भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसी के नोटिस के बाद Malaysia के पूर्व PM इस्माइल साबरी याकूब पर आपराधिक मामला दर्ज
मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री इस्माइल साबरी याकूब पर बृहस्पतिवार को अपनी संपत्तियों की घोषणा नहीं करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया। वह पद छोड़ने के बाद आपराधिक आरोपों का सामना करने वाले मलेशिया के तीसरे प्रधानमंत्री हैं। इस्माइल (66) ने खुद को निर्दोष बताया।
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आरोप है कि जनवरी 2025 में भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसी की ओर से नोटिस दिए जाने के बाद उन्होंने अपनी संपत्तियों का पूरा ब्योरा घोषित नहीं किया। आरोपपत्र में मलेशियाई और विदेशी मुद्राओं में बड़ी मात्रा में नकदी के साथ-साथ सोने और चांदी का भी उल्लेख किया गया है। दोषी पाए जाने पर इस्माइल को अधिकतम पांच साल की जेल और 24,810 अमेरिकी डॉलर तक का जुर्माना हो सकता है।
देश के नौवें प्रधानमंत्री इस्माइल साबरी याकूब मलेशिया के सबसे कम समय तक पद पर रहने वाले प्रधानमंत्री रहे। उन्होंने अगस्त 2021 से नवंबर 2022 तक केवल 15 महीने प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। भ्रष्टाचार-रोधी अधिकारियों ने इस्माइल से उनके कार्यकाल के दौरान सरकार के प्रचार-प्रसार पर खर्च किए गए लाखों डॉलर से जुड़े संभावित अनियमितताओं को लेकर कई बार पूछताछ की है।
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भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसी ने उनसे जुड़े परिसरों से सोने की छड़ें और करीब चार करोड़ डॉलर की नकदी भी जब्त की है। मलेशिया के आठवें प्रधानमंत्री मुहिउद्दीन यासीन पर वर्तमान में भ्रष्टाचार और धनशोधन के आरोपों में मुकदमा चल रहा है।
Nepal Floods में 165 लोगों की मौत, 300 से अधिक भारतीय पर्यटक लापता
शिरीष बी प्रधान काठमांडू, 27 अगस्त नेपाल में बुधवार को अचानक आई भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 165 हो गई है और 300 से अधिक भारतीय पर्यटकों समेत बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के तीन जिलों में भारी तबाही मचाई है।
नेपाल पुलिस ने बृहस्पतिवार को बताया कि भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या 165 हो गई है। बुधवार को तीन जिलों में तबाही मचाने वाली बाढ़ के बाद नवलपरासी पश्चिम से तीन और शव बरामद किए गए हैं। मृतकों में रसुवा के दो, नुवाकोट के 12, धादिंग के 27, चितवन के 64, गोरखा के 20, तनहू के नौ, नवलपरासी पूर्व के 26 और नवलपरासी पश्चिम के पांच लोग शामिल हैं।
हिमस्खलन के कारण भोटेकोशी की सहायक नदी ल्हेंदे के बहाव में रुकावट पैदा होने के बाद यह बाढ़ आई। यह सबसे पहले चीन की सीमा के पास रसुवागढ़ी स्थित तिमुरे इलाके में पहुंची। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि अचानक आई बाढ़ में लापता हजारों लोगों में करीब 300 भारतीय पर्यटक शामिल हैं।
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खनाल ने यह भी पुष्टि की कि इस त्रासदी में 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग अब भी लापता हैं। खनाल ने कहा, ‘‘हजारों परिवारों ने अपने घर खो दिए हैं, बड़ी संख्या में लोग लापता हैं...।’’ इस बीच, प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बृहस्पतिवार को नुवाकोट जिले की बिदुर नगरपालिका का दौरा कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, बुनियादी ढांचा विकास मंत्री सुनील लामछाने भी उनके साथ थे।
टीम सड़क मार्ग से काठमांडू से बिदुर के लिए रवाना हुई, जो बाढ़ से सबसे बुरी तरह प्रभावित इलाकों में से एक है। बुधवार को रसुवा में भोटेकोशी नदी का पानी बढ़ने से नदी किनारे बसे इलाकों में भारी नुकसान हुआ था और उसके बाद से शाह बचाव एवं राहत कार्यों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के आंकड़ों के अनुसार, अचानक आई बाढ़ में करीब 826 लोग लापता हैं।
अधिकारियों ने बताया कि नेपाल सेना के कम से कम 44 जवान, नेपाल पुलिस के 28 कर्मी और सशस्त्र पुलिस बल के 13 कर्मियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसी तरह विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं और सीमा शुल्क कार्यालयों में काम करने वाले करीब 162 लोग भी लापता हैं। अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ के बाद 579 पर्यटकों, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, का पता नहीं चल पाया है।
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इनमें से ज्यादातर तिब्बत में कैलाश मानसरोवर और नेपाल के बागमती प्रांत में गोसाईंकुंड जाने के रास्ते में थे। बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक 73 लोग घायल हुए हैं। इनमें रसुवा के 43, नुवाकोट के 27 और धादिंग के तीन लोग शामिल हैं।
उनका काठमांडू स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल समेत विभिन्न अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है। बाढ़ में मुख्य रूप से मध्य नेपाल में मोटर वाहन गुजरने योग्य 35 पुल, 45 झूला पुल और 40 किलोमीटर पक्की सड़क क्षतिग्रस्त हुई है। एनडीआरआरएमए के अनुसार, रसुवा के तिमुरे इलाके में फंसे 123 लोगों को बचाया गया, जिनमें 94 नेपाली और 29 विदेशी नागरिक हैं।
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समाचार पोर्टल माई रिपब्लिका के अनुसार, आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने कहा कि प्रारंभिक आकलन है कि हिमस्खलन से नेपाल-चीन सीमा के पास नदी का बहाव रुक गया, जिसके कारण यह बाढ़ आई। आकलन के अनुसार त्रिशुली नदी में आई बाढ़ का कारण ऊपरी धारा में हिमस्खलन का सैलाब आने से ल्हेंदे नदी का मार्ग अवरुद्ध होना था। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने बताया कि रसुवागढ़ी से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में नेपाल-चीन सीमा पर बर्फ और चट्टानों के खिसकने के बाद ल्हेंदे नदी में मलबे के साथ तेज बाढ़ आई।
‘माई रिपब्लिका’ की बृहस्पतिवार की खबर के अनुसार, आपदा विशेषज्ञ बसंत राज अधिकारी का भी कहना है कि रसुवागढ़ी से करीब 20 किलोमीटर ऊपर हिमस्खलन की वजह से ल्हेंदे नदी का बहाव रुक गया और बाढ़ आ गई। कुछ स्थानों पर कीचड़ और चट्टानों के जमा होने से सड़कें बंद हो गई हैं, जबकि अन्य जगहों पर बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए यातायात रोक दिया गया है। काठमांडू के नागढुंगा से मुगलिंग तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा अनिश्चितकाल के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
यह काठमांडू को देश के अन्य जिलों से जोड़ने वाला प्रमुख राजमार्ग है। इसी तरह इलाम जिले के मेची राजमार्ग, कावरे के बीपी राजमार्ग, मकवानपुर के कांती लोकपथ, रसुवा और नुवाकोट के राष्ट्रीय राजमार्ग, धादिंग के पृथ्वी राजमार्ग तथा चितवन और रुकुम वेस्ट में जाजरकोट-डोल्पा सड़क खंड को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी यातायात रोक दिया गया है।
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