Responsive Scrollable Menu

Hillary Clinton बोलीं, West Asia विवाद को कूटनीति से सुलझा सकते हैं भारत और चीन

अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ‘‘आक्रामक बयानबाजी के बजाय कूटनीति’’ का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो भारत और चीन पश्चिम एशिया संघर्ष को सुलझाने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो सकते हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर बात करते हुए क्लिंटन ने ‘सी-स्पैन’ मीडिया नेटवर्क को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘रणनीतिक स्तर पर बनी गलत धारणाएं हमें उस स्थिति तक ले आई हैं, जहां हम आज हैं।’’ अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने भी हमले किए।

इस संघर्ष के कारण महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में आवागमन बाधित हो गया। जून में अमेरिका और ईरान ने एक अंतरिम शांति समझौता किया था लेकिन पिछले महीने दोनों पक्षों की ओर से फिर से हमले शुरू होने के बाद यह समझौता टूट गया। क्लिंटन ने सोमवार को कहा, ‘‘अगर आप यह पता लगाना चाहते हैं कि ट्रंप इस स्थिति से कैसे बाहर निकल सकते हैं, तो मुझे लगता है कि इसकी कुंजी शायद चीन और भारत हैं।

क्योंकि अगर आप देखें कि ईरान से सबसे ज्यादा तेल और गैस कौन खरीदता है, तो वे चीन और भारत हैं।’’ बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान, ओमान और कतर सहित कई देश संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता का प्रयास कर रहे हैं। इस संघर्ष में सबसे बड़ा विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जहां युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया की कुल ऊर्जा आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।

क्लिंटन ने कहा कि चीन, विशेष रूप से तेहरान पर दबाव डाल सकता है, क्योंकि वह ईरान से तेल और गैस खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल है। उन्होंने कहा, ‘‘चीन इस मामले में हमसे बहुत आगे है। उन्होंने समुद्री मार्ग से पहुंचने वाले जीवाश्म ईंधन का काफी मात्रा में भंडारण किया है... वे अपने भंडार बढ़ा रहे हैं... लेकिन उन्हें ईरान की जरूरत पड़ेगी।’’ क्लिंटन ने कहा, ‘‘अगर ट्रंप वास्तव में आक्रामक बयानबाजी के बजाय कूटनीति का इस्तेमाल करने को तैयार हों, तो मुझे लगता है कि सबसे प्रभावी दबाव यहीं से बनाया जा सकता है।’’ उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट द्वारा ईरान पर प्रतिबंधों के एक नए दौर की घोषणा के बाद आई है।

बेसेंट ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले हर देश को चेतावनी दी थी कि वह इस्लामिक गणराज्य के साथ अपने वित्तीय संबंध तोड़ दे, अन्यथा उसे अमेरिका की ओर से कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। वहीं, तेहरान ने अमेरिका की ओर से नए प्रतिबंध लगाए जाने की योजना के जवाब में सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है। चीन, तुर्किये और संयुक्त अरब अमीरात ईरान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं।

जब क्लिंटन से पूछा गया कि क्या वह चीन पर द्वितीयक प्रतिबंध लगाएंगी, तो उन्होंने कहा, ‘‘मैं निश्चित रूप से चीनी नागरिकों से कहती कि अगर वे ईरानियों को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और कम से कम पहले जैसी स्थिति बहाल करने के लिए तैयार करने में हमारी मदद नहीं करते हैं, तो मैं ऐसा जरूर करूंगी।’’ द्वितीयक प्रतिबंध का मतलब है ऐसे प्रतिबंध जो सीधे किसी देश पर नहीं, बल्कि उन तीसरे देशों, कंपनियों या बैंकों पर लगाए जाते हैं जो प्रतिबंधित देश के साथ कारोबार या वित्तीय लेन-देन जारी रखते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 20 अगस्त को कहा था कि यदि तेहरान किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रहता है तो वह ईरान के खिलाफ कड़ा आर्थिक अभियान शुरू करेंगे।

Continue reading on the app

Antelope Reef पर China ने चली नई सैन्य चाल, South China Sea में सबसे बड़ा सैन्य अड्डा बना रहा है ड्रैगन!

