फिजिकल हेल्थ- एक्ट्रेस जैस्मिन भसीन को हुआ कनकशन:डॉक्टर से जानें ये क्या है, क्यों होता है, लक्षण और बचाव के लिए जरूरी सावधानियां
हाल ही में टीवी एक्ट्रेस जैस्मिन भसीन ने बताया कि 'खतरों के खिलाड़ी 15' के एक स्टंट के बाद कुछ समय के लिए उनकी याददाश्त चली गई थी। टेस्ट में उन्हें ‘माइल्ड कनकशन’ डायग्नोज हुआ। यह एक प्रकार की ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी (TBI) है, जो सिर पर चोट या तेज झटके के बाद हो सकती है। इससे कुछ समय के लिए ब्रेन की नॉर्मल फंक्शनिंग प्रभावित हो सकती है। कनकशन खेल, सड़क दुर्घटना या किसी अन्य हादसे के बाद भी हो सकता है। ऐसे में इसके संकेतों और रिस्क को समझना जरूरी है। इसलिए आज 'फिजिकल हेल्थ' में कनकशन के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. उत्कर्ष भगत, सीनियर कंसल्टेंट, डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम सवाल- कनकशन क्या होता है? जवाब- यह एक ब्रेन इंजरी है। इसमें सिर पर चोट या अचानक तेज झटका लगने के बाद ब्रेन पर प्रेशर पड़ता है। इससे ब्रेन कुछ समय के लिए सामान्य तरीके से काम नहीं कर पाता। सवाल- कनकशन कैसे होता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- ग्राफिक में इसके सभी कारण देखिए- सवाल- क्या सिर में कोई भी चोट लगे तो कनकशन हो जाता है? जवाब- नहीं, कई बार चोट सिर्फ बाहरी हिस्से तक सीमित रहती है। इसमें सिर्फ मामूली सूजन, कट या दर्द होता है। कनकशन तभी होता है, जब चोट या झटके का असर ब्रेन पर पड़े। डॉक्टर चोट के बाद दिखने वाले लक्षणों और जांच के आधार पर कनकशन की पहचान करते हैं। सवाल- किन्हें कनकशन का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- कनकशन किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- जो लोग किसी खास मेडिकेशन पर हैं, क्या उनमें इसका रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- हां, ऐसे लागों में सिर की चोट के बाद गंभीर कॉम्प्लिकेशन्स का रिस्क ज्यादा होता है। पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- कनकशन के सामान्य लक्षण क्या हैं? जवाब- कनकशन के लक्षण चोट लगने के तुरंत बाद दिख सकते हैं, लेकिन कुछ लोगों में ये कई घंटे या कई दिनों बाद भी नजर आ सकते हैं। इसके लक्षण शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक हो सकते हैं। ग्राफिक में सभी लक्षण देखिए- सवाल- क्या बच्चों में कनकशन के अलग लक्षण होते हैं? जवाब- हां, छोटे बच्चों में कनकशन के लक्षण वयस्कों से कुछ अलग हो सकते हैं। कई बार बच्चे अपनी परेशानी ठीक से बता नहीं पाते, इसलिए उनके व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है। इनमें ये बदलाव शामिल हैं- सवाल- कौन से लक्षण इमरजेंसी हैं? जवाब- कनकशन के ये लक्षण इमरजेंसी के संकेत हैं- सवाल- कनकशन डायग्नोस कैसे होता है? जवाब- कनकशन का कोई एक खास टेस्ट नहीं है। डॉक्टर आमतौर पर लक्षणों, इंजरी हिस्ट्री और न्यूरोलॉजिकल चेकअप के आधार पर इसका पता लगाते हैं। इसके लिए- सवाल- सिर में चोट लगे तो तुरंत क्या करना चाहिए? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- कनकशन होने पर कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए? जवाब- कनकशन के बाद पहले 1-2 दिन तक ऐसी एक्टिविटीज से बचें, जिनमें ज्यादा फोकस की जरूरत पड़ती है। ये एक्टिविटीज लक्षणों को बढ़ा सकती हैं और रिकवरी को धीमा कर सकती हैं। ग्राफिक में देखिए- सवाल- कनकशन से और क्या जटिलताएं हो सकती हैं? जवाब- कनकशन के बाद कुछ मामलों में गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं, जैसेकि- अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह ठीक हुए बिना दोबारा खेलकूद या अन्य रिस्की एक्टिविटीज करता है, तो उसे गंभीर कनकशन हो सकता है। इसे ‘सेकेंड-इम्पैक्ट सिंड्रोम’ कहते हैं। इससे ब्रेन में गंभीर सूजन या ब्लीडिंग का रिस्क बढ़ता है और रेयर मामलों में यह जानलेवा भी हो सकता है। सवाल- पोस्ट-कनकशन सिंड्रोम क्या है? जवाब- ज्यादातर लोगों में कनकशन