Xi Jinping किर्गिस्तान में SCO Summit में होंगे शामिल, पीएम मोदी भी पहुंचेंगे
के.जे.एम़. वर्मा बीजिंग, 26 अगस्त चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग अगले सप्ताह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई देशों के नेताओं के हिस्सा लेने की उम्मीद है। चीन के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि शी चिनफिंग 30 अगस्त से एक सितंबर तक किर्गिस्तान की राजकीय यात्रा के दौरान बिश्केक में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।
किर्गिस्तान यात्रा के बाद शी चिनफिंग द्विपक्षीय यात्रा पर मिस्र जाएंगे। चीन वर्तमान में एससीओ का अध्यक्ष देश है और उसने पिछले अगस्त में तियानजिन में शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी भी शामिल हुए थे। सम्मेलन के बाद एससीओ की अध्यक्षता किर्गिस्तान संभालेगा।
तियानजिन शिखर सम्मेलन से इतर हुई मोदी-शी मुलाकात ने भारत-चीन संबंधों के सामान्यीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया था। इसके तहत कैलाश-मानसरोवर यात्रा, वीजा व्यवस्था में सुधार और सीधी उड़ानों जैसे लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने वाले कदमों पर सहमति बनी थी। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि पिछले साल तियानजिन में हुए शिखर सम्मेलन में एससीओ के अगले 10 वर्षों के विकास के लिए रणनीतिक रूपरेखा तैयार की गई थी, जिससे संगठन के उच्च गुणवत्ता वाले विकास के नए चरण की शुरुआत हुई।
तियानजिन सम्मेलन में शी चिनफिंग ने ब्रिक्स के ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ और बीजिंग स्थित एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) की तर्ज पर ‘एससीओ विकास बैंक’ बनाने का प्रस्ताव भी रखा था। लिन ने कहा कि बिश्केक शिखर सम्मेलन के दौरान शी चिनफिंग एससीओ के तहत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने को लेकर भाग लेने वाले देशों के नेताओं के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे। एससीओ के सदस्य देशों में रूस, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, बेलारूस और चीन शामिल हैं।
सितंबर महीना शी चिनफिंग के लिए काफी व्यस्त रहने वाला है। उनके 12-13 सितंबर को नयी दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने और इसके बाद अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ शिखर वार्ता करने की संभावना है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को बीजिंग में सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि (एसआर) तंत्र के तहत आयोजित 25वीं बैठक की।
बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बातचीत के संबंध में जारी एक संक्षिप्त बयान में कहा, ‘‘दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग को और विस्तार देने, स्थिरता बनाए रखने तथा सीमा क्षेत्रों में शांति एवं सौहार्द सुनिश्चित करने के तरीकों पर चर्चा की। साथ ही सीमा निर्धारण में प्रगति और सीमा पार सहयोग से जुड़े मौजूदा प्रयासों को जारी रखने पर भी विचार-विमर्श किया गया।’’ विशेष प्रतिनिधि (एसआर) तंत्र को भारत-चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़े विवाद को व्यापक रूप से सुलझाने के उद्देश्य से स्थापित एक महत्वपूर्ण व्यवस्था माना जाता है। इसके अलावा यह दोनों देशों के बीच कई अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर समय-समय पर उत्पन्न होने वाले तनाव को दूर करने के प्रयासों में भी अहम भूमिका निभाता है।
Nepal Flood: नेपाल में भोटे कोशी की भीषण बाढ़ से 17 की मौत, 105 भारतीय लापता
(तस्वीरों के साथ जारी) काठमांडू, 26 अगस्त तिब्बत की सीमा से लगे मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई जिसमें 17 लोगों की मौत हो गई और 105 भारतीयों समेत करीब 500 लोग लापता हैं। बाढ़ से शहरों और गांवों में तबाही हुई, पुल बह गए और कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह करीब नौ बजे भोटे कोशी नदी में अचानक बाढ़ आई, जिससे तिब्बत की सीमा से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए।
