IND vs SL: गुस्से में फेंका ग्लव्स, ड्रेसिंग रूम में जाकर निकाली भड़ास, आउट होकर अंपायर पर बुरी तरह भड़के जयसूर्या
IND vs SL Colombo Test Day 2: मानव सुथार की बॉल पर एलबीडब्ल्यू आउट होने के बाद प्रभात जयसूर्या ने अंपायर पर जमकर भड़ास निकाली. ड्रेसिंग रूम जाकर उन्होंने गुस्से में अपना ग्लव्स निकालकर फेंक दिया. श्रीलंकाई टीम का कहना था कि खराब रोशनी के चलते मैच रोक दिया जाए जबकि अंपायर्स ने लाइट मीटर का हवाला देकर मैच जारी रखा.
दावा-2029 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ हो सकते हैं:संसदीय समिति के अध्यक्ष ने कहा- संविधान संशोधन और राज्यों की सहमति जरूरी
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव 2029 में एक साथ कराए जा सकते हैं। सोमवार को 'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर बनी संसदीय समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा कि इसके लिए संविधान में संशोधन और राज्य सरकारों की सहमति जरूरी होगी। उन्होंने कहा कि अगर संसद 2028 तक संविधान संशोधन को मंजूरी दे देती है, तो ‘वन नेशन वन इलेशन’ उसी साल शुरू की जा सकती है। 2029 में लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव कराने का फैसला राज्य सरकारों की इच्छा पर निर्भर करेगा। राजनीतिक दलों की अलग राय हो सकती है चौधरी ने कहा कि राजनीतिक दलों की अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन समिति को देश के हित में मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि समिति जनता और देश की इच्छा के आधार पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि इसी वजह से नागरिक समाज के सदस्यों को उनकी राय जानने के लिए बुलाया गया है। संसद ने समिति को दोनों संविधान संशोधन विधेयकों की जांच कर सिफारिशें देने का जिम्मा दिया है। इन विधेयकों को पास कराने के लिए संसद के दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन जरूरी होगा। जांच कर रही 31 सदस्यीय समिति लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के लिए संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 लाए गए हैं। विपक्ष की की मांग के बाद दोनों विधेयकों को चौधरी की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय संयुक्त समिति के पास भेजा गया था। पीपी चौधरी राजस्थान से भाजपा सांसद हैं। उन्होंने संसद परिसर में समिति की बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए यह जानकारी दी। पिछले साल महाराष्ट्र और उत्तराखंड का दौरा कर चुकी JPC महाराष्ट्र- JPC ने 17-18 मई 2025 को महाराष्ट्र दौरा किया। वहां मुख्यमंत्री, राजनीतिक दलों, प्रशासनिक अधिकारियों, बैंकों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) और रेगुलेटरी संस्थाओं से बातचीत की गई। समिति का मकसद यह समझना था कि एक साथ चुनाव कराने से प्रशासन, खर्च और शासन पर क्या असर पड़ेगा। उत्तराखंड- JPC 19-21 मई 2025 के बीच देहरादून और उत्तराखंड के दूसरे हिस्सों में गई। समिति ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राज्य प्रशासन और अन्य संगठनों से चर्चा की। धामी ने JPC से कहा कि बार-बार चुनाव होने से पिछले 3 साल में करीब 175 दिन आचार संहिता के कारण सरकारी काम प्रभावित हुए। उनका दावा था कि अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ हों तो 30-35% तक खर्च बच सकता है। क्योंकि, पहाड़ी राज्यों में बार-बार चुनाव कराना मुश्किल होता है। वहीं, चारधाम यात्रा, बारिश और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। JPC को रिपोर्ट 2026 के मानसून सेशन के आखिरी हफ्ते के पहले दिन तक सबमिट करनी है। रिपोर्ट में सभी कंसल्टेशंस, प्रेजेंटेशंस और मीटिंग के के इनपुट्स को इकट्ठा करके सिफारिशें दी जाएंगी। अभी कोई फाइनल डेडलाइन या सबमिशन डेट पब्लिश नहीं हुई है। JPC की रिपोर्ट के बाद संसद में आगे चर्चा/वोटिंग होगी। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में पैनल का गठन 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' पर विचार करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर 2023 को एक पैनल का गठन किया गया था। इस पैनल ने हितधारकों-विशेषज्ञों के साथ चर्चा और 191 दिनों के शोध के बाद 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। 1967 तक साथ हुए चुनाव 1952 से 1967 तक यानी चार बार लोकसभा व अधिकांश विधानसभा चुनाव साथ हुए। 1967 के बाद कई राज्यों में सरकारें गिरने लगीं। 1968-69 में कई विधानसभाएं भंग हुईं और 1970 में लोकसभा भी कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग हो गई। इससे देश का साझा चुनावी चक्र बिखर गया। 1971 में लोकसभा के मध्यावधि चुनाव हुए और राज्यों में चुनाव अलग-अलग समय पर होने लगे। बाद में गठबंधन सरकारों, राष्ट्रपति शासन और समय से पहले चुनाव ने अंतर और बढ़ा दिया। विधि आयोग और नीति आयोग समय-समय पर चुनावी चक्र एक करने की सिफारिश करते रहे हैं।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News18







