राजेश राय
तोक्या, 24 अगस्त वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत कम से कम आठ-नौ और देशों के समूहों तथा अलग-अलग देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के लिए बातचीत कर रहा है। इनसे कुल 15 हजार अरब डॉलर की अतिरिक्त जीडीपी वाली अर्थव्यवस्थाओं तक भारत की पहुंच बनेगी।
उन्होंने कहा कि भारत के मुक्त व्यापार समझौतों से अंततः वैश्विक व्यापार का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा भारत के लिए खुल जाएगा और इससे देश को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भरोसेमंद भागीदार के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
गोयल ने यहां भारत और जापान के कारोबारी प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का घरेलू बाजार बड़ा है और वह दुनिया के लिए अपने दरवाजे खोल रहा है। पिछले चार वर्षों में भारत ने नौ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं।
उन्होंने कहा कि इन नौ समझौतों के तहत 38 विकसित देशों समेत कुल 60 हजार अरब डॉलर की जीडीपी वाली अर्थव्यवस्थाएं आती हैं।
मंत्री ने कहा कि जापान और कोरिया समेत विभिन्न देशों तथा आसियान क्षेत्र के साथ पहले किए गए व्यापार समझौतों से 10 हजार अरब डॉलर की अतिरिक्त जीडीपी तक पहुंच बनी है।
गोयल ने कहा, ‘‘आज भारत 70 हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए तरजीही बाजार पहुंच के दरवाजे खोल रहा है। हम कम से कम आठ या नौ अन्य देशों के समूहों या देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं, जिससे 15 हजार अरब डॉलर और जुड़ेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह हमारे मुक्त व्यापार समझौतों के जरिये वैश्विक व्यापार का 75 प्रतिशत हिस्सा कवर हो जाएगा और भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला का भरोसेमंद भागीदार बनने का अवसर मिलेगा।’’
गोयल दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देने के लिए 200 से अधिक प्रतिनिधियों वाले एक बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में डेटा सेंटर, विनिर्माण और कृत्रिम मेधा (एआई) जैसे क्षेत्रों में निवेश के बड़े अवसर मौजूद हैं।
मंत्री ने कहा कि बढ़ते आर्थिक संबंधों से भारत और जापान के बीच संतुलित व्यापार की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलनी चाहिए।
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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंच रहे हैं, जहां वे चीनी विदेश मंत्री और अपने समकक्षी वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों (SR) की 25वें दौर की वार्ता में भाग लेंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम करने और सैन्य गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में कूटनीतिक प्रयास तेज कर रहे हैं। आगामी वार्ता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले हो रही है। हालांकि शी के दौरे की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दोनों पक्षों के अधिकारी उनके शामिल होने को लेकर आशावादी हैं।
भारत-चीन सीमा विवाद और वार्ता
यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम करने और सैन्य टकराव की स्थिति को शांत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। गौरतलब है कि जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंध काफी तनावपूर्ण हो गए थे, जिसके बाद भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में बड़ी संख्या में सैनिकों और सैन्य उपकरणों की तैनाती की थी। हाल के वर्षों में, दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की वार्ता हुई है। इन वार्ताओं का उद्देश्य LAC से सैनिकों की वापसी, डिसइंगेजमेंट (सैन्य टुकड़ियों का पीछे हटना) और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करना रहा है।
विशेष प्रतिनिधि तंत्र एक महत्वपूर्ण मंच है जिसे भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का राजनीतिक समाधान खोजने के लिए स्थापित किया गया है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और चीन के उनके समकक्ष इस तंत्र के तहत बातचीत करते हैं। इसका उद्देश्य न केवल मौजूदा सैन्य तनाव को कम करना है, बल्कि सीमा विवाद के व्यापक और दीर्घकालिक समाधान के लिए राजनीतिक रास्ता खोजना भी है।
क्यों बेहद अहम माना जा रहा है यह दौरा?
1. शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे से पहले की पटकथा
यह वार्ता आगामी 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हो रही है। इस सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना जताई जा रही है। डोभाल का यह दौरा दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात के लिए अनुकूल माहौल बनाने की दिशा में एक प्रमुख कूटनीतिक कदम है।
2. राजनीतिक समाधान के लिए विशेष प्रतिनिधि (SR) तंत्र
विशेष प्रतिनिधि वार्ता केवल तात्कालिक सैन्य विवादों को सुलझाने का मंच नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक और व्यापक सीमा समाधान खोजने के लिए स्थापित एक उच्चतम राजनीतिक तंत्र है। गलवान घटना के बाद से दोनों पक्षों के बीच यह राजनीतिक संवाद बेहद निर्णायक मोड़ पर है।
3. कूटनीतिक और सैन्य वार्ता में संतुलन
हाल के वर्षों में भारत और चीन ने कोर कमांडर स्तर की सैन्य वार्ताएं तो की हैं, लेकिन राजनीतिक और रणनीतिक स्तर पर दिशा तय करने के लिए SR वार्ता का होना अनिवार्य माना जाता है। डोभाल की यह यात्रा वार्ता प्रक्रिया को नई गति देगी।
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