अक्षय की हैवानियत! खिलाड़ी कुमार का हैवान के ट्रेलर में दिखा खौफनाक अंदाज, ब्लाइंड बने सैफ से होगी भिड़ंत
How is Haiwaan Trailer: बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार और सैफ अली खान की फिल्म ‘हैवान’ (Haiwaan) का मच अवेटेड ट्रेलर रिलीज हो चुका है. ट्रेलर रिलीज के साथ ही सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा तेज हो गई है. जिसे देखने के बाद पता चलता है कि यह कोई सीधी-सादी क्राइम थ्रिलर फिल्म नहीं है. इसमें जिस तरह से मिस्ट्री, डर और माइंड गेम को दिखाया गया है, वह अलग ही लेवल का है. इतना ही नहीं फिल्म में कई परतें नजर आती हैं. हैवान में अक्षय ने एक खौफनाक विलेन का किरदार निभाया है, जो एक सनकी और बेरहम साइकोपैथ किलर है. जबकि सैफ अली खान ब्लाइंड शख्स का किरदार निभाते हुए नजर आए. आइए जानते हैं कि ट्रेलर में क्या देखने को मिला है.
अक्षय कुमार के विलेन के किरदार ने खींचा लोगों का ध्यान
‘हैवान’ के ट्रेलर में अक्षय कुमार का किरदार पहली ही नजर में बहुत खतरनाक दिखाई देता है. इसमें वह सिर पर बीनी और हुडी पहने नजर आए, जो उनके किरदार को मिस्टीरियस लुक दे रहा है. वह बदले लिए अपने शिकार का पीछा करते दिखाई देते हैं और उनके चेहरे के एक्सप्रेशन के अलावा हंसने का अंदाज भी काफी डरावना लगता है.
दरअसल, अक्षय का यह किरदार किसी नॉर्मल विलेन जैसा नहीं है. ट्रेलर में वह एक ऐसे साइकोपैथ किलर के रूप में दिखाई दे रहे हैं जो बेहद बेरहम है और अपने मकसद के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार होता है. भारी बारिश के बीच हाथ में कुल्हाड़ी लेकर छतों पर उनका दौड़ना ट्रेलर के सबसे खौफनाक सीन में से एक है. यानी इस बार अक्षय के किरदार की ताकत सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि विलेन का वो खौफनाक किरदार भी है जो लोगों में डर पैदा करता है.
ब्लाइंड बने सैफ अली खान से होगी भिड़ंत
हैवान में अक्षय के अलावा सैफ भी नजर आ रहे हैं, उन्होंने इसमें एक ब्लाइंड शख्स का किरदार निभाया है, उनकी यह कमजोरी ही फिल्म की असली ताकत मानी जा रही है. ट्रेलर में दिखाया जाता है कि वह देख नहीं सकते, लेकिन उनकी सुनने और आसपास की चीजों को महसूस करने के सेंस बहुते तेज हैं. ट्रेलर में सैफ को कई मुश्किल सिचुएशन का सामना करते हुए दिखाया गया है. कहीं वह अंधेरे गलियारों में बंदूक चलाते नजर आते हैं, तो कहीं खून से लथपथ में पुलिस से घिरे दिखाई देते हैं. उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं है कि कातिल से कैसे बचना है बल्कि खुद को निर्दोष भी साबित करना है. इसके बाद ही फिल्म का असली सस्पेंस शुरू होता है.
ये भी पढ़ें: अनूप जलोटा ने आधी उम्र की हसीना को किया डेट? बिग बॉस में आए साथ नजर, अब बताया चौथी शादी करेंगे या नहीं
भारत में अलग, यूरोप में अलग क्यों? फैंटा से मैगी तक पैकेज्ड फूड के दोहरे मानकों पर सवाल
भारत और यूरोप में एक ही वैश्विक ब्रांड के पैकेज्ड फूड और ड्रिंक की संरचना, पोषण संबंधी जानकारी और चेतावनी लेबल अलग होने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है. सवाल सिर्फ फैंटा या मैगी जैसे उत्पादों का नहीं है, बल्कि यह है कि क्या भारतीय उपभोक्ताओं को वही स्वास्थ्य मानक मिल रहे हैं, जो यूरोप और दूसरे विकसित बाजारों में लागू हैं?
एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ब्रिटेन में बिकने वाले फैंटा के एक कैन में भारत में बिकने वाले संस्करण की तुलना में काफी कम कैलोरी और चीनी होती है. साथ ही कुछ कृत्रिम रंगों को लेकर यूरोपीय बाजारों में अधिक स्पष्ट चेतावनी व्यवस्था लागू है. इससे भारत में खाद्य उत्पादों की लेबलिंग और नियमन को लेकर बहस तेज हो गई है.
फैंटा के उदाहरण से उठे बड़े सवाल
फैंटा के अलग-अलग देशों में बिकने वाले संस्करणों का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया जा रहा है कि कंपनियां बाजार के अनुसार उत्पादों की रेसिपी क्यों बदलती हैं. यूरोपीय देशों में कुछ कृत्रिम रंगों के इस्तेमाल पर विशेष चेतावनी आवश्यक होती है, जबकि भारत में ऐसी जानकारी पैकेजिंग पर अपेक्षाकृत कम प्रमुखता से दिखाई दे सकती है.
हालांकि, अलग-अलग देशों में खाद्य नियम, अनुमत सामग्री और उत्पाद फॉर्मूलेशन अलग हो सकते हैं. इसलिए केवल पैकेजिंग के अंतर से यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि कोई उत्पाद जानबूझकर भारतीय उपभोक्ताओं के लिए अधिक नुकसानदेह बनाया गया है.
FSSAI की लेबलिंग नीति पर बहस
इस पूरे विवाद का एक अहम हिस्सा भारत में पैकेज्ड फूड की फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबलिंग से जुड़ा है. सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से मांग करते रहे हैं कि अधिक चीनी, नमक और वसा वाले उत्पादों की जानकारी पैकेट के सामने स्पष्ट तरीके से दिखाई जानी चाहिए.
दलील है कि उपभोक्ता अक्सर खरीदारी के दौरान पैकेट के पीछे लिखी लंबी पोषण तालिका नहीं पढ़ते. ऐसे में सामने दिखाई देने वाली सरल चेतावनी उन्हें बेहतर विकल्प चुनने में मदद कर सकती है.
दूसरी ओर, खाद्य उद्योग का तर्क रहा है कि केवल रंगीन चेतावनी संकेत उपभोक्ताओं के व्यवहार में अपेक्षित बदलाव नहीं ला सकते.
दुनिया के कई देशों में फ्रंट लेबल
पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग अब कई देशों में इस्तेमाल की जा रही है. कुछ जगहों पर लाल, पीले और हरे रंग के संकेतों के जरिए चीनी, नमक और वसा की मात्रा को आसानी से समझाने की कोशिश की जाती है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी व्यवस्था का फायदा यह है कि उपभोक्ता बिना लंबी जानकारी पढ़े उत्पाद की पोषण संबंधी स्थिति का प्राथमिक अंदाजा लगा सकता है. भारत में भी इसी तरह की व्यवस्था को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है.
कंपनियों पर दोहरे मानकों का आरोप
वैश्विक खाद्य कंपनियों पर आरोप लगाया जा रहा है कि वे यूरोप और ब्रिटेन जैसे बाजारों में कड़े नियमों का पालन करती हैं, जबकि भारत जैसे बाजारों में अपेक्षाकृत अलग रणनीति अपनाती हैं.
मैगी और किटकैट के उदाहरण भी इसी बहस में दिए जाते हैं. अलग-अलग देशों में एक ही ब्रांड के उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उनकी मात्रा अलग हो सकती है. इसकी वजह स्थानीय नियम, उपभोक्ताओं की पसंद, लागत और बाजार की परिस्थितियां हो सकती हैं.
इसलिए हर अंतर को सीधे ‘दोहरे मानक’ के रूप में देखना भी उचित नहीं होगा, लेकिन पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
बढ़ता पैकेज्ड फूड बाजार चिंता की वजह
भारत में पैकेज्ड फूड और पेय पदार्थों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. इसके साथ ही अधिक चीनी, नमक और वसा वाले खाद्य पदार्थों के बढ़ते सेवन को लेकर सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंता जताते रहे हैं.
मोटापा और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते जोखिम के बीच उपभोक्ताओं को उत्पादों की सही जानकारी देना पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है.
कंपनियों के लिए चुनौती, उपभोक्ताओं के लिए अधिकार
फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लागू होने से कंपनियों को अपने उत्पादों की फॉर्मूलेशन और पैकेजिंग रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है. वहीं उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक पोषण स्थिति समझने में आसानी हो सकती है.
हालांकि, सिर्फ लेबल से स्वस्थ समाज नहीं बनाया जा सकता. इसके लिए बेहतर खाद्य शिक्षा, स्पष्ट विज्ञापन नियम, मजबूत नियमन और उपभोक्ता जागरूकता भी जरूरी है.
यह भी पढ़ें - हर समय मीठा खाने का करता है मन, शरीर में हो सकती है ये गड़बड़ी, इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation










