Concentration in Children: बच्चे को फोकस करने में दिक्कत आती है? इन 5 तरीकों से बढ़ेगी एकाग्रता
Concentration in Children: बच्चों का पढ़ाई करते समय बार-बार उठना, कुछ ही मिनटों में बोर हो जाना या आसपास की छोटी-सी आवाज से ध्यान भटक जाना आज कई माता-पिता की आम चिंता है। हर बच्चे की ध्यान लगाने की क्षमता अलग होती है और उम्र, नींद, खान-पान, दिनचर्या और आसपास का माहौल भी इस पर असर डाल सकता है। ऐसे में बच्चे को बार-बार डांटने के बजाय उसकी दिनचर्या और पढ़ाई के तरीके में छोटे-छोटे बदलाव करना ज्यादा मददगार हो सकता है।
एकाग्रता बढ़ाने के लिए जरूरी नहीं कि बच्चे को घंटों किताब के सामने बैठाया जाए। छोटे लक्ष्य तय करना, पढ़ाई के बीच ब्रेक देना, पर्याप्त नींद लेना और मोबाइल जैसे ध्यान भटकाने वाले साधनों से दूरी बनाना भी काफी उपयोगी हो सकता है। अगर बच्चे को लंबे समय से स्कूल और घर दोनों जगह ध्यान लगाने में लगातार परेशानी हो रही है, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना भी जरूरी है।
पढ़ाई को छोटे हिस्सों में बांटें
बच्चे से लगातार एक या दो घंटे पढ़ने की उम्मीद करने के बजाय पढ़ाई को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें। उदाहरण के लिए 20-25 मिनट पढ़ाई के बाद कुछ मिनट का छोटा ब्रेक दिया जा सकता है। इससे बच्चे को काम मुश्किल या बहुत लंबा नहीं लगेगा। धीरे-धीरे पढ़ाई का समय उसकी क्षमता के अनुसार बढ़ाया जा सकता है।
पढ़ाई के लिए शांत जगह चुनें
टीवी, मोबाइल, तेज आवाज और लगातार आने-जाने वाले लोगों के बीच पढ़ाई करने से बच्चे का ध्यान आसानी से भटक सकता है। कोशिश करें कि उसके लिए एक साफ-सुथरी और शांत जगह तय हो। पढ़ाई की मेज पर केवल जरूरी किताबें और स्टेशनरी रखें। इससे आसपास की चीजों से होने वाला डिस्ट्रैक्शन कम किया जा सकता है।
नींद का रखें खास ध्यान
पर्याप्त नींद बच्चों के मूड, सीखने और ध्यान लगाने की क्षमता के लिए महत्वपूर्ण है। सोने और जागने का समय लगभग नियमित रखने की कोशिश करें। रात में सोने से पहले मोबाइल या दूसरे स्क्रीन डिवाइस का इस्तेमाल कम करना भी अच्छी आदत हो सकती है। अगर बच्चा लगातार थका हुआ रहता है, तो उसकी नींद की दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी है।
खेल और शारीरिक गतिविधि को बनाएं रूटीन का हिस्सा
एकाग्रता का मतलब पूरे दिन बच्चे को कुर्सी पर बैठाए रखना नहीं है। आउटडोर खेल, साइकिल चलाना, दौड़ना या उम्र के अनुसार दूसरी शारीरिक गतिविधियां बच्चे को सक्रिय रखने में मदद कर सकती हैं। पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। लंबे समय तक बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलना भी उपयोगी हो सकता है।
बच्चे की कोशिश की तारीफ करें
हर बार केवल अच्छे नंबर या पूरा काम करने पर ही तारीफ न करें। बच्चे ने कितनी कोशिश की, कितनी देर ध्यान लगाया या बिना याद दिलाए काम शुरू किया, इन छोटी उपलब्धियों को भी पहचानें। सकारात्मक प्रोत्साहन से बच्चे में आत्मविश्वास बढ़ सकता है और वह पढ़ाई को दबाव की बजाय बेहतर अनुभव के रूप में लेने लगता है।
कब विशेषज्ञ से लें सलाह?