दक्षिण चीन सागर में चीन एक बार फिर अपनी विस्तारवादी रणनीति को जमीन, समुद्र और आसमान, तीनों दिशाओं में आगे बढ़ाता दिखाई दे रहा है। हम आपको बता दें कि विवादित पैरासेल द्वीपसमूह के एंटीलोप रीफ के निकट स्थित छोटे से यागोंग द्वीप पर नई निर्माण गतिविधियों की सैटेलाइट तस्वीरों ने क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। संकेत साफ हैं कि बीजिंग केवल छोटे-छोटे ढांचे खड़े नहीं कर रहा, बल्कि दक्षिण चीन सागर के उत्तरी हिस्से में एक ऐसी सैन्य निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था तैयार कर सकता है, जो भविष्य में ताइवान संकट से लेकर अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ संभावित टकराव तक निर्णायक साबित हो।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वाणिज्यिक सैटेलाइट इमेजरी प्रदाता वैंटर द्वारा उपलब्ध कराई गई तस्वीरों में यागोंग द्वीप पर तीन दिशाओं में फैला नया निर्माण दिखाई दिया है। नवीनतम तस्वीर 17 अगस्त की बताई गई है, जबकि अन्य चित्रों से संकेत मिलता है कि निर्माण मार्च और अप्रैल के दौरान शुरू हुआ था। अभी इन ढांचों का अंतिम उद्देश्य पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन कई सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह एक प्रारंभिक चेतावनी रडार या निगरानी केंद्र की शुरुआत हो सकती है, जिसका सीधा संबंध पास के एंटीलोप रीफ पर विकसित की जा रही विशाल सैन्य क्षमता से हो सकता है।

इसे भी पढ़ें: दुश्मनों पर दनादन बरसेंगी मिसाइलें, भारत में Private Companies भी बनाएंगी Missiles, Rajnath Singh ने DRDO की Technology Transfer को दी मंजूरी

यहीं इस पूरी गतिविधि का असली रणनीतिक महत्व छिपा है। एंटीलोप रीफ पर चीन ने कृत्रिम द्वीप के निर्माण का पहला चरण पूरा कर लिया है। सैटेलाइट तस्वीरों में यह संरचना लगभग 6 किलोमीटर लंबी दिखाई देती है और इसकी सीधी तटरेखा 3 किलोमीटर से अधिक है। कई विशेषज्ञ इसे संभावित रनवे के रूप में देख रहे हैं। यदि वहां भविष्य में लड़ाकू विमान, समुद्री गश्ती विमान, ड्रोन और अन्य सैन्य संसाधन तैनात किए जाते हैं, तो यागोंग पर संभावित रडार स्टेशन उस पूरी सैन्य संरचना की आंख और कान बन सकता है।

हम आपको बता दें कि यागोंग, एंटीलोप रीफ से लगभग 14 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है और दोनों पैरासेल्स के पश्चिमी हिस्से के क्रिसेंट समूह में आते हैं। क्षेत्रफल में छोटा होने के बावजूद यागोंग का सामरिक मूल्य बहुत बड़ा हो सकता है। अलग स्थान पर स्थापित रडार या निगरानी प्रणाली दुश्मन की गतिविधियों पर पहले से नजर रखने, समुद्री और हवाई यातायात की निगरानी करने तथा एंटीलोप पर भविष्य में तैनात सैन्य बलों को शुरुआती चेतावनी देने में उपयोगी हो सकती है।

वहीं चीन ने अभी तक किसी नए सैन्य अड्डे के निर्माण को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। सरकारी मीडिया का दावा है कि एंटीलोप रीफ का विकास मौसम पूर्वानुमान, मत्स्य संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसी नागरिक जरूरतों के लिए किया जा रहा है। लेकिन दक्षिण चीन सागर में बीजिंग का पुराना रिकॉर्ड इस दावे पर सवाल खड़े करता है। नागरिक सुविधाओं के नाम पर विकसित किए गए ढांचों के बाद सैन्यीकरण की आशंका इस क्षेत्र में कोई नई बात नहीं है।

हम आपको बता दें कि पैरासेल्स पर चीन का नियंत्रण 1974 से है, जब उसने तत्कालीन दक्षिण वियतनाम की नौसेना से इन्हें छीन लिया था। वियतनाम आज भी पूरे द्वीपसमूह पर दावा करता है। दक्षिण में स्थित स्प्रैटली द्वीपसमूह और उसके आसपास के जलक्षेत्रों पर वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ताइवान और ब्रुनेई भी अलग-अलग दावे करते हैं। ऐसे में चीन की हर नई संरचना केवल निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन को बदलने की कोशिश के रूप में देखी जाती है।

