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Nepal Flood: तिब्बत सीमा पर रसुवा में बाढ़ से 4 की मौत, 13 पनबिजली प्रोजेक्ट्स क्षतिग्रस्त

तिब्बत की सीमा से लगे मध्य नेपाल के दो जिलों में बुधवार तड़के अचानक आई भीषण बाढ़ में चार लोगों की मौत हो गई। बाढ़ से नदी किनारे बसी बस्तियों में भारी तबाही हुई और कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह करीब नौ बजे तिब्बत की ओर से भोटे कोशी नदी में अचानक बाढ़ आई, जिससे तिब्बत की सीमा से लगे रसुवा और धादिंग जिले तथा काठमांडू के दक्षिण-पश्चिम में स्थित नुवाकोट जिला प्रभावित हुआ।

उन्होंने बताया कि रसुवा में बाढ़ क्षेत्र में बारिश के कारण नहीं आई, बल्कि संभवतः तिब्बत की ओर हुई भारी बारिश या हिमस्खलन के कारण आई है। हालांकि, इसका सटीक कारण अभी पता नहीं चल पाया है। प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना की मदद से अधिकारियों ने खोज एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया है।

रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन समेत कई निचले जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। नेपाल सेना ने एक बयान में बताया कि अचानक जलस्तर बढ़ने से रसुवा जिले के तिमुरे और पास के स्याफ्रुबेसी इलाके में भारी तबाही हुई तथा वाहन, सामान और अन्य संपत्ति बह गई। सबसे अधिक प्रभावित रसुवा जिला है, जो काठमांडू से करीब 125 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में तिब्बत सीमा के पास स्थित है।

बागमती प्रांत पुलिस कार्यालय के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं प्रवक्ता ने पीटीआई-को बताया कि अचानक आई बाढ़ के बाद नुवाकोट जिले की बिदुर नगरपालिका से तीन पुरुषों और एक महिला के शव बरामद किए गए। उन्होंने बताया कि बाढ़ के तुरंत बाद उनके शव त्रिशूली नदी के पास पड़े मिले। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएम) ने एक बयान में रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा में नदी किनारे रहने वाले लोगों से अगली सूचना तक हाई अलर्ट पर रहने और सुरक्षा उपाय अपनाने को कहा।

जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, बुधवार को आई बाढ़ रसुवा में हुई बारिश के कारण नहीं आई। विभाग के सूचना अधिकारी दिनकर कायस्थ के अनुसार, ऐसा प्रतीत नहीं होता कि रसुवा में हुई भारी बारिश के कारण बाढ़ आई। उन्होंने कहा कि संभवतः यह किसी नए हिमनद के बनने या पुराने ग्लेशियर के फटने के कारण आई हो।

उन्होंने कहा, ‘‘हम अभी इस मामले का अध्ययन कर रहे हैं, इसलिए वास्तविक कारण अभी पता नहीं चला है।’’ उन्होंने कहा कि तिब्बत की ओर से बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है, इसलिए ‘‘हमें सतर्क रहने की जरूरत है।’’ ‘द हिमालयन टाइम्स’ के अनुसार, अचानक जलस्तर बढ़ने के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह त्रासदी हिमनद तटबंध बाढ़ (जीएलओएफ) या किसी अन्य कारण से आई। रसुवा के सहायक मुख्य जिला अधिकारी ध्रुव प्रसाद अधिकारी ने कहा कि बाढ़ का स्तर असामान्य रूप से बहुत अधिक था और दोनों बस्तियों में काफी नुकसान हुआ है।

रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने बताया कि सीमा शुल्क परिसर में रखे कई वाहन और सामान बह गए। हाल में बनाया गया एक पुल भी नष्ट हो गया। यह स्थान तिब्बत, चीन से जुड़ा नेपाल के व्यापारिक आवागमन को नियंत्रित करता है।

इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल (आईपीपीएएन) के एक बयान के अनुसार, अचानक आई बाढ़ से नुवाकोट और रसुवा जिलों में 354 मेगावाट की कुल क्षमता वाली आठ चालू जलविद्युत परियोजनाएं और निर्माणाधीन पांच परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। बाढ़ से क्षतिग्रस्त प्रमुख चालू जलविद्युत परियोजनाओं में रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना (111 मेगावाट), संजेन खोला जलविद्युत परियोजना (78 मेगावाट) और अपर त्रिशूली-3ए (60 मेगावाट) शामिल हैं। ‘द काठमांडू पोस्ट’ ने उत्तरगया ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष चमेली गुरूंग के हवाले से बताया कि स्याफ्रुबेसी, बेत्रावती, मेलुंग, सल्लेतार, शांतिबाजार, पाइरेबेसी, खल्ती बस्ती, सोले, त्रिशूली और बट्टार समेत करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुई हैं।

