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Kanker में Former Maoists ने बनाईं 1000 से ज्यादा राखियां, पुनर्वास केंद्र में सीखा हुनर

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में आत्मसमर्णण करने वाले माओवादियों की उंगलियां अब बंदूक के ट्रिगर पर नहीं बल्कि रेशम की डोर और मोतियों पर हैं जिससे वह सुंदर राखियां तैयार कर रहे हैं। कांकेर जिले के चौगेल (मुल्ला) गांव में एक सुरक्षा शिविर के भीतर बने पुनर्वास केंद्र में, पूर्व नक्सलियों ने त्योहार से पहले एक हजार से अधिक राखियां तैयार कर ली हैं, जो शुक्रवार को भाइयों की कलाइयों पर सजेंगी। कांकेर जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित यह केंद्र एक ऐसी जगह बन गया है जहां पूर्व माओवादी सदस्य ऐसे हुनर सीख रहे हैं जो हिंसा का रास्ता छोड़ने के बाद उन्हें रोजी-रोटी कमाने में मदद कर सकते हैं।

अधिकारियों ने बताया कि पुनर्वास केंद्र में रह रहे पुरुषों और महिलाओं ने मिलकर यह राखियां बनाई हैं और इन्हें बाजार में बेचा भी गया है, जिससे प्रशिक्षण लेने वालों को अपने काम से कमाई करने का मौका मिला है। कांकेर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश श्रीश्रीमाल ने कहा, ‘‘पुनर्वास केंद्र में रहने वाले पूर्व माओवादियों के लिए कई गतिविधियां चलाई जा रही हैं। इस साल होली के दौरान, उन्होंने गुलाल और रंग तैयार किए थे, और अब रक्षाबंधन के लिए उन्होंने एक हजार से अधिक राखियां बनाई हैं।’’ उन्होंने कहा कि इसका मकसद आत्मसमर्पण करने वालों को रचनात्मक और कमाई वाली गतिविधियों से जोड़ना और उन्हें मुख्यधारा के समाज का हिस्सा बनकर सम्मान के साथ अपनी जिंदगी फिर से शुरू करने में मदद करना है।

अधिकारी ने कहा कि पुनर्वास केंद्र में शुक्रवार को यह त्योहार मनाया जाएगा। पुनर्वास केंद्र में रहने वाले कुछ लोगों के लिए, यह गतिविधि सिर्फ राखी बनाने और बेचने से कहीं अधिक है। यह उनके लिए ऐसे त्योहार को मनाने का पहला अनुभव है जिसके बारे में उन्होंने जंगलों में बिताए सालों के दौरान सिर्फ सुना था।

पूर्व माओवादी सुनीता कोवाची ने कहा कि उन्होंने बिना कोई त्योहार मनाए जंगलों में कई साल बिताए थे। सुनीता ने कहा, ‘‘इतने सालों तक हम जंगलों में रहे। हमने कभी कोई त्योहार नहीं मनाया और न ही राखियां बनाईं।

इस बार, केंद्र में सभी ने मिलकर राखियां बनाईं। हम सुरक्षाकर्मियों और अपने साथियों को राखी बांधकर त्योहार मनाना चाहते हैं।’’ सुनीता ने कहा कि राखी बनाना उनके लिए एक नया अनुभव था। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अपनी जिंदगी में पहली बार राखी बनाई।

हम सबने मिलकर काम किया और सिर्फ दो दिनों में एक हजार से अधिक राखियां तैयार कीं। ऐसा लग रहा है जैसे हमें नयी जिंदगी मिली हो।’’ संकाई उसेंडी ने बताया कि स्वयं-सहायता समूहों के सदस्यों ने उन्हें सिर्फ एक नमूना राखी दिखायी थी, जिसके बाद प्रशिक्षण लेने वालों ने मिलकर राखी बनाना सीखा। वहीं, देवकी पुरामे ने कहा कि उन्होंने पहले सिर्फ रक्षाबंधन के बारे में सुना था।

देवकी ने कहा, ‘‘पहले हमने बस सुना था कि रक्षाबंधन नाम का कोई त्योहार होता है। इस बार, जब स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने हमें राखी बनाना सिखाया और हमने खुद राखियां बनाईं, तो हमें बहुत खुशी हुई।’’ अधिकारियों ने बताया कि समर्पण करने वाले नक्सलियों को वाहन चलाने, सिलाई, लकड़ी का काम और इलेक्ट्रीशियन जैसे कामों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। साथ ही केंद्र में शिक्षा भी दी जाती है।

