Responsive Scrollable Menu

भारत का वर्ल्ड कप विनर दिग्ग्गज क्रिकेटर, पूरे टी20I करियर में नहीं ठोक पाया एक भी फिफ्टी

ravindra jadeja t20i career: रवींद्र जडेजा भारतीय क्रिकेट इतिहास के दिग्गज ऑलराउंडर्स में शुमार हैं. जडेजा 15 साल से भी अधिक समय से भारतीय क्रिकेट टीम का अहम हिस्सा रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं अपने टी20 इंटरनेशनल करियर में वह एक भी फिफ्टी बनाने में सफल नहीं रहे. एक मौका जरूर आया था, जब वह इसके नजदीक पहुंचे, लेकिन 46 रन बनाकर नाबाद लौटे.

Continue reading on the app

घर-घर पानी बेचा, ड्राइवर बने, अब हैं सफल फिल्ममेकर:जानिए 'कांतारा' फेम ऋषभ शेट्टी के संघर्ष की कहानी

"कांतारा' फेम निर्माता-अ​भिनेता ऋषभ शेट्‌टी को फिल्म जगत में यह ख्याति हासिल करने से पहले जीवन के गहरे उतार-चढ़ावों से गुजरना पड़ा है। हाल ही उन्हें इं​डियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न में बेस्ट डायरेक्टर का अवॉर्ड मिला है। जानते हैं उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी.… कर्नाटक में उडुपी के छोटे-से गांव में जन्मे ऋषभ का असली नाम प्रशांत शेट्‌टी है। फिल्मों में आने के बाद उन्होंने अपना नाम बदल लिया। अपनी शुरुआती शिक्षा गांव में पूरी करने के बाद ऋषभ कॉलेज की पढ़ाई के लिए बेंगलुरु आ गए। लेकिन अभिनय में अपनी रुचि के चलते ग्रेजुएशन के दूसरे ही साल में वे स्थानीय लोकनाट्यों में हिस्सा लेने लगे थे। फिर उन्होंने बेंगलुरु के सरकारी फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट से फिल्म डायरेक्शन में ​डिप्लोमा किया। संघर्ष : प्रोडक्शन हाउस में ऑफिस बॉय की नौकरी की, वडापाव खाकर गुजारा करते थे बेंगलुरु में पढ़ाई के दौरान ऋषभ के पास खर्चा चलाने के पैसे नहीं होते थे तो उन्होंने घर-घर मिनरल वाटर और चायपत्ती बेचने का काम किया। वे होटलों और प्रॉपर्टी व्यवसाय में भी छोटे-मोटे काम करते थे। डिप्लोमा करने के बाद वे कन्नड़ फिल्मों से जुड़े, लेकिन कई सालों तक उन्हें महज स्पॉट बॉय, क्लैप बॉय जैसे काम ही दिए जाते। एक्टिंग के लिए हर ऑडिशन में उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता। बेहतर कॅरिअर की तलाश में वे 2008 में मुंबई आ गए। लेकिन बड़े में शहर गुजारा और मुश्किल था। एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में उन्होंने अंधेरी के एक प्रोडक्शन हाउस में आॅफिस बॉय का काम किया। फिल्मों से जुड़े रहने के लिए उन्हें एक प्रोड्यूसर के यहां ड्राइवर की नौकरी तक करनी पड़ी। पैसे नहीं होते थे तो वे वडापाव खाकर ही पेट भर लेते थे। शुरुआत: "तुगलक' से किया डेब्यू, सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला ऋषभ को 2012 में पहली बार फिल्म "तुगलक' में एक निगेटिव किरदार मिला। 2016 तक छोटे-मोटे रोल निभाते हुए उन्होंने कन्नड़ फिल्म "रिकी' से बतौर डायरेक्टर डेब्यू किया। अगली ही फिल्म "किरिक पार्टी' सुपरहिट हुई। 2018 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। फिर 2019 में जाकर ऋषभ को "बेल-बॉटम' में लीड एक्टर का रोल मिला। सफलता: "​कांतारा' ने रातोरात बनाया स्टार, जरूरतमंद बच्चों की आर्थिक मदद करते हैं डेब्यू के दस साल बाद 2022 में आई "कांतारा' ने ऋषभ को रातोरात स्टार बना दिया। "भूत कोला' प्रथा पर आधारित छोटे बजट की फिल्म ने करीब 400 करोड़ रुपए कमाए। इसका सिक्वल भी ब्लॉकबस्टर रहा। ऋषभ को बेस्ट एक्टर का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। उन्होंने अपने गांव केराडी के सरकारी स्कूल को गोद लिया है। ऋषभ शेट्‌टी फाउंउेशन के जरिए वे जरूरतमंद विद्या​ि​र्थयों की आर्थिक मदद भी करते हैं।

Continue reading on the app

  Sports
  Videos
See all

UP Politics: सावन में 'मछली भोज' पर सियासी संग्राम, योगी के निशाने पर कांग्रेस! | CM Yogi | Ajay Rai #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-24T12:11:46+00:00

Rubika Liyaquat LIVE | Garjana LIVE: मछली पर सियासत को चुभा 'कांटा'! | CM yogi | Rahul | Akhilesh #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-24T12:08:41+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers