सरकार ने एमएसएमई क्षेत्र को अधिक ऋण उपलब्ध कराने के लिए सिडबी को दिए निर्देश, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों पर रहेगा विशेष जोर
नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) से कहा है कि वह देशभर के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को अधिक ऋण उपलब्ध कराने के लिए अपनी गतिविधियों का विस्तार करे। इसके लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के व्यापक नेटवर्क का उपयोग किया जाएगा, ताकि छोटे कारोबारों और उद्यमियों तक वित्तीय सहायता प्रभावी ढंग से पहुंच सके। बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह बात कही गई।
वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव संजय लोहिया ने सिडबी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक में कहा कि सिडबी और आरआरबी की ताकतों को एक साथ जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जहां सिडबी को एमएसएमई क्षेत्र की वित्तीय जरूरतों की गहरी समझ है, वहीं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की पहुंच देश के छोटे शहरों, कस्बों और गांवों तक है। ऐसे में दोनों संस्थानों का सहयोग ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में छोटे उद्यमों के लिए ऋण उपलब्धता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा कि इस पहल से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को भी अपने ऋण पोर्टफोलियो में विविधता लाने में मदद मिलेगी। कृषि ऋण पर अधिक निर्भरता के बजाय एमएसएमई क्षेत्र को ऋण देने से उनकी व्यवसायिक गतिविधियां और मजबूत होंगी। साथ ही, नियम-आधारित डिजिटल अंडरराइटिंग प्रणाली के उपयोग से परिसंपत्तियों की गुणवत्ता बेहतर बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।
बैठक के दौरान एमएसएमई क्लस्टरों से संबंधित आंकड़ों के महत्व पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि यदि विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद सूक्ष्म और लघु इकाइयों का बेहतर डेटा उपलब्ध होगा, तो उनके लिए लक्षित ऋण योजनाएं तैयार करना और बड़े स्तर पर वित्तीय सहायता पहुंचाना आसान होगा।
सरकार ने आरआरबी को यह भी सुझाव दिया कि वे भारत को अगली पीढ़ी के विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाएं। इसके साथ ही राज्य सरकारों द्वारा आयोजित रोजगार मेलों में शामिल होकर एमएसएमई उद्यमियों के बीच वित्तीय जागरूकता बढ़ाने का कार्य भी करें।
बैठक में यह सुझाव भी दिया गया कि सह-वित्तपोषण व्यवस्था के तहत एमएसएमई ऋण वितरण को क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अपनी शाखाओं के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य के रूप में शामिल करें। सिडबी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने भी आरआरबी से इस व्यवस्था को सफल बनाने के लिए आगे आने का आग्रह किया।
सिडबी द्वारा विकसित सह-वित्तपोषण ऋण उत्पत्ति मंच एक पूर्णतः डिजिटल प्रणाली है, जो ऋण आवेदन से लेकर स्वीकृति और वितरण तक की प्रक्रिया को तेज और कागजरहित बनाती है।
इस मंच के माध्यम से ऋण प्राप्त करने वाले आवेदकों को आवश्यक जानकारी जमा करने के बाद बहुत कम समय में सैद्धांतिक स्वीकृति की सूचना मिल सकती है।
डिजिटल दस्तावेजीकरण और ऋण वितरण प्रणाली की विशेषता यह है कि पात्र ग्राहकों को ऋण की राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें शाखा में जाने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है।
सरकारी बयान के अनुसार, तीन क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में इस मॉडल के पायलट क्रियान्वयन से उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। इसी सफलता को देखते हुए अब इस सह-वित्तपोषण कार्यक्रम का विस्तार अधिक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों तक करने की योजना बनाई जा रही है।
इस पहल से विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कार्य कर रहे सूक्ष्म और लघु उद्यमों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी, जिससे रोजगार सृजन, स्थानीय विनिर्माण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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गंडक नदी में फ्लैश फ्लड की आशंका से बिहार में अलर्ट, मुख्य सचिव ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
नेपाल में गंडक नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में फ्लैश फ्लड की स्थिति उत्पन्न होने तथा गंडक नदी में अचानक जलप्रवाह बढ़ने की संभावना को देखते हुए बिहार में विशेष सतर्कता बरती जा रही है. प्राप्त सूचनाओं के अनुसार गंडक नदी में लगभग 3 मीटर तक ऊंची फ्लैश फ्लड वेव/जलप्रवाह आने की संभावना व्यक्त की गई है. इससे गंडक नदी से जुड़े जिलों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना को देखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जा रही हैं.
नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, लमजुंग एवं तनहुँ (गंडक कैचमेंट) तथा दोलखा एवं सिंधुपालचोक (कोसी कैचमेंट) में फ्लैश फ्लड का उच्च जोखिम पूर्वानुमानित है. वहीं कोसी, बागमती एवं गंडक कैचमेंट के कई अन्य क्षेत्रों में मध्यम जोखिम का पूर्वानुमान है.
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा
माननीय मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आज उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित जिलों के जिलाधिकारी एवं वरीय पुलिस पदाधिकारी/पुलिस अधीक्षक बैठक में शामिल हुए. बैठक में विकसित हो रही स्थिति की समीक्षा करते हुए सभी संबंधित जिलों को सतर्क रहने तथा आवश्यक बचाव एवं राहत तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए गए.
गंडक नदी से जुड़े जिलों में विशेष सतर्कता
गंडक नदी के संभावित बढ़े हुए जलप्रवाह को देखते हुए पश्चिमी चंपारण (बेतिया), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर एवं वैशाली में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अतिरिक्त सीतामढ़ी, शिवहर एवं अन्य संवेदनशील जिलों में भी स्थिति पर लगातार नजर रखने को कहा गया है.
सभी जिलाधिकारियों को नदी के जलस्तर, तटबंधों, निचले इलाकों, पुल-पुलियों एवं अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने तथा स्थानीय समुदाय को समय पर अलर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं.
गंडक बैराज एवं नहरों के संचालन के निर्देश
जल संसाधन विभाग द्वारा गंडक बैराज के सभी गेटों तथा उससे जुड़े नहरों में पानी प्रवाहित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उपलब्ध जलप्रवाह का सुरक्षित एवं प्रभावी प्रबंधन किया जा सके. संबंधित जल संसाधन पदाधिकारियों एवं अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में सतत निगरानी रखने तथा तटबंधों सहित जल संसाधन संरचनाओं की निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है.
NDRF एवं SDRF की अग्रिम तैनाती
संभावित परिस्थिति से निपटने के लिए NDRF एवं SDRF के अतिरिक्त संसाधनों की मूवमेंट सुनिश्चित की जा रही है. गोपालगंज के लिए एक NDRF टीम भेजने का निर्देश दिया गया है तथा एक NDRF टीम को मुजफ्फरपुर में स्टैंडबाय रखा जाएगा. इसके अतिरिक्त बेतिया में भी NDRF की टीम की मूवमेंट/तैनाती लगभग दो घंटे के भीतर सुनिश्चित करने की कार्रवाई की जा रही है. SSB DIG द्वारा भी आवश्यकतानुसार QRT एवं अन्य संभावित सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है, जो बेतिया में उपलब्ध रहेगा.
निकासी, नाव, शेल्टर एवं सामुदायिक रसोई की तैयारी
सभी संबंधित जिलाधिकारियों को संभावित प्रभावित आबादी के लिए Evacuation Plan, पर्याप्त नावों की व्यवस्था, Community Kitchen एवं Shelter की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर समय रहते पहुंचाने की पूरी तैयारी रखने को कहा गया है.
आम जनता से अपील- घबराएं नहीं, लेकिन तैयार रहें
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की घबराहट या पैनिक की आवश्यकता नहीं है. प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और सभी आवश्यक संसाधनों एवं बचाव दलों को अग्रिम रूप से तैयार किया जा रहा है. साथ ही, आम नागरिकों से अपील है कि घबराएं नहीं, लेकिन संभावित बाढ़ की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहें. प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं एवं निर्देशों का पालन करें तथा अफवाहों पर ध्यान न दें.
अफवाहों पर रोक एवं नियमित मीडिया ब्रीफिंग
सभी जिलाधिकारियों को प्रतिदिन Media Briefing करने तथा सोशल मीडिया पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना अथवा अफवाह के प्रसार को रोका जा सके. नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे केवल आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं पर ही भरोसा करें.
सभी विभाग अलर्ट मोड में
जिला प्रशासन, पुलिस, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सतत भ्रमण एवं निगरानी करते हुए आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं. तटबंधों एवं जल संसाधन से संबंधित सभी महत्वपूर्ण संरचनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जा रही है.
राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर
आवश्यकतानुसार अतिरिक्त NDRF/SDRF टीमों, नावों, QRT तथा अन्य संसाधनों की तैनाती तत्काल की जाएगी. संदेश स्पष्ट है- “घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन सतर्क एवं तैयार रहना आवश्यक है.” प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और संभावित बाढ़ की स्थिति में जनहानि को रोकने, समय पर चेतावनी देने, आवश्यकता पड़ने पर त्वरित निकासी तथा प्रभावी बचाव एवं राहत कार्य सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहा है.
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