विदेशी-निवेशकों की भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे महीने खरीदारी:अगस्त में FPIs ने ₹23,544 करोड़ का निवेश किया; जानिए इसके 3 बड़े कारण
विदेश से आने वाले फंड्स में सुधार और घरेलू आर्थिक संकेतों की मजबूती के बीच फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) का भारतीय इक्विटी मार्केट पर भरोसा मजबूत हो रहा है। अगस्त 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में ₹23,544 करोड़ का नेट इनफ्लो यानी निवेश किया है। लगातार दूसरे महीने जारी है खरीदारी मार्केट डेटा के अनुसार, जुलाई 2026 में ₹20,200 करोड़ के निवेश के बाद अगस्त लगातार दूसरा महीना है, जब विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में खरीदारी बढ़ाई है। इससे पहले मार्च से जून 2026 तक लगातार 4 महीनों में FPIs ने भारतीय बाजारों से भारी निकासी की थी। निवेश लौटने के 3 बड़े कारण बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अगस्त में विदेशी पूंजी के भारतीय बाजार में आने के पीछे तीन मुख्य फैक्टर काम कर रहे हैं… ऑटो, हेल्थकेयर और कंज्यूमर सेक्टर्स पहली पसंद FPIs की हालिया खरीदारी का बड़ा हिस्सा केवल IPOs के बजाय सेकेंडरी मार्केट (लिस्टेड शेयर बाजार) की ओर जा रहा है। सेक्टोरल रुझान की बात करें तो विदेशी निवेशक ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और हेल्थकेयर जैसे बुनियादी मजबूत सेक्टर्स में अलॉटमेंट तेजी से बढ़ा रहे हैं। जुलाई और अगस्त में पॉजिटिव ट्रेंड के बावजूद, वर्ष 2026 में अब तक विदेशी निवेशक कुल मिलाकर नेट सेलर बने हुए हैं। चालू वर्ष में FPIs अब तक भारतीय इक्विटी से लगभग ₹2.3 लाख करोड़ से अधिक निकाल चुके हैं। हालांकि, अमेरिका में ब्याज दर घटने की उम्मीद और कच्चे तेल की घटती कीमतों से आगे विदेशी फंड्स का इनफ्लो बने रहने की संभावना है। क्या होता है फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPI)? जब विदेशी संस्थागत या व्यक्तिगत निवेशक किसी देश के शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या डेट मार्केट में फाइनेंशियल रिटर्न के लिए पैसा लगाते हैं, तो उसे FPI कहते हैं। FPI निवेशकों के पास संबंधित कंपनियों का प्रत्यक्ष मैनेजमेंट या ऑपरेशनल कंट्रोल नहीं होता। ये खबर भी पढ़ें… टॉप-10 में 4 कंपनियों का मार्केट-कैप ₹87,960 करोड़ घटा: एयरटेल टॉप लूजर, वैल्यू ₹28,052 करोड़ घटी; LIC की वैल्यू बढ़ी बीते हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में गिरावट रही। इस बीच देश की 10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 4 का मार्केट कैप कुल मिलाकर ₹87,960 करोड़ घटा है। इस दौरान टेलीकॉम सेक्टर की प्रमुख कंपनी भारती एयरटेल की मार्केट वैल्यूएशन में सबसे बड़ी ₹28,052.96 करोड़ की गिरावट देखने को मिली। इसकी वैल्यूएशन घटकर ₹12.15 लाख करोड़ रह गई है। पूरी खबर पढ़ें…
टॉप-10 में 4 कंपनियों का मार्केट-कैप ₹87,960 करोड़ घटा:एयरटेल टॉप लूजर, वैल्यू ₹28,052 करोड़ घटी; LIC की वैल्यू बढ़ी
बीते हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में गिरावट रही। इस बीच देश की 10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 4 का मार्केट कैप कुल मिलाकर ₹87,960 करोड़ घटा है। इस दौरान टेलीकॉम सेक्टर की प्रमुख कंपनी भारती एयरटेल की मार्केट वैल्यूएशन में सबसे बड़ी ₹28,052.96 करोड़ की गिरावट देखने को मिली। इसकी वैल्यूएशन घटकर ₹12.15 लाख करोड़ रह गई है। एयरटेल के अलावा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केट कैप भी घटा है। वहीं 6 कंपनियों- LIC, रिलायंस इंडस्ट्रीज, लार्सन एंड टुब्रो, बजाज फाइनेंस, ICICI बैंक और HDFC बैंक की मार्केट वैल्यू बढ़ी है। पिछले सप्ताह सेंसेक्स 468.42 अंक (0.60%) और NSE निफ्टी 114 अंक (0.46%) नीचे गिरकर बंद हुआ। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें... मान लीजिए... कंपनी 'A' के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं... मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।
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