Kangana Ranaut vs Baba Ramdev: 'गटर जेनरेशन' बयान पर बाबा रामदेव के हमले के बाद भड़कीं कंगना; बोलीं- 'बाबा मेरी जवानी के सपने मत देखो
अभिनेत्री और मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत और योग गुरु बाबा रामदेव के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के बाद कंगना द्वारा युवा पीढ़ी के एक हिस्से को 'गटर जेनरेशन' कहे जाने पर बाबा रामदेव ने सख्त आपत्ति जताई थी। इस पर कंगना रनौत ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए रामदेव के बयानों का कड़ा जवाब देते हुए उन पर निजी और तीखे हमले किए हैं।
कंगना का रामदेव पर तीखा हमला, दिलाई सुप्रीम कोर्ट की याद
कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम पर स्टोरी साझा करते हुए बाबा रामदेव को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने लिखा कि बाबा जी, आप मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में सपने देखना बंद करें। कंगना ने कहा कि कोई भी केवल अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही किसी के बारे में राय बना सकता है।
इसके साथ ही उन्होंने पतंजलि के भ्रामक विज्ञापनों से जुड़े मामले का परोक्ष संदर्भ देते हुए कहा कि कम से कम उन्हें झूठे या फ्रॉड मेडिकल दावों के लिए कभी देश की शीर्ष अदालत से फटकार नहीं सुननी पड़ी है। कंगना ने जोर देकर कहा कि उनकी बातें तथ्यों पर आधारित हैं, इसलिए रामदेव उन्हें चरित्र का पाठ पढ़ाने की कोशिश न करें।
बाबा रामदेव ने कंगना के बयान को बताया था बिगड़े दिमाग की निशानी
इससे पहले एक इंटरव्यू के दौरान जब बाबा रामदेव से कंगना रनौत के 'गटर छाप' और 'गटर जेनरेशन' वाले बयान को लेकर सवाल पूछा गया था, तो उन्होंने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी। रामदेव ने कंगना के अतीत और शिक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उनका बचपन, जवानी और पहले के कारनामे कैसे रहे हैं, यह सब जानते हैं।
उन्होंने कहा था कि देश के नौजवानों को गटर कहना पूरी तरह से बिगड़े हुए और विकृत दिमाग की निशानी है। योग गुरु ने यह भी कहा था कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को कंगना के इस तरह के अनर्गल बयानों पर संज्ञान लेना चाहिए।
'गटर जेनरेशन' बयान पर पहले से हो रहा था चौतरफा विरोध
कंगना रनौत ने जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के दौरान एक पोस्ट में युवाओं, विशेष रूप से जेन जी (Gen Z) के कुछ वर्गों की जीवनशैली और सोच की आलोचना करते हुए 'गटर जेनरेशन' शब्द का इस्तेमाल किया था। इस बयान के सामने आने के बाद फिल्म जगत से लेकर राजनीतिक गलियारों में उनकी भारी आलोचना हुई थी।
हालांकि, चौतरफा विरोध के बावजूद कंगना ने अपने बयान पर माफी मांगने से इनकार कर दिया था और अपने तर्कों के साथ बयान का बचाव जारी रखा, जिसके बाद अब यह पूरा मामला कंगना और बाबा रामदेव के बीच सीधी बयानबाजी में तब्दील हो गया है।
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1971 में जब बांग्लादेश की आजादी के लिए आंदोलन चलाया गया था, तब उन्होंने वामपंथी स्वतंत्रता सेनानियों के संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इस दौरान उन्होंने कुछ समय के लिए भारत में शरण ली थी।
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