इसके बाद बाढ़ धादिंग, नुवाकोट और चितवन जिलों तक फैल गई, जिससे कम से कम चार स्थायी पुल और कुछ अस्थायी पुल क्षतिग्रस्त हो गए। प्रारंभिक अध्ययन रिपोर्टों के अनुसार, उपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर यह बाढ़ नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अस्थिर पहाड़ी चट्टानों के खिसकने से आई। यह स्थान तिब्बत-रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है।
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने बताया कि चट्टान खिसकने और नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित लेंडे नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण तिमुरे में भोटेकोशी के रास्ते भीषण बाढ़ का पानी और मलबा त्रिशूली नदी तक फैल गया। अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न जिलों में आई बाढ़ में कम से कम 17 लोगों की मौत हुई है। नेपाल के गृह मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि इनमें धादिंग में छह, नुवाकोट में तीन और रसुवा में एक व्यक्ति की मौत हुई है।
करीब 400 लापता लोगों में कम से कम 105 भारतीय और 37 अनिवासी भारतीय (एनआरआई) शामिल हैं। इसके अलावा, प्रतिनिधि सभा में विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि विभिन्न स्थानों पर नेपाल की सेना के 44 जवानों समेत 80 सुरक्षाकर्मी लापता हैं। जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, बुधवार को आई बाढ़ रसुवा में हुई बारिश के कारण नहीं आई थी।
नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग (एनडीआरआरएमए) ने दोपहर में ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि चीनी पक्ष से मिली जानकारी के अनुसार, नदी के अवरुद्ध होने के स्थान पर बनी झील का पानी अभी पूरी तरह नहीं निकला है इसलिए भोटे कोशी और त्रिशूली क्षेत्रों में खतरा अभी बना हुआ है। प्रभाग ने लोगों से नदियों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की। बाद में दिन में एनडीआरआरएमए ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘नदी के अवरुद्ध स्थल पर बनी झील अभी पूरी तरह खाली नहीं हुई है, इसलिए भोटेकोशी और त्रिशूली क्षेत्रों में खतरा बना हुआ है।
लोगों से अगली सूचना जारी होने तक नदी से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने का आग्रह किया जाता है।’’ बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित रसुवा है, जो काठमांडू से करीब 125 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में तिब्बत सीमा के पास स्थित है। सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे वीडियो में नेपाल-चीन सीमा पर स्थित रसुवागढ़ी में भारी पैमाने पर तबाही नजर आ रही है। इस कथित वीडियो में तेज बहाव के साथ एक विशाल लहर को दो मंजिला इमारत के ऊपर से गुजरते और अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को बहाते हुए देखा जा सकता है।
कई लोगों को पहले पानी के आने की आवाज सुनकर भागते हुए देखा गया, लेकिन कुछ ही सेकेंड में वे अचानक आई बाढ़ के बाद जमा हुए कीचड़ और मलबे में दब गए। सोशल मीडिया पर भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे स्थित बस्तियों में हुई तबाही की तस्वीरें और वीडियो छाए रहे। नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद करीब 400 लोग लापता हैं, जिनमें कम से कम 105 भारतीय और 37 अनिवासी भारतीय (एनआरआई) शामिल हैं।
इनमें से अधिकतर भारतीय तिब्बत में कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जा रहे थे। नेपाल पर्यटन बोर्ड (एनटीबी) के अनुसार, रसुवा में आई बाढ़ के कारण कुल 384 यात्री लापता हुए हैं, जिनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक हैं। एनटीबी ने एक बयान में बताया कि भारतीयों और एनआरआई के अलावा लापता पर्यटक अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड के हैं।
सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल एजेंसी के अनुसार, कम से कम 59 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा के तीर्थयात्री थे। भारतीय दूतावास ने नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता और जानकारी के लिए आपातकालीन नंबर जारी किए हैं। भारतीय दूतावास ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि वह बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों के बचाव और राहत के लिए नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है।
