Nepal Floods में 95 लोगों की मौत, 133 भारतीय समेत करीब 500 लापता
तिब्बत की सीमा से लगे मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई और कम से कम 95 लोगों की मौत हो गई वहीं 133 भारतीय नागरिक समेत करीब 500 लोग लापता हैं। बाढ़ से शहरों और गांवों में तबाही हुई, पुल बह गए और कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय समयानुसार, सुबह करीब नौ बजे भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आई, जिससे तिब्बत की सीमा से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए।
रसुवा, काठमांडू से करीब 125 किलोमीटर उत्तरपूर्व में स्थित है। इसके बाद, बाढ़ का पानी धादिंग, नुवाकोट और चितवन जिलों तक फैल गया, जिससे कम से कम चार स्थायी पुल और कुछ अस्थायी पुल क्षतिग्रस्त हो गए। उपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर, नेपाल-तिब्बत सीमा के पास पहाड़ी चट्टानों के खिसकने से हुए हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आई।
यह स्थान तिब्बत-रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने बताया कि चट्टान खिसकने और नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित लेंडे नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण तिमुरे में भोटेकोशी के रास्ते भीषण बाढ़ का पानी और मलबा त्रिशूली नदी तक फैल गया। काठमांडू पोस्ट ने काठमांडू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और जलवायु शोधार्थी रिजन भक्त कायस्थ के हवाले से कहा कि लगभग उसी समय तिब्बत की तरफ भूकंप आया था।
अखबार के अनुसार, अमेरिकी भूगर्भ सर्वे ने बताया कि सुबह 8:37 बजे तिब्बत के इलाके में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया। यह स्थान गोसाईंकुंड से लगभग 47 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। एक अलग रिपोर्ट में, काठमांडू पोस्ट ने एनडीआरआरएमए के हवाले से बताया कि अब तक 95 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
बागमती प्रांत पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता राजेंद्र प्रसाद धमाला के अनुसार, प्रभावित इलाकों के अलग-अलग हिस्सों से कुल 93 लोगों को बचाया गया है। इनमें से 30 लोगों का इलाज काठमांडू के एक अस्पताल में चल रहा है। लापता हुए लगभग 400 लोगों में कम से कम 133 भारतीय और 37 प्रवासी भारतीय शामिल हैं।
इसके अलावा, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को बताया कि नेपाली सेना के 44 जवानों समेत 80 सुरक्षाकर्मी अलग-अलग जगहों पर लापता हैं। नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने दोपहर में ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘चीन से मिली जानकारी के मुताबिक, नदी का रास्ता अवरूद्ध होने वाली जगह पर बनी झील का पानी अभी पूरी तरह से नहीं निकला है, इसलिए भोटेकोशी और त्रिशूली इलाकों में खतरा बना हुआ है।’’ एनडीआरआरएमए ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भले ही उस जगह से झील का पानी पूरी तरह नहीं निकला है, जहां नदी का बहाव रुका हुआ है, फिर भी भोटेकोशी और त्रिशूली इलाकों में खतरा बना हुआ है। लोगों से अपील की जाती है कि वे नदी से दूर रहें और अगली अद्यतन सूचना मिलने तक सुरक्षित जगहों पर ही रहें।’’ सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे वीडियो में नेपाल-चीन सीमा पर स्थित रसुवागढ़ी में भारी पैमाने पर तबाही नजर आ रही है।
इस वीडियो में तेज बहाव के साथ एक विशाल लहर को दो मंजिला इमारत के ऊपर से गुजरते और अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को बहाते हुए देखा जा सकता है। कई लोगों को पहले पानी के आने की आवाज सुनकर भागते हुए देखा गया, लेकिन कुछ ही सेकेंड में वे अचानक आई बाढ़ के बाद जमा हुए कीचड़ और मलबे में दब गए। रसुवा जिले में आई भयावह बाढ़ के बाद लापता हुए 341 विदेशी पर्यटकों/तीर्थयात्रियों में 133 भारतीयों के अलावा 37 प्रवासी भारतीय भी शामिल हैं।