स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक के बाद नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को प्रभावित इलाकों में बचाव एवं राहत कार्यों के लिए तैनात किया गया। सेना के एक बयान के अनुसार, नेपाल की सेना ने अचानक आई बाढ़ के बाद खोज एवं बचाव अभियान चलाने के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए। रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी से छह, मेलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को बचाया गया।

बयान में कहा गया कि नेपाल सेना ने त्रिशूली में सैन्य प्रशिक्षण केंद्र नंबर-1 में एक उपचार केंद्र भी स्थापित किया है, जहां सेना के चिकित्सा कर्मी प्रभावित लोगों को आपात चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। उसने बताया कि आपात चिकित्सा बचाव दल से लैस सेना के एक हेलीकॉप्टर (एमआई-17) को भी त्रिशूली के जिला अस्पताल की ओर भेजा गया है। स्थानीय मीडिया की एक खबर में नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अभि नारायण काफ्ले के हवाले से बताया गया कि तिमुरे स्थित क्षेत्र पुलिस कार्यालय, स्याफ्रुबेसी की पुलिस चौकी और रसुवागढ़ी की पुलिस चौकी भी क्षतिग्रस्त हुई हैं।

सशस्त्र पुलिस बल के प्रवक्ता नेत्र बहादुर कार्की ने बताया कि अचानक आई बाढ़ के बाद रसुवा से सशस्त्र पुलिस बल के चार जवान लापता हैं। घायलों के इलाज के लिए पांच चिकित्सकों समेत 16 स्वास्थ्यकर्मियों की एक टीम रसुवा के प्रभावित क्षेत्र में भेजी गई है। भीषण बाढ़ ने धादिंग जिले के गजुरी में एक पुल को बहा दिया है।

बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए पांच ड्रोन तैनात किए गए हैं। लापता लोगों का पता लगाने के लिए तीन स्निफर डॉग भी प्रभावित क्षेत्र में भेजे गए हैं। पिछले साल भी भोटे कोशी में बाढ़ आई थीं, जिनसे रसुवा में भारी तबाही हुई थी और कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी।

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क्या Russia परमाणु विकल्प की ओर बढ़ रहा है? CIA Director की गुप्त Moscow Visit से दुनिया भर में बढ़ी हलचल

यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर बढ़ती सैन्य तनातनी के बीच मॉस्को से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने वॉशिंगटन, कीव और यूरोपीय राजधानियों की बेचैनी बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के खुफिया तंत्र के प्रमुख सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ कथित तौर पर एक ‘आपात’ बैठक के लिए मॉस्को पहुंचे थे। दावा है कि उनका संदेश रूस के लिए बेहद सीधा था कि यूक्रेन युद्ध को ऐसे स्तर तक मत ले जाइए, जहां से वापसी संभव नहीं हो। खासतौर पर परमाणु हथियारों के इस्तेमाल या यूक्रेन के पश्चिमी सहयोगियों को सीधे निशाना बनाने जैसी किसी कार्रवाई के खिलाफ कथित तौर पर वॉशिंगटन ने क्रेमलिन को कड़ा संकेत दिया है।

ब्रिटिश अखबार डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया आकलन में आशंका जताई गई है कि युद्ध के मैदान में नए झटकों के बाद रूस तेज और नाटकीय प्रतिक्रिया दे सकता है। इसी पृष्ठभूमि में रैटक्लिफ के जरिए रूसी अधिकारियों तक पहुंचाया गया संदेश कथित तौर पर बेहद स्पष्ट था, “बस ऐसा मत कीजिए।” सवाल यह है कि क्या अमेरिका के पास ऐसी कोई ठोस खुफिया सूचना है, जिसने सीआईए प्रमुख को सीधे मॉस्को भेजने की जरूरत पैदा की?

इसे भी पढ़ें: जयशंकर और डोभाल की रूस-चीन यात्रा के कूटनीतिक संदेश को ऐसे समझिए

देखा जाये तो यह कथित यात्रा ऐसे समय में सामने आई है, जब रूस और ब्रिटेन के बीच तनाव भी लगातार बढ़ रहा है। लंदन द्वारा यूक्रेन को सैन्य समर्थन बढ़ाने से मॉस्को पहले ही नाराज है और पश्चिमी देशों की भूमिका को लेकर क्रेमलिन का रुख लगातार आक्रामक बना हुआ है। ऐसे में परमाणु विकल्प की आशंका और पश्चिमी सहयोगियों पर संभावित हमले की चर्चा ने इस युद्ध को केवल रूस-यूक्रेन संघर्ष तक सीमित नहीं रहने दिया है।