दूतावास ने कहा कि नेपाल सरकार के साथ समन्वय में बचाव और राहत प्रयासों को और मजबूत किया जा रहा है। नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी सहायता के लिए टोल-फ्री आपातकालीन नंबर जारी किया है। ‘द काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा में रसुवागढ़ी सीमा चौकी से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी सड़क को बहा ले गयी।
अखबार ने सड़क विभाग के उप महानिदेशक एवं प्रवक्ता शुभराज न्यौपाने के हवाले से बताया कि बाढ़ के पानी ने कई स्थानों पर सड़क को नष्ट कर दिया और कई कंक्रीट के पुल भी बह गए। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने एक बयान में रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा में नदी किनारे रहने वाले लोगों से अगली सूचना तक अत्यधिक सतर्क रहने और सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की। रसुवा के सहायक मुख्य जिला अधिकारी ध्रुव प्रसाद अधिकारी ने कहा कि बाढ़ भयावह थी और दो बस्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है।
रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने कहा कि सीमा शुल्क परिसर में रखे कई वाहन और सामान बह गया। हाल ही में बनाया गया एक पुल भी नष्ट हो गया। यह स्थान तिब्बत और चीन से जुड़े नेपाल के व्यापारिक यातायात को नियंत्रित करता है।
इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल (आईपीपीएएन) के एक बयान के अनुसार, अचानक आई बाढ़ से नुवाकोट और रसुवा जिलों में कुल 354 मेगावाट क्षमता वाली आठ चालू जलविद्युत परियोजनाएं और निर्माणाधीन पांच परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। बाढ़ से क्षतिग्रस्त प्रमुख चालू जलविद्युत परियोजनाओं में रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना (111 मेगावाट), संजेन खोला जलविद्युत परियोजना (78 मेगावाट) और अपर त्रिशूली-3ए (60 मेगावाट) शामिल हैं। ‘द काठमांडू पोस्ट’ ने उत्तरगया ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष चामेली गुरूंग के हवाले से बताया कि स्याफ्रूबेसी, बेत्रावती, मेलुंग, सल्लेटार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खल्ती बस्ती, सोले, त्रिशूली और बट्टार समेत करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुई हैं।
स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक के बाद नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को प्रभावित इलाकों में बचाव एवं राहत कार्यों के लिए तैनात किया गया। सेना के एक बयान के अनुसार, नेपाल की सेना ने अचानक आई बाढ़ के बाद खोज एवं बचाव अभियान चलाने के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए। रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी से छह, मेलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को बचाया गया।
बयान में कहा गया कि नेपाल सेना ने त्रिशूली में सैन्य प्रशिक्षण केंद्र नंबर-1 में एक उपचार केंद्र भी स्थापित किया है, जहां सेना के चिकित्सा कर्मी प्रभावित लोगों को आपात चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। सेना के एक बयान के अनुसार, आपातकालीन चिकित्सा बचाव दल से लैस एमआई-17 हेलीकॉप्टर को त्रिशूली स्थित जिला अस्पताल की ओर भी भेजा गया। सुरक्षा बलों ने बाढ़ के कारण विभिन्न स्थानों पर फंसे 80 से अधिक लोगों को बचाया।
नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अबी नारायण काफ्ले के हवाले से स्थानीय मीडिया ने बताया कि तिमुरे स्थित क्षेत्र पुलिस कार्यालय, स्याफ्रूबेसी पुलिस चौकी और रसुवागढ़ी पुलिस चौकी भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। सशस्त्र पुलिस बल के प्रवक्ता नेत्र बहादुर कार्की ने बताया कि बाढ़ के बाद रसुवा से सशस्त्र पुलिस बल के चार जवान लापता हैं। बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए पांच ड्रोन तैनात किए गए हैं।
प्रभावित क्षेत्र में तीन प्रशिक्षित खोजी कुत्ते भी भेजे गए हैं। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने रसुवा और नुवाकोट जिलों में बाढ़ से हुई जनहानि और संपत्ति के नुकसान पर दुख जताया। पिछले साल भी भोटेकोशी में दो बार विनाशकारी बाढ़ आई थी जिनसे रसुवा में भारी तबाही हुई थी और कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी।
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