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हथकड़ी के बाद पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट से ब्रायडन कार्स को किया गया बाहर, नाइटक्लब विवाद में फंसा इंग्लैंड का स्टार बॉलर

Brydon Carse Night Club: इंग्लैंड के एक क्रिकेटर का एक बार फिर नाइट क्लब विवाद सामने आया है. शनिवार की रात डर्बी में एक नाइटक्लब के बाहर इंग्लैंड के 31 वर्षीय तेज गेंदबाज ब्रायडन कार्स को हथकड़ी पहने देखा गया, जिसके बाद इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने मामले की जांच शुरू कर दी है. अब बोर्ड ने इस घटना के बाद कार्स को पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट से हटा दिया है और अब क्रिकेट रेगुलेटर पूरे मामले की जांच कर रहा है. ब्रायडन कार्स की जगह 23 वर्षीय तेज गेंदबाज सॉनी बेकर को पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट के लिए इंग्लैंड के स्क्वाड में शामिल किया गया है. 

पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट से ब्रायडन कार्स को किया गया बाहर

नाइटक्लब विवाद के बाद पाकिस्तान के खिलाफ 27 अगस्त से खेले जाने वाले दूसरे टेस्ट मैच से गेंदबाज ब्रायडन कार्स को इंग्लैंड के स्क्वाड से बाहर कर दिया गया है. उनकी जगह सॉनी बेकर को इंग्लैंड के स्क्वाड में शामिल किया गया है. सॉनी बेकर एक दाएं हाथ के तेज गेंदबाज हैं. वह अपनी तेज रफ्तार के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने इसी साल 17 जून को न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने टेस्ट डेब्यू किया था. 

नाइट क्लब के बाहर हाथों में हथकड़ी के साथ दिखे थे ब्रायडन कार्स

शनिवार रात एक नाइट क्लब के बाहर कहासुनी के बाद इंग्लैंड के तेज गेंदबाज ब्रायडन कार्स को पुलिस ने हाथों में हथकड़ी लगाई थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. इस वीडियो में कार्स को नाइटक्लब के बाहर पुलिस अधिकारियों से घिरे हुए देखा जा सकता है. वीडियो में इंग्लैंड के उनके साथी खिलाड़ी मैथ्यू पॉट्स और पूर्व कप्तान बेन स्टोक्स भी दिखाई दे रहे हैं. हालांकि उन पर कोई आपराधिक आरोप नहीं लगा है, लेकिन इस घटना के बाद कार्स को पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच से बाहर कर दिया गया है.

पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे मैच के लिए इंग्लैंड के स्क्वाड में हुए थे शामिल

ब्रायडन कार्स को पाकिस्तान के खिलाफ हेडिंग्ले में में खेले गए पहले टेस्ट मैच के लिए इंग्लैंड के स्क्वाड में नहीं चुना गया था. दरअसल ECB ने उन्हें काउंटी चैंपियनशिप में डरहम के लिए खेलने की इजाजत दे दी थी. हालांकि उन्हें पाकिस्तान के खिलाफ लॉर्ड्स में होने वाले दूसरे टेस्ट के लिए इंग्लैंड की टीम का हिस्सा बनाया गया, लेकिन अब विवाद के बाद उन्हें दूसरे टेस्ट से बाहर कर दिया गया है. वीडियो आने के बाद ECB के एक प्रवक्ता ने कहा था, "हमें डर्बी में कल रात हुई एक घटना के बारे में पता चला है और हम अभी इसकी जांच कर रहे हैं. जैसे ही संभव होगा, हम आगे की जानकारी देंगे." अब उन्हें बाहर कर दिया गया है. 

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Explainer: इथेनॉल, जमाखोरी, फसल खराब... आखिर चीनी पर क्यों फूटा महंगाई बम? ये हैं असली कारण

Why Sugar Prices Hike: देश में इन दिनों हर ओर चीनी महंगी होने की चर्चा है. चाय की टपरी से लेकर घर और होटलों की किचन तक चीनी पर खींचतान मची हुई है. यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी हर क्रिएटर चीनी को लेकर कंटेट बना रहा है. त्योहारी सीजन से पहले दाम बढ़ने से यह चर्चा आग की तरह तेज हो गई. कोई कहता है कि चीनी के दाम बढ़ने की वजह इथेनॉल है, तो कोई कहता है कि जमाखोरी तो कोई खराब फसल को जिम्मेदार मान रहा है. आखिर में चीनी के दाम बढ़ने की असली वजह क्या है आइए विस्तार से समझते हैं. 

देश में चीनी की खुदरा कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बाद यह मुद्दा चर्चा में है. कई जगहों पर चीनी के दाम 55 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं. बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने करीब 10 साल बाद 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है. इस फैसले का मकसद घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है.

दाम बढ़ने के पीछे सरकार का रुख?

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार ने एथेनॉल को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है. सरकार के मुताबिक खुदरा कीमतें बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो पहुंचने के पीछे खराब मौसम से गन्ने की फसल को हुआ नुकसान, घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई की कमी जैसे कारण हैं. 

