बैल से ₹31 लाख की कार खिंचवाकर शोरूम पहुंचा मालिक:बोला- 5 महीने से RC नहीं बनी, पंजाब में स्टाफ चारा ढोने के लिए बोल रहा था
मोगा में शनिवार को 31 लाख रुपए से ज्यादा कीमत की नई इनोवा कार सड़क पर बैल से खिंचती नजर आई। कार मालिक दविंदरपाल सिंह ने अपनी गाड़ी पर चारा लादा और बैल के सहारे उसे आईजीएम टोयोटा शोरूम के सामने से जीटी रोड होते हुए शहर तक ले गए। दविंदरपाल का कहना है कि 5 महीने पहले गाड़ी खरीदने के बावजूद अब तक RC नहीं बनी है। कई बार कंपनी और एजेंसी से संपर्क करने के बाद भी समाधान नहीं हुआ तो उन्होंने इसी तरह विरोध जताया। उन्होंने बताया कि शिकायत करने के बाद कार एजेंसी ने 50 हजार रुपए ये कहकर और ले लिए कि कार कीमत बढ़ गई है और रजिस्ट्रेशन चार्ज अब ज्यादा लगेगा। इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ तो उन्होंने कंपनी को फोन किया तो वहां से जवाब मिला कि जल्दी है तो तब तक इस पर चारा ढोना शुरू कर दो। 5 महीने पहले ₹31.30 लाख में बुक कराई थी इनोवा दविंदरपाल सिंह के मुताबिक, उन्होंने करीब पांच महीने पहले ₹31 लाख 30 हजार में इनोवा हाइक्रोस जेड एक्स बुक कराई थी। गाड़ी मिलने के 5 महीने बाद भी उसकी आरसी नहीं मिली। उन्होंने इसके लिए एजेंसी के कई चक्कर काटे। 54 हजार रुपए और जमा करवाए, फिर भी रजिस्ट्रेशन नहीं बाद में एजेंसी ने गाड़ी की कीमत बढ़ने की बात कहकर उनसे करीब ₹54 हजार और जमा कराए। इसके बावजूद गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका। दविंदरपाल का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कंपनी और एजेंसी के अधिकारियों से कई बार संपर्क किया। RTO में बिल और रिकॉर्ड की राशि अलग निकली दविंदरपाल के अनुसार, RC बनवाने के लिए चंडीगढ़ RTO कार्यालय से संपर्क किया तो वहां बिलिंग राशि और RTO रिकॉर्ड में दर्ज राशि में अंतर बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि बिल में सुधार होने के बाद ही गाड़ी का रजिस्ट्रेशन संभव होगा। ग्राहक का आरोप है कि मोगा में बिलिंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण बिल लुधियाना से बनाया जाता है और इसी वजह से समस्या बढ़ी। कर्मचारी बोला- ‘चारा ही ढो लो’, नाराज होकर चारा लादा दविंदरपाल का आरोप है कि जब एजेंसी से बात की गई तो वो तालमटोल ही करते रहे। कई दिनों से बस शोरूम के चक्कर कटवाते रहे। यही नहीं, एक कर्मचारी ने उनसे यहां तक कह दिया कि अब गाड़ी पर ‘चारा ही ढो लो’। इसी बात से नाराज होकर उन्होंने शनिवार को अपनी नई इनोवा पर चारा लादा और बैल से खिंचवाते हुए शोरूम के सामने प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि पांच महीने बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ, इसलिए उन्होंने इसी तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। अब देखिए कार के डोक्यूमेंट्स एजेंसी-कंपनी का पक्ष अभी सामने नहीं आया मामले में कार मालिक ने आरोप लगाया है कि कंपनी और एजेंसी के अधिकारी उनकी समस्या का समाधान नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि एजेंसी में उनकी बात ही नहीं सुनी जा रही है। इसलिए, वह कंपनी वालों से गाड़ी वापस लेकर अपने पैसे लौटाने की डिमांड कर रहे हैं। वहीं, एजेंसी या टोयोटा कंपनी की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। --------------------------- यह खबर भी पढ़ें… गर्लफ्रेंड से मिलने 1000KM दूर लुधियाना आया बॉयफ्रेंड, शादी का बोलकर भगा ले गया, परिवार बोला-बेटी का रेप किया लुधियाना में रह रही 15 साल की नाबालिग गर्लफ्रेंड से मिलने उसका बॉयफ्रेंड करीब 1000 किलोमीटर दूर से पहुंच गया। यहां उसने पहले नाबालिग को घर से बाहर बुलाया और फिर शादी का झांसा देकर अपने साथ ले गया। पूरी खबर पढ़ें…
