके हैं। दैनिक भास्कर टीम से बातचीत में उन्होंने बताया कि 25 अगस्त की रात दस बजे के करीब बेटी से परिवार की वीडियो कॉल पर बात हुई थी। उसने बताया था- वह चीन-नेपाल बॉर्डर पर एक होटल में ठहरी है। टूर शानदार रहा, 26 को इंडिया लौटने के बाद वे रक्षाबंधन पर घर आएगी। इस बातचीत के बाद फोन कट गया था। कुछ जानकारी लेने के लिए करीब एक घंटे बाद जब दोबारा कॉल की गई तो फोन आउट ऑफ रेंज आने लगा। इसके बाद नेपाल बाढ़ त्रासदी की खबरें न्यूज में आने लगी तो परिवार की चिंता बढ़ गई। बेटी को कई बार कॉल की गई, लेकिन फोन स्वीच ऑफ ही बताता रहा। परिवार ने नेपाल के अधिकारियों से बात की तो पता चला कि जिस लोकेशन पर डॉक्टर प्रियंका बताई गई है, वहां कई होटल पूरी तरह तबाह हो गए है। उसकी टीम मेंबर की भी जानकारी नहीं मिल रही है। इससे परिवार चिंता में है। बेटी का मोबाइल नंबर नेपाल के अधिकारियों के साथ शेयर किया गया है। परिवार को बेटी के सुरक्षित लौटने का इंतजार है। कौन है प्रियंका चौधरी, जो नेपाल में लापता हुई… दो साल पहले गांव आई थी प्रियंका, सबसे मिलके लौटी प्रियंका चौधरी के चचेरे भाई गांव बड़सी निवासी विनोद ओला ने बताया कि उसके ताऊ रमेश ओला के 2 बच्चे (छोटा बेटा और बड़ी बेटी) हैं। डॉ. प्रियंका रक्षाबंधन पर घर आनी थी। उनकी 26 अगस्त को उसकी वापसी टिकट भी थी। वह रक्षाबंधन पर अपने घर बिलासपुर (छत्तीसगढ़) पहुंचनी थी। अपने पैतृक गांव वह दो साल पहले आई थीं। यहां सबसे मिली। जल्दी ही दोबारा आने का वादा करके गई थी। मगर, अब उसके लापता होने पर घरवालों को किसी अनहोनी की चिंता सता रही है। वे लगातार ताऊ और नेपाल के अधिकारियों के संपर्क में है और पल-पल की अपडेट ले रहे है। उनकी भगवान से यही कामना है कि बहन प्रियंका सुरक्षित हो और जल्दी घर लौट आए। नेपाल में पहाड़ से उतर रही नदी ने तबाही मचाई- 3 तस्वीरें जान बचाने की जद्दोजहद- 2 तस्वीरें नेपाल में ऐसे आई बाढ़, जिसकी चपेट में आकर सब तबाह हुआ… 1. 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटा: 26 अगस्त की सुबह करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर करीब 2000 फीट का ग्लेशियर टूटा और 4 हजार फीट नीचे गिर गया। 2: नदी में पानी जमा हुआ: सुबह करीब 8:37 बजे पिघला ग्लेशियर अपने साथ चट्टानों और मलबे को लेकर ल्हेंदे नदी से टकराया। इससे ल्हेंदे नदी पर एक अस्थायी बांध बन गया और पीछे पानी जमा होने लगा। 3. नदी का बांध टूटने से सैलाब बह चला: सुबह करीब 9 बजे बढ़ते पानी के दबाव से नदी का बांध टूटा, तो एक विशाल सैलाब बनकर निचले इलाकों की तरफ बह चला। आगे भोटे कोशी और त्रिशुली नदी में मलबे वाली बाढ़ आ गई। 4. सुवा से चितवन तक भयावह असर हुआ : नेपाल के रसुवा से नुवाकोट, धादिंग होते हुए चितवन तक भयावह बाढ़ का असर हुआ। रसुवा में करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुईं। बाढ़ धादिंग जिले के गल्छी तक पहुंची और आगे मुग्लिन की ओर बढ़ने की चेतावनी दी गई। 5. अब तक 359 शव बरामद किए जा चुके: इस भीषण बाढ़ के बाद अब तक 359 शव बरामद किए जा चुके हैं। गुरुवार शाम 5 बजे तक चितवन जिले में सबसे ज्यादा 132 शव मिले हैं। करीब 1,500 लोगों की तलाश जारी है। इनमें 288 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। वहीं, 21 भारतीयों को सुरक्षित बचाया गया है, जिनमें से 11 की पहचान हो चुकी है।
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