इस बीच तनाव को और बढ़ाने वाला घटनाक्रम चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की दक्षिणी थिएटर कमांड का बयान है। कमांड ने शुक्रवार से मंगलवार तक दक्षिण चीन सागर में नौसैनिक और वायुसेना बलों के साथ नियमित गश्त करने की बात कही है। चीन ने फिलीपींस पर क्षेत्र के बाहर के देशों को दक्षिण चीन सागर विवाद में हस्तक्षेप के लिए बुलाने और तथाकथित संयुक्त गश्त आयोजित करने का आरोप लगाया है। बीजिंग का कहना है कि उसकी सेना चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता और समुद्री अधिकारों की रक्षा के लिए दृढ़ता से कार्रवाई करती रहेगी।

यही वह बिंदु है जहां चीन का निर्माण अभियान और उसकी सैन्य गश्त एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं। एक तरफ बीजिंग समुद्र में अपनी स्थायी उपस्थिति मजबूत करने के लिए नए ठिकाने, कृत्रिम द्वीप और संभावित रडार नेटवर्क तैयार कर रहा है, दूसरी तरफ फिलीपींस और अमेरिका सहित बाहरी शक्तियों की बढ़ती सैन्य मौजूदगी को चुनौती दे रहा है। देखा जाये तो यह केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत में प्रभाव और नियंत्रण की सीधी लड़ाई बन चुका है।

दूसरी ओर, भारत के लिए भी इसके गंभीर रणनीतिक निहितार्थ हैं। दक्षिण चीन सागर वैश्विक व्यापार का अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है और इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता समुद्री शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है। यदि बीजिंग एंटीलोप रीफ को एक बड़े सैन्य केंद्र और यागोंग को उससे जुड़े प्रारंभिक चेतावनी या निगरानी नेटवर्क में बदलने में सफल होता है, तो उसकी समुद्री निगरानी क्षमता और रणनीतिक पहुंच दोनों बढ़ेंगी। ताइवान को लेकर भविष्य में किसी संघर्ष की स्थिति में दक्षिण चीन सागर का यह सैन्य नेटवर्क अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

बहरहाल, चीन दक्षिण चीन सागर में केवल दावे नहीं कर रहा, बल्कि उन दावों को कंक्रीट, रनवे, रडार और सैन्य गश्त के जरिए स्थायी शक्ति में बदलने की कोशिश कर रहा है। यागोंग का छोटा-सा निर्माण आज मामूली दिखाई दे सकता है, लेकिन एंटीलोप रीफ के विशाल विस्तार के साथ इसे जोड़कर देखा जाए तो तस्वीर कहीं अधिक गंभीर है। दक्षिण चीन सागर में चीन की यह नई चाल आने वाले वर्षों में केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत की अगली बड़ी सामरिक टकराव रेखा बन सकती है।

Continue reading on the app

  Sports

टेस्ट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले 5 भारतीय बल्लेबाज, 13 साल से नहीं टूटा विश्व कीर्तिमान

5 batsman Most runs for India in Test: भारतीय टेस्ट क्रिकेट इतिहास में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले शीर्ष पांच बल्लेबाजों की कहानी शानदारी है . इस लिस्ट में सचिन तेंदुलकर टॉप पर हैं, जिनके बाद राहुल द्रविड़ 'द वॉल' का नाम आता है . तीसरे स्थान पर लिटिल मास्टर सुनील गावस्करऔर चौथे पर रन मशीन विराट कोहली मौजूद हैं . वहीं वीवीएस लक्ष्मण पांचवें स्थान पर हैं, जिन्होंने अपनी कलात्मक पारियों से इतिहास रचा . Wed, 26 Aug 2026 17:44:44 +0530

  Videos
See all

नेपाल में तबाही बिहार में अलर्ट...| Nepal Flood | Bihar | Uttar Pradesh | Kushinagar | CM Yogi #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-26T12:15:32+00:00

Nepal Flash Flood | नेपाल की तबाही में 100 से ज्यादा भारतीय लापता | #flood #Shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-26T12:09:33+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers