भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने एक ही दिन में एक ऐसा तहलका मचा दिया जिससे चार देशों की असली हैसियत पूरी दुनिया के सामने आ गई। पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी। इनका इस्लामिक नाटो और बांग्लादेश जो इनके नक्शे कदम पर है। इन चारों देशों को विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने एक ही दिन में एक ही बयान से ऐसा धोया कि इनकी सारी चालबाजी, सारी साजिश हवा में उड़ गई। कुछ कहने से पहले ही इनके एक्सप्रेशनंस ने वो काम कर दिया कि पूरा हॉल और सोशल मीडिया हिल गया। दरअसल बता दें कि पाकिस्तान और तुर्की ने सऊदी अरब के साथ मिलकर मक्का डिफेंस एग्रीमेंट साइन किया है। जिसके तहत एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इस डिफेंस एग्रीमेंट को बढ़ाने की तैयारी हो रही है ताकि यह भारत और इजराइल के खिलाफ इस्लामिक नाटो में बदल जाए। अब इस तिगड़ी में शामिल होने के लिए बांग्लादेश ने भी अपनी इच्छा जता दी।
इसी कड़ी में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने पाकिस्तान और तुर्की को सबसे पहले आईना दिखाया और फिर उसके बाद बांग्लादेश को भी निपटाया। दरअसल डॉ एस जयशंकर से यह सवाल पूछा गया कि पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब ने मक्का पैक्ट साइन कर लिया है। इसका भारत पर क्या असर पड़ने वाला है? अब इस सवाल का जवाब देते हुए डॉक्टर एस जयशंकर ने कहा कि तीनों देशों के सामने मौजूदा समय में सैन्य परिस्थितियां बनी हुई है। एस जयशंकर के कहने का मतलब है कि तीनों देश मौजूदा समय में किसी दूसरे देश से पिट रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि मक्का समझौते ने इन हालात से निपटने के लिए इन तीनों देशों के लिए अभी तक क्या किया? मक्का एग्रीमेंट पर डॉ एस जय शंकर ने कहा कि जब खुद के घर शीशे के हो तो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंके जाते। एस जयशंकर साहब ने सीधे इन तीनों की धज्जियां उड़ाते हुए यह भी कहा कि जिस डिफेंस पैक्ट की तुम ढींगे हाक रहे हो, उसने तुम्हारी सुरक्षा के लिए जमीन पर क्या उखाड़ लिया।
पाकिस्तान को बलूचिस्तान और अफगानिस्तान में इस समय ये लोग धो रहे हैं। तुर्की के अड्डों पर इजराइल का खौफ मंडरा रहा है और वहीं सऊदी अरब को यमन के जो हुती रिबेल्स हैं ये आए दिन धूल चटा रहे हैं। जब खुद ही चारों खाने चित पड़े हैं तो ये इस्लामिक नाटो सिर्फ कागज का खिलौना बनकर रह गए हैं। जैसे ही बात बांग्लादेश और वहां की अस्थिरता पर आई तो डॉक्टर जयशंकर साहब ने बिना किसी लाग लपेट के दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। बांग्लादेश जो पाकिस्तान और तुर्की की राह पर चलकर भारत को आंख दिखाने की भूल कर रहा था उसे विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने इसी बयान से गहरी नींद से जगा दिया।
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बलूचिस्तान के अलग-अलग इलाकों - जैसे मस्तुंग, चमन और सोहबतपुर - से पांच शव बरामद किए गए हैं। मस्तुंग ज़िले के खाद कोचा इलाके में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि ऐसा लगता है कि सड़क के किनारे शव को फेंकने से पहले उस व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शव को पहले पहचान और कानूनी औपचारिकताओं के लिए शहीद नवाब गौस बख्श रायसानी अस्पताल ले जाया गया और बाद में क्वेटा भेज दिया गया। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अलग घटना में चमन इलाके से भी एक अज्ञात शव बरामद किया गया और उसे पहचान व ज़रूरी प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए अस्पताल ले जाया गया। सोहबतपुर में स्थानीय प्रशासन ने तीन शव मिलने की पुष्टि की है। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' के अनुसार, शवों को अस्पताल भेजा गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी पहचान नहीं हो पाई थी।
ये शव ऐसे समय में मिले हैं जब बलूचिस्तान के कई ज़िलों में अज्ञात शव मिलने की खबरें लगातार आ रही हैं। मानवाधिकार संगठनों और लापता लोगों के रिश्तेदारों ने बार-बार आरोप लगाया है कि जिन लोगों को ज़बरदस्ती गायब किए जाने की बात कही जाती है, उनमें से कुछ बाद में मृत पाए जाते हैं और उनके शव अलग-अलग जगहों पर पड़े मिलते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले हफ़्ते पंजगुर के एक अस्पताल में पाँच शव लाए गए थे और बाद में उनकी पहचान उन पुरुषों के तौर पर हुई जिनके लापता होने की पहले सूचना मिली थी। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' द्वारा बताए गए परिवार के सदस्यों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इनमें से दो लोगों को कथित तौर पर 2022 में पाकिस्तानी सेना ने हिरासत में लिया था, जबकि बाकी तीन के भी पहले लापता होने की सूचना थी।
अज्ञात शवों के बार-बार मिलने से लापता लोगों के परिवारों और मानवाधिकार समूहों के बीच बलूचिस्तान में कथित तौर पर लोगों को ज़बरदस्ती गायब करने और उनकी हत्याओं को लेकर चिंता फिर से बढ़ गई है, हालाँकि अधिकारियों ने अभी तक इन ताज़ा मौतों से जुड़े हालात के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी नहीं दी है।
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