अगर बच्चा लगातार पढ़ाई, खेल या बातचीत के दौरान ध्यान नहीं लगा पाता, निर्देशों को बार-बार भूलता है या उसकी परेशानी स्कूल और घर दोनों जगह उसके रोजमर्रा के काम को प्रभावित कर रही है, तो केवल डांटने या घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। ऐसे मामले में शिक्षक और बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करके स्थिति को समझना बेहतर रहता है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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Dry Lips Remedies: होंठों की त्वचा चेहरे के बाकी हिस्सों की तुलना में ज्यादा नाजुक होती है, इसलिए मौसम में बदलाव, कम पानी पीना, बार-बार होंठों पर जीभ फेरना या लिप्स की पर्याप्त देखभाल न करने से वे जल्दी रूखे और फटने लगते हैं। कई बार होंठों पर सफेद परत, खिंचाव और जलन भी महसूस हो सकती है। ऐसे में महंगे प्रोडक्ट्स की बजाय रोजमर्रा की कुछ आसान आदतें होंठों को मॉइस्चराइज रखने में मदद कर सकती हैं।
अगर होंठ लगातार ड्राई रहते हैं, तो केवल ऊपर से कोई चीज लगाने के बजाय उनकी नमी बनाए रखने पर ध्यान देना जरूरी है। पर्याप्त पानी पीना, होंठों को चाटने से बचना और ऐसा लिप बाम इस्तेमाल करना जो नमी को लॉक करे, काफी मददगार हो सकता है। कुछ घरेलू विकल्प भी राहत दे सकते हैं, लेकिन अगर होंठों पर बार-बार गहरी दरारें पड़ती हैं, खून आता है या लंबे समय तक समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
नारियल तेल से करें मॉइश्चराइज
नारियल तेल त्वचा को मुलायम बनाए रखने में मदद कर सकता है। रात को सोने से पहले साफ हाथों से होंठों पर बहुत थोड़ी मात्रा में नारियल तेल लगाएं। इससे होंठों की सतह पर नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है। अगर आपको किसी तेल या कॉस्मेटिक से एलर्जी होती है, तो पहले थोड़ी मात्रा लगाकर प्रतिक्रिया देखना बेहतर है।
शहद की पतली परत लगाएं
शहद में नमी बनाए रखने वाले गुण होते हैं और यह त्वचा की देखभाल में इस्तेमाल किया जाता है। साफ होंठों पर थोड़ी मात्रा में शहद की पतली परत लगाई जा सकती है। कुछ देर बाद इसे साफ कर लें। बहुत ज्यादा फटे या घायल होंठों पर कोई भी घरेलू सामग्री लगाने से पहले सावधानी बरतें।
एलोवेरा जेल का करें इस्तेमाल
शुद्ध और खुशबू रहित एलोवेरा जेल होंठों पर हल्की नमी देने में मदद कर सकता है। इसे थोड़ी मात्रा में लगाएं और कुछ समय के लिए छोड़ दें। हालांकि, बाजार में मिलने वाले एलोवेरा जेल में कई तरह के अतिरिक्त पदार्थ हो सकते हैं, इसलिए संवेदनशील त्वचा वाले लोग सामग्री जरूर जांचें।
होंठों पर जीभ फेरने की आदत छोड़ें
होंठ सूखने पर उन्हें बार-बार चाटने से थोड़ी देर के लिए राहत महसूस होती है, लेकिन इससे समस्या बढ़ सकती है। लार सूखने के बाद होंठों की सतह से नमी और तेजी से कम हो सकती है। इसलिए होंठों को चाटने के बजाय मॉइस्चराइजिंग लिप बाम लगाना बेहतर विकल्प है।
पर्याप्त पानी पिएं और होंठों को धूप से बचाएं
पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीना शरीर और त्वचा को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। इसके अलावा बाहर निकलते समय SPF वाला लिप बाम इस्तेमाल करना भी उपयोगी हो सकता है, क्योंकि होंठों पर भी धूप का असर पड़ता है। बहुत ज्यादा खुशबू, मेंथॉल या जलन पैदा करने वाले लिप प्रोडक्ट्स से बचना बेहतर है, खासकर जब होंठ पहले से फटे हुए हों।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर घरेलू देखभाल के बावजूद होंठ कई दिनों तक ठीक न हों, बार-बार खून आए, सूजन या तेज दर्द हो, मुंह के कोनों पर लगातार दरारें रहें या होंठों का रंग और बनावट असामान्य रूप से बदलने लगे, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें। कभी-कभी लगातार फटे होंठ एलर्जी, संक्रमण, पोषण संबंधी कमी या किसी अन्य समस्या से भी जुड़े हो सकते हैं।
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