अधिकारियों ने बताया पूर्व नक्सलियों के लिए राखी मनाना शायद सिर्फ एक और त्योहार मनाने से कहीं ज्यादा होगा। यह उन्हें इस बात की याद दिलाएगा कि जिन हाथों का इस्तेमाल कभी हिंसा के लिए किया जाता था, वे हाथ अब कुछ बना भी सकते हैं, कमा भी सकते हैं और फिर से जिंदगी भी संवार सकते हैं। चौगेल पुनर्वास केंद्र पिछले साल नवंबर में शुरू किया गया था, जिसमें आत्मसमर्पण करने वाले 66 माओवादियों और माओवादी हिंसा के पीड़ितों को प्रशिक्षु के रूप में शामिल किया गया था।

उन्होंने बताया कि अभी इस केंद्र में 28 पूर्व माओवादी प्रशिक्षण ले रहे हैं। इस साल 31 मार्च को राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ को हथियारबंद माओवादियों से मुक्त घोषित किया था।

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Shatrughan Sinha ने बागी MPs को घेरा, Lok Sabha स्पीकर के नोटिस का किया समर्थन: 'जवाब देना होगा'

तृणमूल कांग्रेस के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने लोकसभा स्पीकर द्वारा 'नेशनल सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया' (NCPI) में शामिल होने वाले बागी सांसदों को नोटिस जारी करने का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सांसदों को इस फ़ैसले के पीछे की वजह साफ़ करनी चाहिए। गुरुवार को बोलते हुए सिन्हा ने इस कदम को बहुत अहम और लंबे समय से प्रतीक्षित कदम बताया और कहा कि मुझे यह सही दिशा में उठाया गया कदम लगता है। बागी गुट के हमारे साथियों को जवाब देना होगा। माननीय स्पीकर ने उनसे उनकी प्रतिबद्धता और देश में शायद ही जानी-पहचानी किसी पार्टी में शामिल होने के उनके कदम के बारे में सवाल पूछे हैं।
 

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बुधवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने NCPI से जुड़े 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब मांगा। यह कदम TMC सांसद अभिषेक बनर्जी की सुप्रीम कोर्ट में दायर उस याचिका के बाद उठाया गया, जिसमें इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी। इससे पहले मंगलवार को, सुप्रीम कोर्ट ने बनर्जी की याचिका पर इन 20 बागी सांसदों से जवाब मांगा था। बनर्जी ने अपनी याचिका में पार्टी की ओर से दायर अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में हो रही देरी को चुनौती दी थी। 

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने सांसदों को नोटिस जारी किया। इस याचिका में कोर्ट से लोकसभा स्पीकर को अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने का निर्देश देने का आग्रह किया गया था। TMC का आरोप है कि इन सांसदों ने पार्टी छोड़कर NCPI का दामन थामा है। बनर्जी का कहना है कि उनके इस कदम के कारण संविधान के दलबदल विरोधी प्रावधानों के तहत उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।
 

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याचिका में लोकसभा अध्यक्ष और सदन महासचिव को प्रमुख प्रतिवादी के रूप में सूचीबद्ध किया गया है और इसमें वे 20 सांसद भी शामिल हैं जिनकी अयोग्यता की मांग की गई है। सांसद हैं काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, सताबदी रॉय, प्रसून बनर्जी, रचना बनर्जी, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, पार्थ भौमिक, अरूप चक्रवर्ती, अधिकारी दीपक देव, सयानी घोष, बापी हलदर, एमडी अबू ताहेर खान, कालीपदा सारेन खेरवाल, असित कुमार मल, जून मालिया, मिताली बाग, खलीलुर रहमान, माला रॉय, शर्मिला सरकार और यूसुफ पठान।
 
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  Sports

'टेस्ट क्रिकेट को आज भी मदर ऑफ क्रिकेट कहते हैं...' सुन लो वैभव सूर्यवंशी, श्रीनाथ अंकल क्या कह रहे

Javagal Srinath Vaibhav Sooryavanshi test cricket: जवागल श्रीनाथ ने टेस्ट क्रिकेट को 'मदर ऑफ क्रिकेट' बताते हुए कहा है कि खेल को बेचा नहीं, सिखाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि आईपीएल और टी-20 का ग्लैमर युवाओं को आकर्षित कर रहा है, लेकिन 10-15 साल का लंबा करियर बनाने के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलना बेहद जरूरी है. इस बयान को कम उम्र में आईपीएल और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में धूम मचाने वाले युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी के लिए एक बड़ी सीख माना जा रहा है. Thu, 27 Aug 2026 21:47:11 +0530

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