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सरकार के आंकड़ों के अनुसार, एथेनॉल बनाने के लिए चीनी का डायवर्जन 2022-23 के 12% से घटकर 2025-26 में 9% रह गया है, जबकि करीब तीन-चौथाई एथेनॉल अब मक्का जैसे अनाजों से बन रहा है. गन्ने का उत्पादन भी अनुमानित 343 लाख मीट्रिक टन से घटकर करीब 306 लाख मीट्रिक टन रह गया. कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने के साथ डीलरों और बड़े थोक खरीदारों के लिए स्टॉक सीमा भी लागू की है.

शुगर मिल्स एसोसिएशन आया सामने

देश में बढ़ती चीनी की कीमतों के बीच इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने सोमवार को बयान जारी किया. कहा कि बाजार में चीनी की कोई कमी नहीं है. ISMA के प्रेसिडेंट नीरज शिरगांवकर के मुताबिक देश में उत्पादन और उपलब्ध स्टॉक की स्थिति सामान्य है. उन्होंने कहा कि मौजूदा समस्या सप्लाई की नहीं, बल्कि त्योहारी सीजन से पहले बाजार में बनी धारणा की है. इस स्थिति को संभालने के लिए कुछ अस्थायी और सोच-समझकर कदम उठाए जा रहे हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चीनी की सप्लाई को लेकर कोई बड़ी या स्थायी समस्या नहीं है और देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.

सरकार ने क्या कदम उठाए?

त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. 20 अगस्त 2026 को 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी गई है, ताकि घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाई जा सके और जमाखोरी पर रोक लग सके. इसके साथ ही बड़े थोक खरीदारों और डीलरों के लिए चीनी का स्टॉक घटाकर 15 दिन की खपत तक कर दिया गया है.

देश में चीनी का कितना स्टॉक बचा?

देश में चीनी के स्टॉक को लेकर इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने स्थिति साफ की है. ISMA के प्रेसिडेंट नीरज शिरगांवकर के मुताबिक 1 अगस्त तक देश में करीब साढ़े तीन महीने की जरूरत के बराबर चीनी का स्टॉक मौजूद था. ऐसे में अगस्त में सप्लाई को लेकर चिंता की कोई वजह नहीं है. उन्होंने बताया कि सितंबर-अक्टूबर में त्योहारी सीजन के दौरान मांग बढ़ने से पहले सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है. 

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उनके मुताबिक यह फैसला किसी कमी को दूर करने के लिए नहीं, बल्कि पहले से एहतियात के तौर पर लिया गया है. शुल्क-मुक्त आयात से बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आएगी, अनुमानित क्लोजिंग स्टॉक में करीब 25-29% की बढ़ोतरी होगी और कीमतों में बनी अटकलों को कम करने में मदद मिलेगी.

खराब मौसम, गन्ने की कम पैदावार बनी कारण?

ISMA ने बताया कि चीनी की खुदरा कीमतों में जुलाई के मुकाबले इस महीने करीब 16% की बढ़ोतरी हुई है. नीरज शिरगांवकर के मुताबिक जुलाई में चीनी करीब 48 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, जो अब बढ़कर 55-56 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि यह तेजी चीनी की कमी की वजह से नहीं है, बल्कि कई कारणों का एक साथ असर है. इस सीजन में घरेलू चीनी उत्पादन शुरुआती अनुमान से कम रहा और संशोधित अनुमान करीब 309 लाख टन किया गया है.

इसके पीछे खराब मौसम, गन्ने की कम पैदावार और कम रिकवरी प्रमुख वजहें हैं. महाराष्ट्र में ज्यादा क्रशिंग रेट और उत्तर प्रदेश में रेड रॉट बीमारी से प्रभावित गन्ने की किस्मों की समस्या का भी उत्पादन पर असर पड़ा. इसके अलावा त्योहारी सीजन शुरू होने से बाजार में चीनी की मांग भी बढ़ी है, जिसका असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है.

कमी का ब्राजील कनेक्शन

जानकारी के अनुसार, दुनिया भर में, ब्राजील में चीनी का उत्पादन कम होने के अनुमान से सप्लाई कम हुई है. अंतरराष्ट्रीय कीमतें जून में लगभग 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर अगस्त में लगभग 552 डॉलर प्रति टन हो गई हैं. 

जमाखोरी का कितना असर?

ISMA के प्रेसिडेंट नीरज शिरगांवकर के मुताबिक चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह बाजार में चल रही अटकलें हैं. पिछले कुछ हफ्तों से कई बड़े खरीदार जरूरत के हिसाब से खरीदारी करने के बजाय पहले से ही चीनी का स्टॉक जमा कर रहे हैं. करीब डेढ़ से दो महीने पहले से बड़े पैमाने पर खरीदारी होने के कारण चीनी का कुछ हिस्सा बाजार से हटकर गोदामों में चला गया. इससे बाजार में उपलब्ध चीनी कम नजर आने लगी और कृत्रिम कमी जैसी स्थिति बन गई। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि देश में वास्तव में चीनी की कमी है.

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