IND vs SL 2nd Test : टीम इंडिया ने टी ब्रेक तक श्रीलंका के 216 पर चटकाए 7 विकेट, प्रसिद्ध कृष्णा और मानव सुथार ने बिखेरा जलवा
IND vs SL 2nd Test : भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में दूसरा टेस्ट मैच खेला जा रहा है. आज यानी 25 अगस्त (मंगलवार) को दोनों टीमों के बीच तीसरे दिन का खेल खेला जा रहा है. आज तीसरे दिन के दूसरे सेशन तक यानी चाय ब्रेक तक श्रीलंका क्रिकेट टीम अपनी पहली पारी में 65 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 216 रन बना चुकी है. जबकि भारतीय क्रिकेट टीम ने अपनी पहली पारी में 139 ओवर में 9 विकेट पर 503 रन बनाए थे. इस समय भारत से श्रीलंका की टीम 287 रन पीछे हैं.
Edged & taken!
— BCCI (@BCCI) August 25, 2026
Wicket No. 2⃣ for Manav Suthar! ????????
Vice-captain KL Rahul with the catch as Sri Lanka lose their 5th wicket! ???? ????
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पहले सेशन में भारत ने चटाए 2 विकेट
श्रीलंका क्रिकेट टीम ने अपनी पहली पारी में दूसरे दिन के अंत तक 3 ओवर में 8 ओवर में 2 विकेट गंवा दिए थे. इसके बाद आज तीसरे दिन श्रीलंका ने अपनी पारी की शुरुआत 8 रनों से आगे की. भारत के सामने श्रीलंका ने पहले सेशन में यानी लंच ब्रेक तक 32 ओवर में 4 विकेट पर 130 रन बनाए. इस पहले सेशन में कामिल मिशारा को 19 रन के निजी पर प्रसिद्ध कृष्णा ने चलता किया. वहीं धनंजया डी सिल्वा 4 रन बनाकर सुथार ने चलता किया. तीसरे सेशन के अंत तक टीम के लिए पसिंदु सोरियाबंदरा 65 और कामिंडु मेंडिस को 32 रनों के निजी स्कोर नाबाद पवेलियन लौटे.
Lunch on Day 3 in Colombo!
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Two wickets in the morning session for #TeamIndia ????
Sri Lanka 130/4, trail by 373 more runs
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दूसरे सेशन में मिली भारत को बड़ी सफलताएं
भारत के लिए दूसरे सेशन में प्रसिद्ध कृष्णा ने कामिंडु मेंडिस को 32 रनों के निजी स्कोर पर कृष्णा ने अपना तीसरा शिकार बनाया. इसके बाद रविंद्र जडेजा ने पसिंदु सोरियाबंदरा को बोल्ड कर दिया. उन्होंने टीम के लिए 133 बॉल में 9 चौकों की मदद से 80 रनों की पारी खेली. वो अब तक टीम के टॉप रन स्कोरर हैं.
Ravindra Jadeja strikes! ????
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His first wicket of the match as Sri Lanka lose Pasindu Sooriyabandara ????
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उनके बाद निरोशन डिकवेला शून्य के स्कोर पर मोहम्मद सिराज का शिकार बने. श्रीलंका ने दूसरे सेशन के अंत कर 55 ओवर में 7 विकेट पर 180 रन बना लिए हैं. उनके लिए इस समय सोनल दिनुशा 52 और केशर नुवांथा 13 रन बनाकर नाबाद बने हुए हैं. अब भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे इस मैच में भारतीय गेंदबाज तीसरे सेशन में श्रीलंका को जल्द से जल्द समेटने के लिए उतरेंगे.
Sri Lanka 7 down!
— BCCI (@BCCI) August 25, 2026
Mohammed Siraj joins the wicket-taking party! ???? ????
Dhruv Jurel takes the catch. ???? ????
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भारत के लिए इस मैच में ध्रुव जुरेल और देवदत्त पडिक्कल ने शतक लगाए. वहीं शुभमन गिल (50) और ऋषभ पंत (63) ने अर्धशतक लगाए. टीम के लिए जुरेल ने दूसरे दिन 177 बॉल में 9 चौके और 2 छक्कों के साथ 115 रनों की नाबाद पारी खेली. वहीं पडिक्कल ने 193 बॉल में 12 चौकों के साथ 117 रन बनाए. इन खिलाड़ियों के अलावा यशस्वी जायसवाल ने 45 रनों की पारी खेली. रविंद्र जडेजा ने 43 रनों का योगदान दिया और मानव सुथार व केएल राहुल के बल्ले से 18-18 रन निकले.
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जंग और मिसाइलों को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा ऐलान, जानकर दुश्मन के भी उड़ जाएंगे होश
भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीक घरेलू उद्योग को ट्रांसफर करने की मंजूरी दे दी है. इस फैसले के बाद भारतीय कंपनियों के लिए देश में ही इन मिसाइल प्रणालियों का उत्पादन करने का रास्ता खुल सकता है. रक्षा मंत्री नें ऐलान किया है कि जंग कोई भी हो देश के पास मिसाइलों की कभी कमी नहीं होगी. रक्षा मंत्री का बयान ऐसे वक्त आया है जब पाकिस्तान और PoK के बीच हालात सामान्य नहीं हैं.
अब तक ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल मुख्य रूप से सरकारी रक्षा संस्थानों और अधिकृत प्रतिष्ठानों तक सीमित रहा है. तकनीक के हस्तांतरण से निजी क्षेत्र की कंपनियां भी निर्धारित नियमों और जरूरी मानकों को पूरा करने के बाद उत्पादन प्रक्रिया में भाग ले सकेंगी.
