'एक साल मेरे साथ रहो, गाड़ी-घर दूंगा', इस एक्ट्रेस से 70 साल के प्रोड्यूसर ने कही ऐसी घटिया बात, डरकर भागी हसीना
Mirzapur Fame Anangsha Biswas on Casting Couch: फिल्म और वेब सीरीज की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस अनंग्शा बिस्वास इन दिनों अपने एक चौंकाने वाले खुलासे को लेकर चर्चा में हैं. अनंग्शा ने इंडस्ट्री में अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कास्टिंग काउच और एक ऐसे ऑफर के बारे में बात की, जिसने उन्हें अंदर तक हिला दिया था. एक्ट्रेस ने बताया कि जब वो फिल्म इंडस्ट्री में नई थीं और उनके पास ज्यादा पैसे भी नहीं थे, तब करीब 70 साल की उम्र के एक जाने-माने प्रोड्यूसर ने उन्हें ऐसा ऑफर दिया था, जिसे सुनकर वो हैरान रह गई थीं.
अनंग्शा ने ये खुलासा शुभोजीत घोष के साथ बातचीत में किया. एक्ट्रेस के मुताबिक, उस समय वो इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रही थीं. उन्हें फिल्में पाने और अपना करियर शुरू करने के लिए कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. इसी दौरान एक कथित प्रोड्यूसर ने उन्हें आर्थिक मदद के बदले अपने साथ रहने का ऑफर दिया.
'घर और गाड़ी की चाबी तुम्हारी है’
अनंग्शा ने बातचीत के दौरान उस घटना को याद करते हुए बताया कि जब वो इंडस्ट्री में नई-नई आई थीं, तब एक उम्रदराज प्रोड्यूसर ने उनसे बेहद चौंकाने वाली बात कही थी. एक्ट्रेस के मुताबिक, उस व्यक्ति ने उनसे कहा कि उनके पास घर और गाड़ी की चाबी हो सकती है. इसके बदले उन्हें सिर्फ एक साल उसके साथ रहना होगा. अनंग्शा ने बताया कि उस समय उनके पास पैसे नहीं थे और वो इंडस्ट्री में अपना करियर बनाने के लिए संघर्ष कर रही थीं. उन्होंने बताया कि उस व्यक्ति ने उन्हें ये भरोसा दिलाने की कोशिश की थी कि वो उनके लिए फिल्म भी प्रोड्यूस कर देगा. यानी उनके सामने आर्थिक सुरक्षा और फिल्म में काम मिलने का लालच रखा गया था. अनंग्शा ने इस घटना को अपने लिए बेहद असहज और हैरान कर देने वाला अनुभव बताया.
‘तुम्हें मेरे साथ सिर्फ एक साल रहना होगा’
एक्ट्रेस ने बताया कि उस कथित प्रोड्यूसर ने उनके सामने सीधे तौर पर कहा था कि उन्हें उसके साथ एक साल रहना होगा. बदले में उन्हें घर और गाड़ी जैसी सुविधाएं देने की बात कही गई थी. अनंग्शा के लिए ये सब बिल्कुल नया था. उन्होंने कहा कि उन्हें उस समय समझ ही नहीं आया कि इंडस्ट्री में इस तरह की चीजें भी होती हैं. उनके मुताबिक, वो उस समय इतनी नई थीं कि इस तरह के ऑफर का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थीं. उन्हें उम्मीद थी कि अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर उन्हें काम मिलेगा, लेकिन सामने आई इस परिस्थिति ने उन्हें काफी परेशान कर दिया.
‘मुझे नहीं मालूम था इंडस्ट्री में ये सब भी होता है’
अनंग्शा ने बताया कि उन्हें इस तरह के ऑफर की बिल्कुल उम्मीद नहीं थी. वो फिल्म इंडस्ट्री में काम करने और अपना करियर बनाने के सपने के साथ आई थीं. उन्होंने कहा कि उन्हें उस समय ये भी नहीं पता था कि इंडस्ट्री में कुछ लोग नए कलाकारों की मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं. एक्ट्रेस के मुताबिक, वो उस शख्स की बात सुनकर इतनी हैरान हो गई थीं कि उन्हें समझ नहीं आया कि उस वक्त क्या जवाब देना है. उन्होंने कुछ देर के लिए वहां से निकलने का बहाना बनाया और कहा कि वह अभी आती हैं. लेकिन इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.
