इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स अमेरिका के दक्षिणी लुइसियाना में दुनिया का सबसे बड़ा रॉकेट लॉन्च कॉम्प्लेक्स बना रही है। इस प्रोजेक्ट पर कंपनी 100 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹9.50 लाख करोड़ का निवेश करेगी। 'स्टारबेस, लुइसियाना' स्पेसएक्स का दूसरा 'स्टारबेस' कैंपस होगा। यह नया स्पेसपोर्ट लुइसियाना के पिकान आइलैंड पर 1.25 लाख एकड़ में फैला होगा, जो कि न्यूयॉर्क के मैनहट्टन शहर से भी आठ गुना बड़ा है। यहां से स्पेसएक्स के नेक्स्ट-जनरेशन रॉकेट 'स्टारशिप' और AI बेस्ड सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। कंस्ट्रक्शन साल 2029 से शुरू होने की उम्मीद है। 3,000 नई नौकरियां मिलेंगी, औसत सैलरी ₹88 लाख सालाना होगी लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री ने इसे राज्य की इकोनॉमी के लिए बड़ा कदम बताया है। लैंड्री के मुताबिक, इस स्पेसपोर्ट से क्षेत्र में कम से कम 3 हजार से ज्यादा डायरेक्ट नौकरियां पैदा होंगी। यहां काम करने वाले कर्मचारियों की औसत सालाना सैलरी 92,600 डॉलर यानी करीब 88 लाख रुपए होगी, जो वर्मिलियन पैरिश की मौजूदा औसत इनकम से लगभग दोगुनी है। गवर्नर ने कहा, "यह प्रोजेक्ट रोजगार, समुदायों के लिए प्रगति और हमारे तटीय इलाकों के लिए सुरक्षा लेकर आएगा।" 'सेल्फ-सस्टेनिंग' होगा कैंपस, खुद बनाएगा ईंधन और बिजली स्पेसएक्स की प्रेसिडेंट ग्विन शॉटवेल ने बताया कि यह कैंपस पूरी तरह 'सेल्फ-सस्टेनिंग' होगा। खुद का ईंधन और बिजली: कॉम्प्लेक्स के भीतर ही रॉकेट प्रोपेलेंट के लिए मीथेन गैस का उत्पादन होगा और इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन फैसिलिटी लगाई जाएगी। शिपिंग और ट्रांसपोर्ट: स्टारशिप रॉकेट्स को लाने-ले जाने के लिए डीप-वॉटर शिपिंग पोर्ट और व्हीकल प्रोसेसिंग यूनिट्स बनाई जाएंगी। एक डेडिकेटेड एयरपोर्ट भी बनाया जा सकता है। शॉटवेल ने कहा कि इस फैसिलिटी का लक्ष्य हर साल स्टारशिप के हजारों उड़ानों को सपोर्ट करना है, हालांकि यह इंजीनियरिंग और रेग्युलेटरी अप्रूवल पर निर्भर करेगा। रॉकेट मैन्युफैक्चरिंग नहीं सिर्फ लॉन्चिंग होगी यह लुइसियाना कैंपस स्पेसएक्स के टेक्सास स्थित 'स्टारबेस' से काफी अलग होगा। टेक्सास में रॉकेट्स का निर्माण और असेंबली की जाती है, जबकि लुइसियाना फैसिलिटी में रॉकेट की मैन्युफैक्चरिंग नहीं होगी। इसका मुख्य फोकस केवल हाई-फ्रीक्वेंसी यानी तेज गति से लॉन्चिंग पर रहेगा। पिकान आइलैंड की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां से रॉकेट्स को सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में आसानी से भेजा जा सकता है। यह ऑर्बिट सोलर-पावर्ड सैटेलाइट्स के लिए सबसे मुफीद मानी जाती है। लुइसियाना स्पेसपोर्ट के जरिए मस्क दो बड़े लक्ष्य… नॉलेज पार्ट: क्या होता है 'सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट'? यह पृथ्वी का एक ऐसा ऑर्बिटहै जिसमें सैटेलाइट हमेशा सूर्य के एक ही कोण के साथ यात्रा करती है। यानी सैटेलाइट जिस जगह से भी गुजरती है, वहां हमेशा धूप होती है। सोलर-पावर्ड सैटेलाइट्स और अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स के लिए यह ऑर्बिट सबसे बेस्ट मानी जाती है।
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अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के वैश्विक राजस्व स्रोतों को पूरी तरह ठप करने के इरादे से 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के साथ लगभग 119 मिलियन डॉलर के अवैध तेल और पेट्रोकेमिकल व्यापार में संलिप्तता का आरोप लगाते हुए भारत की 4 कंपनियों तथा 3 भारतीय नागरिकों पर कड़े प्रतिबंध (Sanctions) लगा दिए हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इस अभियान को ईरान के खिलाफ "इकोनॉमिक D-Day" करार दिया है। वाशिंगटन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि तेहरान के साथ किसी भी प्रकार का आर्थिक लेन-देन करने वाली वैश्विक संस्थाओं को अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
ये नए प्रतिबंध उस कार्रवाई का हिस्सा हैं जिसे अमेरिकी ट्रेजरी ने "दुनिया भर में ईरान के वित्तीय संबंधों के खिलाफ आर्थिक हमला" बताया है। अमेरिकी ट्रेजरी के अनुसार, भारत की सदाशिव ओवरसीज लिमिटेड ने फरवरी 2024 और जून 2025 के बीच ईरान में बने लगभग 69 मिलियन डॉलर मूल्य के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। इनमें से कुछ शिपमेंट का संबंध 'बोनजोर कमोडिटी FZE' से था, जो पहले से ही वाशिंगटन द्वारा प्रतिबंधित कंपनी है।
PP सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड और प्रकृतिस इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पर ईरान में बने लगभग 25-25 मिलियन डॉलर मूल्य के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करने का आरोप है। इस तरह, अमेरिका द्वारा बताई गई इन तीनों कंपनियों के आयात का कुल मूल्य लगभग 119 मिलियन डॉलर हो जाता है।
चौथी कंपनी, पोर्टईज़ पार्टनर्स LLP (भारत स्थित कस्टम्स ब्रोकर), पर ईरान से पेट्रोकेमिकल उत्पादों के कई शिपमेंट को भारत लाने में मदद करने का आरोप है, जिसके कारण उस पर प्रतिबंध लगाया गया।
अमेरिका ने तीन भारतीय नागरिकों को भी निशाना बनाया। PP सॉफ्टटेक के डायरेक्टर प्रशांत गर्ग के साथ-साथ पोर्टईज़ पार्टनर्स के इंद्रिसमिया अशरफमिया शेख और हरीश रामचंद्र रंगी पर भी प्रतिबंध लगाए गए।
ईरान के खिलाफ अमेरिका का 'इकोनॉमिक D-डे'
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ये नए उपाय ईरानी सरकार पर "शिकंजा कसेंगे" और उन्होंने इस अभियान को "इकोनॉमिक D-डे" (निर्णायक आर्थिक कार्रवाई) करार दिया। वाशिंगटन ने चेतावनी दी है कि ईरान के साथ "किसी भी तरह का" आर्थिक लेन-देन करने पर जुर्माना लग सकता है, क्योंकि प्रशासन तेहरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना चाहता है।
ये नए प्रतिबंध अमेरिका और ईरान के बीच नाजुक संघर्ष-विराम (सीजफायर) के बावजूद लगाए गए हैं, जबकि अभी तक कोई स्थायी समझौता नहीं हुआ है। वाशिंगटन ने पहले भी ईरान के साथ कथित तेल व्यापार को लेकर भारत की अन्य कंपनियों को निशाना बनाया है, जिनमें फरवरी में प्रतिबंधित चार फर्में और पिछले साल जुलाई में निशाना बनाई गई छह कंपनियां और तीन भारतीय नागरिक शामिल हैं।
इस नई सूची में चीन और हांगकांग स्थित लगभग 20 कंपनियां और चीन के चार व्यक्ति भी शामिल हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कुल मिलाकर लगभग 60 व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों पर प्रतिबंध लगाए हैं।
ईरान का कहना है कि वह मुकाबला करने के लिए तैयार है
तेहरान ने अमेरिका के दबाव वाले अभियान को खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने हालिया प्रतिबंधों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के लिए खतरा बताया है।
मंत्रालय ने कहा, "कोई भी सम्मानित देश जो अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों को महत्व देता है, वह इस तरह की घोर अराजकता और व्यवस्थित दादागिरी को स्वीकार नहीं करेगा।" ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदानिज़ादेह ने कहा कि देश इन हालिया कदमों का सामना करने के लिए "पूरी तरह तैयार" है और उनके मुकाबले के लिए उसके पास "दो साल की योजना" है।
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर घालीबाफ ने भी तेहरान के साथ व्यापार करने वाले देशों के खिलाफ वाशिंगटन की धमकियों को "बड़ी-बड़ी बातें" कहकर खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "ईरान के व्यापारिक साझेदारों ने भी हमें मीडिया और संदेशों के जरिए बताया है कि वे इन बयानों को पूरी तरह बेमतलब मानते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "अमेरिकी जानते हैं कि उनकी बड़ी-बड़ी बातों पर कोई विश्वास नहीं करता; अमेरिका आर्थिक रूप से ऐसी स्थिति में नहीं है कि वह दूसरे देशों के साथ अपने संबंधों को और सीमित कर सके।"
घालीबाफ ने कहा कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ अपने अभियान की आर्थिक कीमत चुकानी पड़ रही है और चेतावनी दी कि प्रतिबंध तेहरान के व्यापारिक साझेदारों को संबंध तोड़ने के लिए मजबूर नहीं कर पाएंगे।
प्रतिबंधों से तेल बाजार की चिंताएं कम हुईं
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सैक्सो बैंक में कमोडिटी स्ट्रैटेजी के प्रमुख ओले हैनसेन के हवाले से बताया कि ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल संघर्ष में सीधी सैन्य टक्कर से हटकर आर्थिक दबाव की ओर बढ़ने से तेल बाजार में कुछ चिंताएं कम हुई हैं। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन का हालिया प्रतिबंध पैकेज कुछ व्यापारियों की उम्मीदों की तुलना में कम आक्रामक था।
तेल व्यापार सलाहकार फर्म 'रिटरबुश एंड एसोसिएट्स' ने कहा कि आर्थिक उपायों पर फिर से ध्यान केंद्रित करने से यह उम्मीद भी जगी है कि अमेरिका और ईरान संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं। यह संघर्ष फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले शुरू करने के बाद शुरू हुआ था।
संभावित राजनयिक समाधान के संकेत मिले हैं; ईरान और ओमान ने कहा है कि उन्होंने मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से होकर गुजरने वाले एक "संयुक्त अस्थायी नेविगेशन कॉरिडोर" के प्रस्ताव पर चर्चा की, साथ ही इस रणनीतिक जलमार्ग से बारूदी सुरंगों को हटाने की योजनाओं पर भी बात की।
हालांकि, 'रिटरबुश एंड एसोसिएट्स' ने चेतावनी दी कि मंगलवार को तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट शायद कुछ ज्यादा ही हो गई है। फर्म ने चेतावनी दी कि अगर ईरान मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों के साथ जवाब देता है, तो कीमतें तेजी से वापस बढ़ सकती हैं।
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