इनमें से ज़्यादातर भारतीय तिब्बत में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, कुल 341 यात्रियों में से 62 नेपाली नागरिक हैं जो लापता हैं। बोर्ड ने एक बयान में कहा कि बाकी पर्यटक अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड से हैं।
सम्राट टूर एंड ट्रैवल एजेंसी ने बताया कि भारतीयों में से कम से कम 59 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री हैं। काठमांडू में भारतीय दूतावास ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों से जुड़ी जानकारी और मदद के लिए हेलप्लाइन नंबर जारी किए। ‘एक्स’ पर एक और पोस्ट में कहा गया है कि भारत का दूतावास, बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों को बचाने और राहत पहुंचाने के लिए नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में बना हुआ है।
इसमें यह भी कहा गया है कि नेपाल सरकार के साथ मिलकर बचाव और राहत कार्यों को और मज़बूत किया जा रहा है। काठमांडू पोस्ट ने बताया कि भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने 42 किलोमीटर लंबी सड़क को बहा दिया। रसुवा के सहायक मुख्य जिला अधिकारी ध्रुव प्रसाद अधिकारी ने कहा कि बाढ़ भयावह थी और दो बस्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है।
रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने कहा कि सीमा शुल्क परिसर में रखे कई वाहन बह गए। हाल ही में बनाया गया एक पुल भी नष्ट हो गया। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल (आईपीपीएएन) के एक बयान के अनुसार, अचानक आई बाढ़ से नुवाकोट और रसुवा जिलों में कुल 354 मेगावाट क्षमता वाली आठ चालू जलविद्युत परियोजनाएं और पांच निर्माणाधीन परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं।
बाढ़ से क्षतिग्रस्त प्रमुख चालू जलविद्युत परियोजनाओं में रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना (111 मेगावाट), संजेन खोला जलविद्युत परियोजना (78 मेगावाट) और अपर त्रिशूली-3ए (60 मेगावाट) शामिल हैं। स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक के बाद नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को प्रभावित इलाकों में बचाव एवं राहत कार्यों के लिए तैनात किया गया। सेना के एक बयान के अनुसार, नेपाल की सेना ने अचानक आई बाढ़ के बाद खोज एवं बचाव अभियान चलाने के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए।
बयान में कहा गया कि नेपाल सेना ने त्रिशूली में सैन्य प्रशिक्षण केंद्र नंबर-1 में एक उपचार केंद्र भी स्थापित किया है, जहां सेना के चिकित्सा कर्मी प्रभावित लोगों को आपात चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। सेना के एक बयान के अनुसार, आपातकालीन चिकित्सा बचाव दल से लैस एमआई-17 हेलीकॉप्टर को त्रिशूली स्थित जिला अस्पताल की ओर भी भेजा गया। सुरक्षा बलों ने बाढ़ के कारण विभिन्न स्थानों पर फंसे 80 से अधिक लोगों को बचाया।
नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अबी नारायण काफ्ले के हवाले से स्थानीय मीडिया ने बताया कि तिमुरे स्थित क्षेत्र पुलिस कार्यालय, स्याफ्रूबेसी पुलिस चौकी और रसुवागढ़ी पुलिस चौकी भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने रसुवा और नुवाकोट जिलों में बाढ़ से हुई जनहानि और संपत्ति के नुकसान पर दुख जताया। पिछले साल भी भोटेकोशी में दो बार विनाशकारी बाढ़ आई थी जिनसे रसुवा में भारी तबाही हुई थी और कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी।
बच्चों की सुरक्षा से जुड़े आरोपों के निपटारे के लिए मेटा 16.68 अरब डॉलर तक का करेगी भुगतान, फेसबुक और इंस्टाग्राम में होंगे बड़े बदलाव
नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स ने अमेरिका के कई राज्यों द्वारा दायर उस बड़े मामले के निपटारे पर सहमति जताई है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि फेसबुक और इंस्टाग्राम को बच्चों और किशोरों के लिए लत लगाने वाला बनाया गया, प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर उपयोगकर्ताओं को गुमराह किया गया और नाबालिगों का व्यक्तिगत डेटा अनुचित तरीके से एकत्र किया गया। अदालती दस्तावेजों के अनुसार, इस समझौते के तहत मेटा 16.68 अरब डॉलर तक का भुगतान करेगी।
यह समझौता कैलिफोर्निया की एक संघीय अदालत में चल रहे मुकदमे के दौरान हुआ, जिसमें 29 अमेरिकी राज्यों ने मेटा के खिलाफ दावे किए थे। इस समझौते के साथ बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के प्रभाव से जुड़े सबसे चर्चित कानूनी मामलों में से एक का अंत हो गया है।
समझौते के तहत मेटा अमेरिका में फेसबुक और इंस्टाग्राम का उपयोग करने वाले किशोरों के लिए कई नए सुरक्षा उपाय लागू करेगी, जिनमें दैनिक उपयोग समय की सीमा निर्धारित करना और रात के समय प्लेटफॉर्म तक पहुंच पर प्रतिबंध जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
हालांकि मेटा ने समझौते के बावजूद किसी भी प्रकार की गलती या कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार करने से इनकार किया है।
समझौते की खबर सामने आने के बाद निवेशकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली और बाजार खुलने से पहले के कारोबार में मेटा के शेयर लगभग 4.4 प्रतिशत तक चढ़ गए।
मामले में आरोप लगाया गया था कि मेटा ने कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी के उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का उल्लंघन किया। राज्यों का यह भी दावा था कि कंपनी ने बाल ऑनलाइन गोपनीयता संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन करते हुए ऐसे उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिगत जानकारी एकत्र की, जिनके बारे में उसे पता था कि वे बच्चे हैं, लेकिन इस संबंध में अभिभावकों को न तो पर्याप्त सूचना दी गई और न ही उनकी अनुमति ली गई।
मुकदमे में यह आरोप भी शामिल था कि कंपनी ने बच्चों के डेटा का उपयोग मशीन लर्निंग और जनरेटिव एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए किया।
मेटा ने पूरे मामले के दौरान इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि उसने अपने मंचों पर युवा उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। कंपनी का यह भी तर्क था कि वह अपने मंचों को लत लगाने वाला बताकर उपभोक्ताओं को गुमराह नहीं कर सकती, क्योंकि सोशल मीडिया की लत को औपचारिक रूप से मनोरोग संबंधी स्थिति के रूप में मान्यता नहीं दी गई है।
मुकदमे की सुनवाई शुरू होने से पहले मेटा ने कहा था कि कुछ राज्य उस पर 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक के दंड की मांग कर रहे हैं, हालांकि राज्यों ने बाद में संकेत दिया था कि वास्तविक राशि लगभग 200 अरब डॉलर के करीब हो सकती है।
इसके अलावा, राज्य सरकारें अतिरिक्त मुआवजे और ऐसे न्यायिक आदेश भी चाहती थीं, जिनसे मेटा को अपने मंचों में बड़े बदलाव करने पड़ते और संभवतः बच्चों के लिए खाते बनाना भी कठिन हो सकता था।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया भर में बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर बहस तेज है।
मेटा के अलावा स्नैप, अल्फाबेट (यूट्यूब की मूल कंपनी) और बाइटडांस (टिकटॉक की मूल कंपनी) भी हजारों मुकदमों का सामना कर रही हैं। इन मामलों में आरोप लगाया गया है कि इन प्लेटफॉर्म्स को जानबूझकर ऐसे फीचर्स के साथ तैयार किया गया, जो बच्चों और किशोरों को लंबे समय तक स्क्रीन पर बनाए रखने और अत्यधिक उपयोग के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
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