'वहां से भाग गई’
अनंग्शा ने बताया कि उन्होंने उस व्यक्ति से कहा कि वो थोड़ी देर में वापस आती हैं. इसके बाद वो वहां से तुरंत निकल गईं. एक्ट्रेस के लिए ये स्थिति इतनी डरावनी और परेशान करने वाली थी कि उन्होंने वहां रुककर किसी तरह की बातचीत आगे बढ़ाना ठीक नहीं समझा. वो सीधे वहां से निकलकर घर पहुंचीं. अनंग्शा ने बताया कि घर आने के बाद वो बहुत रोई थीं. उनके लिए ये सिर्फ एक प्रोफेशनल रिजेक्शन नहीं था, बल्कि ऐसा अनुभव था जिसने उन्हें अंदर तक हिला दिया था.
घरवालों को भी नहीं बता पाईं अनंग्शा
अनंग्शा ने बताया उस समय वो अपने परिवार को भी इस बारे में नहीं बता सकीं. एक्ट्रेस के मुताबिक, उनका परिवार उन्हें लेकर काफी प्रोटेक्टिव रहा है. ऐसे में उन्हें डर था कि अगर उन्होंने अपने माता-पिता को इस घटना के बारे में बताया तो उनके पिता उन्हें इंडस्ट्री छोड़कर वापस घर आने के लिए कह सकते हैं. अनंग्शा ने बताया कि वो अपने करियर के लिए घर में पहले ही काफी संघर्ष करके आई थीं. ऐसे में उन्हें डर था कि अगर उनके पिता को इस तरह की घटना के बारे में पता चला, तो वो उन्हें तुरंत वापस बुला लेंगे. इसी वजह से उन्होंने ये बात अपने माता-पिता से शेयर नहीं की और इस मुश्किल दौर को खुद ही संभालने की कोशिश की.
‘मैं इंडस्ट्री में लड़कर आई थी’
अनंग्शा ने बातचीत में ये भी बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में आने का फैसला उनके लिए आसान नहीं था. उन्होंने अपने करियर के लिए घर में भी संघर्ष किया था. उनके मुताबिक, वो अपने सपनों को पूरा करने के लिए इंडस्ट्री में आई थीं और इसके लिए उन्हें काफी कुछ पीछे छोड़ना पड़ा. इसलिए वो नहीं चाहती थीं कि शुरुआती दौर में सामने आई इस घटना की वजह से उनका सपना खत्म हो जाए. यही वजह थी कि उन्होंने अपने माता-पिता को कुछ नहीं बताया और खुद इस परिस्थिति से बाहर निकलने का फैसला किया.
ये भी पढ़ें: Explainer: फिल्म रिलीज से पहले क्यों की जाती है एडवांस बुकिंग? जानिए इसके पीछे क्या होता है मकसद
'राज्य के गांवों तक अवसंरचना एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी', उत्तराखंड के विकास पर बोले दिनेश अग्रवाल
अवस्थापना विकास सलाहकार सेतु आयोग दिनेश अग्रवाल ने कहा कि उत्तराखंड के वास्तविक एवं सतत विकास के लिए राज्य के प्रत्येक पर्वतीय गांव तक सुदृढ़ स्वास्थ्य एवं शिक्षा अवसंरचना तथा गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है. जब गांवों में स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाएं मजबूत होंगी, तभी पलायन पर प्रभावी रोक लगेगी, आजीविका के अवसर टिकाऊ बनेंगे और सीएम पुष्कर सिंह धामी के ‘विकसित उत्तराखंड’ के संकल्प को वास्तविक अर्थों में साकार किया जा सकेगा.
नीतिगत सुधारों के लिए प्रस्ताव तैयार
सोमवार को सचिवालय मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में अवस्थापना विकास सलाहकार दिनेश अग्रवाल ने कहा कि आयोग का प्रयास है कि नीतिगत सुधारों के प्रस्ताव तैयार करते समय जमीनी तथ्यों और वास्तविक आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाए. इस क्रम में आयोग की ओर से पांच क्षेत्रों यथा अर्थव्यवस्था एवं कौशल, अवसंरचना एवं कल्याण, शहरी एवं उप शहरी विकास, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन तथा डेटा एनालिटिक्स पर कार्य किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आयोग मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी मार्गदर्शन तथा प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत-2047’ के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप राज्य की नीति-निर्माण प्रक्रिया को साक्ष्य-आधारित एवं परिणाम-केंद्रित बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है.
अग्रवाल ने कहा कि अर्थव्यवस्था एवं कौशल विकास के तहत उत्तराखंड बायोएनर्जी नीति-2026, वन पंचायत नियमावली-2026 तथा सहकारिता नीति-2026 के प्रारूपण पर कार्य किया जा रहा है. एनआईआईटी फाउंडेशन के सहयोग से विभिन्न संस्थानों में फ्यूचर स्किल्स एवं डिजिटल कौशल विकास, नैसकॉम के सहयोग से 119 राज्य महाविद्यालयों में एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स, प्रमुख संगठित खरीदारों के जरिए किसानों की बाजार पहुंच का सुदृढ़ीकरण तथा ओवरसीज प्लेसमेंट सेल की रूपरेखा तैयार करने पर कार्य किया जा रहा है.
केंद्र में शत-प्रतिशत प्लेसमेंट की व्यवस्था
उन्होंने कहा कि अवसंरचना एवं कल्याण के क्षेत्र में आयोग की ओर से पांच जिलों में 17 एकीकृत स्मार्ट ग्राम केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है. इसके तहत राष्ट्रीय ग्रामीण विकास निधि (आरजीएनवी), देहरादून में जेईई उत्कृष्टता केंद्र, कुमाऊं विश्वविद्यालय के हॉस्पिटैलिटी कौशल केंद्र में शत-प्रतिशत प्लेसमेंट की व्यवस्था, एनीमिया, स्टंटिंग एवं मातृ-शिशु मृत्यु दर पर लक्षित हस्तक्षेप तथा एम्स ऋषिकेश के सहयोग से ट्रॉमा केयर एवं टेलीमेडिसिन व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
बेहतर नागरिक सेवाएं सुनिश्चित हो सकें
उन्होंने कहा कि तीव्र शहरीकरण और पर्वतीय क्षेत्रों से शहरों की ओर बढ़ते जनसंख्या दबाव को देखते हुए नगरीय स्थानीय निकायों को अधिकारों के हस्तांतरण पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है. साथ ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को सुदृढ़ करने तथा प्रदेश के लिए नवीन शहरी अधिनियम का प्रारूप तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, ताकि नगरों में नियोजित विकास और बेहतर नागरिक सेवाएं सुनिश्चित हो सकें.
व्यापक इंडिकेटर फ्रेमवर्क तैयार किया
सलाहकार अग्रवाल ने कहा कि पूर्व में करीब स्थगित एवं मंद गति से चल रहे राज्य के व्यवस्थित मूल्यांकन कार्य को अब आयोग की ओर से सुदृढ़ किया जा रहा है. मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना, अमृत सरोवर योजना, सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का मूल्यांकन राज्य के विश्वविद्यालयों की भागीदारी से शुरू किया गया है. इसके साथ ही ‘विकसित उत्तराखंड-2047’ के लिए व्यापक इंडिकेटर फ्रेमवर्क तैयार किया गया है, जिसे राज्य सरकार द्वारा अंगीकृत किए जाने की प्रक्रिया चल रही है.
डेटा शासन नीति का निर्माण किया
इसके साथ ही डिजिटल एवं डेटा आधारित सुशासन पर जोर दिया जा रहा है. इसके तहत प्रधानमंत्री के ‘डिजिटल इंडिया’ के दृष्टिकोण के अनुरूप राज्य डेटा शासन नीति का निर्माण किया जा रहा है, जिसका मार्गदर्शक सिद्धांत ‘एक पहचान, अनेक समाधान’ है. यह नीति नागरिकों एवं फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को बार-बार दस्तावेजी औपचारिकताओं से मुक्ति दिलायगी. डिजिटल कनेक्टिविटी में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों के प्रति अधिक सुदृढ़ एवं अनुकूल डिजिटल ढांचा उपलब्ध करायेगी, ताकि किसी भी नागरिक, कार्यकर्ता अथवा विकास कार्यक्रम को तकनीकी बाधाओं का प्रभाव न झेलना पड़े.
पलायन को रोकने में मदद मिलेगी
सलाहकार दिनेश अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने आयोग के समक्ष विशेष रूप से यह सुझाव रखा है कि पर्वतीय गांवों तक स्वास्थ्य एवं शिक्षा की मजबूत और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की पहुंच को विकास की प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दिया जाए. उन्होंने कहा कि गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के सशक्त अवसर उपलब्ध होने से युवा अपने घर-गांव में बेहतर भविष्य की संभावनाएं देख सकेंगे और पलायन को रोकने में मदद मिलेगी.
उन्होंने कहा कि सेतु आयोग द्वारा किए जा रहे इन कार्यों की प्रगति पर वे विशेष रुचि के साथ निकट से नजर रखेंगे, ताकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘विकसित उत्तराखंड’ के संकल्प को साकार करने में सेतु आयोग राज्य सरकार को अधिकाधिक प्रभावी सहयोग दे सके. इस अवसर पर निदेशक नियोजन श्री मनोज पंत, विशेषज्ञ श्री विशाल पराशर एवं श्री हनुमंत रावत भी मौजूद रहे.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation








