Explainer: TRP रेटिंग बंद होने के बाद टीवी इंडस्ट्री में क्या बदला? अब कैसे तय हो रहे हिट-फ्लॉप शोज
TV TRP Rating Update: टीवी पर आने वाले किसी भी शो की सफलता के बारे में टेलीविजन रेटिंग पॉइंट से पता चलता है. हर हफ्ते BARC India की रेटिंग्स देखकर शो के मेकर्स ये जान पाते हैं कि कौन सा सीरियल दर्शकों का पसंद आ रहा है और कौन सा नहीं. लेकिन पिछले कुछ समय से टीआरपी रेटिंग्स जारी नहीं की जा रही है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि जब टीआरपी ही नहीं आ रही, तो चैनल कैसे तय कर रहे हैं कि उनका शो हिट है या फ्लॉप? साथ ही एड देने वाली कंपनियां कैसे जान रही हैं कि किस शो पर पैसा लगाना फायदेमंद होगा? तो चलिए जानते हैं इससे जुड़े हर एक बात-
आखिरी बार कब आई थी टीआरपी?
BARC ने 2026 में जून तक हिंदी एंटरटेनमेंट चैनलों (GEC) की टीआरपी रेटिंग जारी की थी. 26 जून को विक 24 की रोपोर्ट आखिरी बड़ी रेटिंग रिपोर्ट मानी जा रही है. उस समय ‘गंगा माई की बेटियां’ 1.9 रेटिंग के साथ पहले नंबर पर था. ‘वसुधा’ 1.8 रेटिंग के साथ दूसरे और ‘तुम से तुम तक’ तीसरे स्थान पर था. इसके अलावा ‘नागिन 7’, ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ और ‘अनुपमा’ जैसे फेमस शो टॉप रेटिंग्स की दौड़ में शामिल थे. लेकिन जुलाई की शुरुआत में हालात बदल गए और रेटिंग्स आना बंद हो गईं.
टीआरपी बंद होने की वजह
BARC के इस फैसले के पीछे टीवी ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम में बदलाव को बड़ी वजह माना जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, काउंसिल अपने डेटा कलेक्शन और रेटिंग सिस्टम को ज्यादा सटीक बनाने पर काम कर रही है. इसी के चलते फिलहाल GEC की वीकली TRP जारी करने पर रोक लगाई गई है. हालांकि, BARC ने अभी तक ये साफ नहीं किया है कि ये व्यवस्था कब तक लागू रहेगी और नई रेटिंग किस तारीख से शुरू होगी. फिलहाल इसे अस्थायी फैसला बताया गया है और अगली सूचना मिलने तक लागू रहेगा.
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टीवी इंडस्ट्री पर पड़ा ये बड़ा असर
TRP रेटिंग्स बंद होने का सबसे बड़ा असर टीवी इंडस्ट्री और विज्ञापन बाजार पर पड़ा है. पहले चैनलों, प्रोड्यूसर्स और विज्ञापन कंपनियों को हर हफ्ते साफ पता चल जाता था कि कौन सा शो अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और कौन पीछे चल रहा है. लेकिन अब आधिकारिक रेटिंग्स नहीं आने से किसी शो की पॉपुलैरिची को मापना मुश्किल हो गया है. विज्ञापन कंपनियों को भी फैसला करने में दिक्कत हो रही है कि किस शो पर पैसा लगाना ज्यादा फायदेमंद होगा. वहीं नए शोज और नए चैनलों के लिए अपनी सफलता साबित करना पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है.
अब कैसे काम कर रहा टीवी एड बाजार?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, TRP रेटिंग रुकने का असर करीब 40,000 करोड़ रुपये के टीवी विज्ञापन बाजार पर पड़ा है. ऐसे में अब कंपनियां पुराने टीआरपी डेटा, चैनलों की पहुंच और पहले से मौजूद आंकड़ों के आधार पर फैसले ले रही हैं. खासतौर पर इसका फायदा पुराने और बड़े चैनलों को मिल रहा है, क्योंकि उनके पास पहले से अच्छे TRP रिकॉर्ड मौजूद हैं. वहीं नए शो और नए चैनलों के लिए मुश्किल बढ़ गई है, क्योंकि उनके पास ये साबित करने का कोई बड़ा और आधिकारिक पैमाना नहीं है कि दर्शक उन्हें कितना पसंद कर रहे हैं.
कैसे तय हो रहा शो हिट या फ्लॉप
बता दें, भले ही टीआरपी रेटिंग्स बंद हो और चैनलों को अपने शोज के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल रही. लेकिन इसके बावजूद भी चैनल और प्रोडक्शन हाउस के पास कई तरीके हैं, जिससे वो पता लगा पा रहे हैं कि दर्शक इनके शो को कितना पसंद कर रहे हैं. चैनलों और प्रोडक्शन हाउस ये चेक करते हैं कि उनका शो कितने लोगों ने देखा, कितनी देर देखा, किस एपिसोड में दर्शकों की संख्या बढ़ी या घटी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शो का प्रदर्शन कैसा है और सोशल मीडिया पर दर्शकों के रिव्यू क्या है और इस हिसाब से फिलहाल ये काम चल रहा है.
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आखिरी TRP में टॉप पर कौन से शोज
TRP बंद होने से ठीक पहले हिंदी टीवी के कई पॉपुलर शो मुकाबले में थे. वीक 24 की रिपोर्ट के मुताबकि, 'गंगा माई की बेटियां' (Ganga Mai Ki Betiyaan) सबसे आगे था . दूसरे नंबर पर 'वसुधा' (Vasudha), तीसरे नंबर पर 'तुम से तुम तक' (Tum Se Tum Tak) , चौथे नंबर पर 'नागिन 7' और पांचवें पर 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' (Kyuki Saas Bhi Kabhi Bahu Thi 2) था. वहीं 'अनुपमा' (Anupamaa) टॉप 5 से बाहर था. वहीं, इस साल की शुरुआत की बात करे तो‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ टॉप पर था और ‘अनुपमा’ और ‘नागिन 7’ दूसरे और तीसरे नंबर पर रहते थे. ऐसे में ये साफ है कि टीआरपी पर कड़ी टक्कर देखने को मिलती थी.
TRP दोबारा कब आएगी?
फिलहाल, दर्शकों के मन में जो सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब टीआरपी कब आएगी. तो बता दें कि 31 जुलाई को सामने आई जानकारी के मुताबिक, I&B Ministry की एक विंग ने BARC को प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन देने की सिफारिश की थी. अगर ये मंजूर हो जाती तो बार्क को कुछ शर्तों के साथ टीआरपी जारी करने की परमिशन मिल सकती है. वहीं, मिली जानकारी के मुताबकि, इस प्रोविजनल व्यवस्था की समीक्षा अगले साल जनवरी 2027 में किए जाने की बात सामने आई है. वहीं, बार्क ने मंत्रालय को 24 जुलाई को बताया था कि उसका मेनेजमेंट पैनल बढ़कर 70,876 घरों तक पहुंच गया है और दिसंबर 2026 तक इसे नई नीति में निर्धारित 80,000-meter threshold तक पहुंचाने की उम्मीद है.
वहीं, 20 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार जल्द वापसी के लिए समाधान तलाश रही थी, लेकिन उस समय अंतिम फैसला नहीं हुआ था. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और इंडस्ट्री चर्चाओं में 27 अगस्त के आसपास TRP लौटने की संभावना भी बताई गई है, लेकिन इसे अभी पक्की तारीख नहीं माना जा रहा है. ऐसे में फिलहाल ये साफ नहीं कहा जा सकता है की टीआरपी कब वापस देखने को मिलेगी.
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