विदेशी-निवेशकों की भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे महीने खरीदारी:अगस्त में FPIs ने ₹23,544 करोड़ का निवेश किया; जानिए इसके 3 बड़े कारण
विदेश से आने वाले फंड्स में सुधार और घरेलू आर्थिक संकेतों की मजबूती के बीच फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) का भारतीय इक्विटी मार्केट पर भरोसा मजबूत हो रहा है। अगस्त 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में ₹23,544 करोड़ का नेट इनफ्लो यानी निवेश किया है। लगातार दूसरे महीने जारी है खरीदारी मार्केट डेटा के अनुसार, जुलाई 2026 में ₹20,200 करोड़ के निवेश के बाद अगस्त लगातार दूसरा महीना है, जब विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में खरीदारी बढ़ाई है। इससे पहले मार्च से जून 2026 तक लगातार 4 महीनों में FPIs ने भारतीय बाजारों से भारी निकासी की थी। निवेश लौटने के 3 बड़े कारण बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अगस्त में विदेशी पूंजी के भारतीय बाजार में आने के पीछे तीन मुख्य फैक्टर काम कर रहे हैं… ऑटो, हेल्थकेयर और कंज्यूमर सेक्टर्स पहली पसंद FPIs की हालिया खरीदारी का बड़ा हिस्सा केवल IPOs के बजाय सेकेंडरी मार्केट (लिस्टेड शेयर बाजार) की ओर जा रहा है। सेक्टोरल रुझान की बात करें तो विदेशी निवेशक ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और हेल्थकेयर जैसे बुनियादी मजबूत सेक्टर्स में अलॉटमेंट तेजी से बढ़ा रहे हैं। जुलाई और अगस्त में पॉजिटिव ट्रेंड के बावजूद, वर्ष 2026 में अब तक विदेशी निवेशक कुल मिलाकर नेट सेलर बने हुए हैं। चालू वर्ष में FPIs अब तक भारतीय इक्विटी से लगभग ₹2.3 लाख करोड़ से अधिक निकाल चुके हैं। हालांकि, अमेरिका में ब्याज दर घटने की उम्मीद और कच्चे तेल की घटती कीमतों से आगे विदेशी फंड्स का इनफ्लो बने रहने की संभावना है। क्या होता है फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPI)? जब विदेशी संस्थागत या व्यक्तिगत निवेशक किसी देश के शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या डेट मार्केट में फाइनेंशियल रिटर्न के लिए पैसा लगाते हैं, तो उसे FPI कहते हैं। FPI निवेशकों के पास संबंधित कंपनियों का प्रत्यक्ष मैनेजमेंट या ऑपरेशनल कंट्रोल नहीं होता। ये खबर भी पढ़ें… टॉप-10 में 4 कंपनियों का मार्केट-कैप ₹87,960 करोड़ घटा: एयरटेल टॉप लूजर, वैल्यू ₹28,052 करोड़ घटी; LIC की वैल्यू बढ़ी बीते हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में गिरावट रही। इस बीच देश की 10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 4 का मार्केट कैप कुल मिलाकर ₹87,960 करोड़ घटा है। इस दौरान टेलीकॉम सेक्टर की प्रमुख कंपनी भारती एयरटेल की मार्केट वैल्यूएशन में सबसे बड़ी ₹28,052.96 करोड़ की गिरावट देखने को मिली। इसकी वैल्यूएशन घटकर ₹12.15 लाख करोड़ रह गई है। पूरी खबर पढ़ें…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 