के लक्षण कुछ दिनों या हफ्तों में ठीक हो जाते हैं। लेकिन कुछ लोगों में सिरदर्द, चक्कर, थकान, फोकस में परेशानी, याददाश्त की समस्या या नींद से जुड़ी दिक्कतें लंबे समय तक बनी रह सकती हैं। जब ये लक्षण कनकशन के बाद कई हफ्तों या महीनों तक बने रहते हैं, तो इस स्थिति को ‘पोस्ट-कनकशन सिंड्रोम’ कहते हैं। सवाल- क्या कनकशन के बाद डिप्रेशन हो सकता है? जवाब- हां, कुछ मामलों में डिप्रेशन हो सकता है। इसलिए अगर उदासी, चिंता या व्यवहार में बदलाव लगातार बने रहें तो डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए। सवाल- कनकशन से बचाव के लिए क्या करें? जवाब- कनकशन का रिस्क पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन कुछ सावधानियां अपनाकर रिस्क को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए- ……………………….. ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- दिल्ली में 8 गुना बढ़े H1N1 के केस:इन 7 लक्षणों को इग्नोर न करें, डॉक्टर से जानें बचाव के लिए जरूरी सावधानियां दिल्ली में स्वाइन फ्लू (H1N1) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 20 अगस्त तक इसके 1,777 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। पिछले साल इस समय तक यह संख्या सिर्फ 229 थी। यानी एक साल में मामलों की संख्या करीब 8 गुना हो गई है। पूरी खबर पढ़ें…
जरूरत की खबर- बारिश में दूषित हो सकता है पानी:हो सकते हैं गंभीर हेल्थ रिस्क, एक्सपर्ट से जानें वाटर टैंक क्लीनिंग का सही तरीका
बारिश के मौसम में जल प्रदूषण का रिस्क बढ़ जाता है। कई बार पानी देखने में साफ लगता है, लेकिन उसमें बैक्टीरिया, वायरस और दूसरे हानिकारक सूक्ष्मजीव मौजूद होते हैं। सीवर लीकेज और जलभराव के कारण यह रिस्क बढ़ता है। वही वाटर सप्लाई हमारे घरों में होती है। पानी की टंकी में, अंडर वाटर टैंक में वही पानी इकट्ठा होता है। ऐसे में अगर वाटर टैंक की नियमित सफाई न हो या RO के फिल्टर समय पर बदले न जाएं तो वो दूषित पानी हमारे शरीर में पहुंच सकता है। इसे पीने से डायरिया, टाइफाइड और पीलिया जैसी बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में मानसून में पानी की टंकी और RO की सफाई पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. अरविंद अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- बारिश के मौसम में पानी की टंकी और RO की सफाई पर जोर क्यों दिया जाता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या मानसून में पानी जल्दी दूषित होता है? जवाब- हां, बारिश के दौरान मिट्टी, गंदगी और सीवेज का पानी वाटर सोर्स तक पहुंच जाता है। पाइपलाइन में लीकेज होने से सप्लाई में गंदा पानी मिल सकता है। इसके अलावा नमी की वजह से बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ते हैं, जिससे पानी जल्दी दूषित होता है। सवाल- क्या सिर्फ पुराने घरों में यह समस्या होती है? जवाब- नहीं, अगर रेगुलर टंकी की सफाई न हो या समय पर RO की सर्विसिंग न हो तो यह समस्या नए घरों में भी हो सकती है। सवाल- गंदी RO मशीन के इस्तेमाल से क्या नुकसान हो सकता है? जवाब- इससे बैक्टीरिया और फंगस पनप सकते हैं। ऐसी स्थिति में मशीन पानी को पूरी तरह फिल्टर नहीं कर पाती। लंबे समय तक ये दूषित पानी पीने से डाइजेस्टिव इश्यूज हो सकते हैं। सवाल- दूषित पानी पीने से किन बीमारियाें का रिस्क होता है? जवाब- दूषित पानी कई संक्रामक बीमारियों का कारण बन सकता है। इसका असर सबसे पहले डाइजेस्टिव सिस्टम पर पड़ता है और कई बार गंभीर इन्फेक्शन भी हो सकता है। सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- किन लोगों को रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- दूषित पानी सभी के लिए नुकसानदायक है, लेकिन कुछ लोगोें के लिए ये ज्यादा रिस्की होता है, जैसेकि- सवाल- क्या दूषित पानी के इस्तेमाल से स्किन प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं? जवाब- हां, दूषित पानी के इस्तेमाल से खुजली, रैशेज, फंगल इन्फेक्शन और बाल झड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सेंसिटिव स्किन वाले लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है। सवाल- पानी की टंकी कितने दिनों में साफ करनी चाहिए? जवाब- आमतौर पर घर की पानी की टंकी हर 3-6 महीने में साफ करानी चाहिए। अगर पानी में स्मेल, रंग या गंदगी नजर आए तो तुरंत सफाई करवाना बेहतर है। सवाल- कैसे जानें कि अब वाटर टैंक साफ करने की जरूरत है? जवाब- अगर पानी का रंग, स्वाद या स्मेल बदल जाए तो यह टंकी में गंदगी जमा होने का संकेत है। सभी संकेत ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या वाटर टैंक खुला रहने से रिस्क बढ़ता है? जवाब- हां, टंकी खुली रहने से उसमें धूल, कीड़े, मच्छर और बारिश का गंदा पानी पहुंचता है। इससे बैक्टीरिया पनप सकते हैं। इसलिए टंकी हमेशा पूरी तरह ढककर रखें। सवाल- क्या खुद से पानी की टंकी साफ कर सकते हैं? जवाब- छोटी टंकियों की बेसिक सफाई की जा सकती है। लेकिन बड़ी या ऊंचाई वाली टंकियों की सफाई हमेशा प्रोफेशनल्स से कराना चाहिए। सवाल- वाटर टैंक साफ करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- सफाई से पहले टंकी पूरी तरह खाली करें। साफ ब्रश और सेफ डिसइन्फेक्टेंट का यूज करें। सफाई के बाद टंकी को अच्छी तरह धोएं। सभी जरूरी सावधानियां ग्राफिक में देखिए- सवाल- RO का फिल्टर कितने दिनों में बदलना चाहिए? जवाब- RO के अलग-अलग फिल्टर की लाइफ अलग होती है। आमतौर पर इन्हें इस तरह बदला जाता है- सेडिमेंट (प्री) फिल्टर: हर 3-6 महीने में। कार्बन फिल्टर: हर 6-12 महीने में। पोस्ट-कार्बन फिल्टर: हर 12 महीने में। RO मेम्ब्रेन: हर 1-2 साल में। ध्यान दें, पानी में TDS का लेवल ज्यादा हो तो फिल्टर जल्दी बदलने पड़ सकते हैं। पानी का स्वाद, स्मेल या फ्लो बदलने लगे तो फिल्टर चेक कराना चाहिए। सवाल- RO खराब या गंदा होने के संकेत क्या हैं? जवाब- RO मशीन खराब या गंदा होने के संकेत ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या सिर्फ फिल्टर बदलना काफी है? जवाब- नहीं, RO के फिल्टर के साथ मशीन, पाइप और स्टोरेज टैंक की सफाई भी जरूरी है। सवाल- क्या RO का पानी हमेशा 100% सुरक्षित होता है? जवाब- नहीं, RO तभी सुरक्षित पानी देता है, जब उसकी रेगुलर सर्विसिंग और सफाई हो। खराब या पुराने फिल्टर होने पर पानी दूषित हो सकता है। सवाल- मानसून में पानी को साफ और सुरक्षित रखने के लिए क्या करें? जवाब- मानसून में टंकी और RO की रेगुलर सफाई के साथ पाइपलाइन की जांच भी जरूरी है। सेफ वाटर के लिए ग्राफिक में दी गई कुछ बातें ध्यान रखें- सवाल- घर में पानी की क्वालिटी कैसे जांचें? जवाब- घर में पानी की क्वालिटी चेक करने के लिए ये तरीके अपनाए जा सकते हैं- सवाल- क्या RO के साथ UV (अल्ट्रावायलेट) या UF (अल्ट्राफिल्ट्रेशन) सिस्टम भी जरूरी है? जवाब- यह पानी की क्वालिटी और उसमें मौजूद टॉक्सिन्स पर निर्भर करता है, जैसेकि- सवाल- क्या RO होने पर टंकी साफ करने की जरूरत नहीं होती? जवाब- RO पानी को साफ करता है, लेकिन पानी की टंकी को साफ नहीं करता। टंकी में समय के साथ धूल, मिट्टी, जंग, शैवाल और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं। RO का फिल्टर इन गंदगियों को टंकी में पहुंचने से नहीं रोकता। इसलिए RO लगा होने के बावजूद टंकी की नियमित सफाई जरूरी है। सवाल- क्या सिर्फ सोसायटी की टंकी साफ होना काफी है? जवाब- नहीं, घर की टंकी, पाइपलाइन और RO सिस्टम की सफाई भी उतनी ही जरूरी है। सवाल- किन घरों में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- …………………. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- बारिश में कपड़ों से आती स्मेल: हो सकती है स्किन एलर्जी, एक्सपर्ट से जानें- बैड स्मेल कैसे भगाएं, कपड़े कैसे रखें फ्रेश बारिश के मौसम में कपड़े ठीक से नहीं सूखते हैं। धूप की कमी और हवा में ज्यादा नमी की वजह से कपड़ों से अजीब स्मेल आने लगती है। कई बार अलमारी में रखे कपड़ों से भी सीलन की स्मेल आती है। पूरी खबर पढ़ें…
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