In a significant step towards achieving the vision of Aatmanirbharta in defence, Raksha Mantri Shri @rajnathsingh has approved the transfer of DRDO-developed technologies of all conventional missile systems to Indian industries for production within the country. This Transfer of…
— रक्षा मंत्री कार्यालय/ RMO India (@DefenceMinIndia) August 25, 2026
रक्षा उत्पादन में निजी कंपनियों की बड़ी भूमिका
सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा असर रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी पर पड़ने की उम्मीद है. तकनीक मिलने के बाद पात्र भारतीय कंपनियां मिसाइल प्रणालियों के निर्माण में आगे आ सकेंगी.
हालांकि, किसी भी कंपनी को सीधे उत्पादन की अनुमति नहीं मिलेगी. इसके लिए संबंधित तकनीकी योग्यताओं, प्रमाणपत्रों और नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करना जरूरी होगा. यानी गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा.
DRDO की भूमिका में भी बदलाव
इस पहल के जरिए DRDO को केवल मिसाइलों के विकास तक सीमित रखने के बजाय विकसित तकनीक को उद्योग तक पहुंचाने पर अधिक जोर दिया जा रहा है. इसका उद्देश्य प्रयोगशाला में तैयार तकनीक को बड़े पैमाने पर औद्योगिक उत्पादन में बदलना है.
घरेलू उद्योग की उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल होने से रक्षा क्षेत्र में रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग के बीच की दूरी कम हो सकती है. इससे नई तकनीकों को तेजी से उत्पादन के स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
रक्षा मंत्री के एक कदम से होने वाले फायदे
1. MSME को मिलेंगे नए अवसर
रक्षा क्षेत्र में केवल बड़ी कंपनियों को ही फायदा मिलने की संभावना नहीं है. MSME और अन्य तकनीकी साझेदार भी मिसाइल निर्माण की सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकते हैं.
मिसाइल प्रणाली के निर्माण में कई तरह के कंपोनेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, मैकेनिकल पार्ट्स और अन्य तकनीकी उत्पादों की जरूरत होती है. ऐसे में छोटे और मझोले उद्योगों के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं.
इसके साथ ही रक्षा विनिर्माण से जुड़े क्षेत्रों में कुशल कर्मचारियों की मांग बढ़ने से रोजगार और कौशल विकास को भी बढ़ावा मिल सकता है.
2. विदेशों पर निर्भरता घटाने की कोशिश
भारत के रक्षा क्षेत्र के सामने लंबे समय से हथियारों और तकनीक के आयात पर निर्भरता कम करने की चुनौती रही है. सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति का एक प्रमुख लक्ष्य देश के भीतर रक्षा उत्पादन की क्षमता बढ़ाना है.
DRDO की विकसित मिसाइल तकनीक भारतीय उद्योग को उपलब्ध होने से घरेलू उत्पादन बढ़ सकता है. इससे भविष्य में कुछ रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी.
3. आपात स्थिति में भी होगा फायदा
देश में महत्वपूर्ण हथियार प्रणालियों का उत्पादन होने का एक बड़ा फायदा यह होगा कि आपातकालीन परिस्थितियों में सप्लाई को तेजी से बढ़ाया जा सकेगा. विदेशी सप्लाई चेन में किसी तरह की बाधा आने पर घरेलू उत्पादन क्षमता रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.
इसके अलावा स्थानीय उत्पादन से विदेशी मुद्रा की बचत और रक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक औद्योगिक क्षमता विकसित करने में भी मदद मिल सकती है.
4. नवाचार और प्रतिस्पर्धा को मिलेगा बढ़ावा
निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने से रक्षा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलने की संभावना है. अलग-अलग कंपनियां बेहतर उत्पादन तकनीक, लागत प्रभावी समाधान और नई क्षमताओं के विकास पर काम कर सकती हैं.
इससे भारतीय रक्षा उद्योग केवल घरेलू जरूरतें पूरी करने तक सीमित न रहकर भविष्य में वैश्विक बाजार में भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर सकता है.
5. निर्यात की दिशा में भी खुल सकता है रास्ता
यदि घरेलू कंपनियां गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मिसाइल प्रणालियों का उत्पादन करने में सक्षम होती हैं, तो लंबे समय में भारत के रक्षा निर्यात को भी बढ़ावा मिल सकता है. हालांकि, इसके लिए सरकार की मंजूरी, निर्यात नियमों और अन्य सुरक्षा प्रावधानों का पालन करना जरूरी होगा.
6. आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग की ओर बड़ा कदम
राजनाथ सिंह की मंजूरी को भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है. DRDO की तकनीक को घरेलू उद्योग तक पहुंचाने से रिसर्च, उत्पादन, MSME और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल बनने की संभावना है.
भारत के सामने क्या है असली चुनौती
अब भारत के सामने असली चुनौती यह होगी कि भारतीय कंपनियां इस तकनीकी अवसर का कितनी तेजी से और प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करती हैं.
अगर उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और सप्लाई चेन को मजबूत किया गया, तो यह फैसला आने वाले वर्षों में भारत को रक्षा क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वैश्विक रक्षा बाजार में उसकी भूमिका बढ़ाने में भी मदद कर सकता है. अब सारा दारोमदार भारतीय कंपनियों और डीआरडीओ के समन्वय पर निर्भर है. हालांकि रक्षा मंत्री का बड़ा ऐलान दुमश्नों के होश उड़ाने के लिए काफी है.
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