मामले का एक और दिलचस्प पहलू यूक्रेन से जुड़ा है। द कीव इंडिपेंडेंट ने स्थिति से परिचित एक सूत्र के हवाले से दावा किया है कि वॉशिंगटन ने कीव से कहा था कि रैटक्लिफ के रूस में रहने के दौरान मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग पर हमले न किए जाएं। रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन ने 24 से 26 अगस्त के बीच इन दोनों शहरों पर हमले रोकने पर सहमति जताई। सूत्र का दावा है कि अमेरिकी अधिकारियों को यह भरोसा नहीं था कि इन शहरों के आसपास रूसी वायु रक्षा प्रणाली किसी संभावित हमले को पूरी तरह रोकने के लिए पर्याप्त मजबूत है।

यदि यह दावा सही है तो यह केवल सैन्य संयम का मामला नहीं, बल्कि बेहद संवेदनशील कूटनीतिक संकेत भी है। सवाल उठता है कि क्या वॉशिंगटन ने अपने खुफिया प्रमुख की सुरक्षा और मॉस्को के साथ बातचीत के लिए यूक्रेन से अस्थायी ‘शांत आकाश’ सुनिश्चित करने की कोशिश की? अमेरिकी और रूसी संपर्कों के बीच यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

बताया जा रहा है कि रैटक्लिफ की कथित यात्रा पर पहली नजर तब गई, जब फ्लाइटरडार24 के आंकड़ों में अमेरिकी वायुसेना का एक C-17 सैन्य परिवहन विमान मंगलवार को लातविया की राजधानी रीगा से मॉस्को के वनुकोवो हवाई अड्डे की ओर जाता दिखाई दिया। RCH4555 कॉल साइन वाला विमान सुबह करीब 8:50 बजे रीगा से रवाना हुआ और लगभग 10 बजे के बाद मॉस्को पहुंचा। इससे पहले यह विमान 23 अगस्त को मैरीलैंड के कैंप स्प्रिंग्स से रीगा आया था। कैंप स्प्रिंग्स में ही ज्वाइंट बेस एंड्रयूज स्थित है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति और शीर्ष अधिकारियों की हवाई गतिविधियों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना है।

द कीव इंडिपेंडेंट के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने भी पुष्टि की कि रैटक्लिफ की रूसी अधिकारियों से मुलाकात निर्धारित थी, हालांकि बातचीत का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया। क्रेमलिन ने भी इस कथित दौरे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। यही चुप्पी इस पूरे घटनाक्रम को और रहस्यमय बनाती है।

देखा जाये तो यह सब ऐसे समय हो रहा है जब डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद अमेरिका और रूस के बीच संपर्क बढ़े हैं। ट्रंप ने सत्ता में वापसी के साथ ही यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के लिए बातचीत का वादा किया था। उनके शांति दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर मॉस्को के कई दौरे कर चुके हैं, लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच सबसे बड़ा गतिरोध अब भी क्षेत्रीय नियंत्रण को लेकर बना हुआ है। दोनों पक्षों के बीच जमीन के सवाल पर खाई इतनी गहरी है कि अब तक कोई निर्णायक सफलता नहीं मिली। इस सप्ताह उनकी प्रस्तावित यूक्रेन यात्रा भी टल गई।

ऐसे में जॉन रैटक्लिफ की कथित मॉस्को यात्रा सिर्फ एक खुफिया संपर्क नहीं, बल्कि युद्ध के खतरनाक मोड़ पर पहुंचने की आशंका का संकेत भी हो सकती है। अगर परमाणु विकल्प की चर्चा और पश्चिमी सहयोगियों को निशाना बनाने की आशंका के बीच वास्तव में अमेरिका को सीधे हस्तक्षेप करना पड़ा है, तो यह साफ है कि यूक्रेन युद्ध अब केवल मोर्चों पर नहीं लड़ा जा रहा। असली जंग अब खुफिया सूचनाओं, कूटनीतिक चेतावनियों और उस एक फैसले को रोकने की कोशिश में है, जो पूरे संघर्ष को एक नए और कहीं अधिक विनाशकारी दौर में धकेल सकता है।

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टेस्ट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले 5 भारतीय बल्लेबाज, 13 साल से नहीं टूटा विश्व कीर्तिमान

5 batsman Most runs for India in Test: भारतीय टेस्ट क्रिकेट इतिहास में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले शीर्ष पांच बल्लेबाजों की कहानी शानदारी है . इस लिस्ट में सचिन तेंदुलकर टॉप पर हैं, जिनके बाद राहुल द्रविड़ 'द वॉल' का नाम आता है . तीसरे स्थान पर लिटिल मास्टर सुनील गावस्करऔर चौथे पर रन मशीन विराट कोहली मौजूद हैं . वहीं वीवीएस लक्ष्मण पांचवें स्थान पर हैं, जिन्होंने अपनी कलात्मक पारियों से इतिहास रचा . Wed, 26 Aug 2026 17:44:44 +0530

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