कई देशों के बीच जंगे छिड़ी हुई हैं। ठीक उसी दौरान भारत अपनी कूटनीति के जरिए हर मोर्चा पर खुद को मजबूत करने में जुटा हुआ है। भारत की तरक्की कई बड़े देशों को रास नहीं आ रही है और वह भारत पर दबाव बनाकर उसे उसके लक्ष्य से भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन फिर भी भारत मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। ट्रंप की टेरिफ धमकी के बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस पहुंचे। जैसे ही जयशंकर रूस में उतरे तो उनका धमाकेदार स्वागत हुआ। इसके बाद वो रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मिले। पुतिन जयशंकर का गर्मजशी के साथ स्वागत करते हुए दिखाई दिए। जयशंकर ने पुतिन से पूछा कि आशा है आप ठीक होंगे। पुतिन ने इसका जवाब मुस्कुराते हुए दिया। इसके अलावा जयशंकर ने पुतिन को पीएम मोदी का एक सीक्रेट मैसेज भी थमाया।
दरअसल जयशंकर की मुलाकात पुतिन के अगले महीने भारत दौरे से ठीक पहले हुई है। पुतिन सितंबर में ब्रिज सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आने वाले हैं। इससे पहले पुतिन ने दिसंबर 2025 को 23वें भारत रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली का दौरा किया था। इस दौरे की तस्वीरों ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर पुतिन की एयरपोर्ट पर अगवानी की थी। दरअसल रूस पहुंचे जयशंकर की जब पुतिन से चर्चा हुई तो कई बड़ी बातें सामने आई। जयशंकर ने पुतिन से कहा कि दिल्ली ब्रिक्स समिट में आपके स्वागत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री मोदी की शुभकामना के साथ अपनी बात शुरू करना चाहता हूं। उन्होंने मुझे एक निजी संदेश दिया है जिसे मैं आपको सौंपना चाहता हूं। हमारी अंतर सरकारी आयोग की बैठक हुई है और मुझे लगता है कि हमारे पास आपको सौंपने के लिए एक अच्छी रिपोर्ट है। आर्थिक सहयोग, व्यापार, ऊर्जा, फर्टिलाइजर, परमाणु और अन्य आयामों में सहयोग बढ़ा है। जिन पर मुझे विस्तार से बात करके खुशी होगी। कुल मिलाकर हमारा आर्थिक सहयोग काफी आगे बढ़ा है। जिसके बाद पुतिन ने पीएम मोदी और भारत के रिश्तों पर धमाकेदार बातें कही।
राष्ट्रपति पुतिन ने भारत और रूस व्यापार में बढ़ोतरी का श्रेय पीएम मोदी को दिया। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार में बढ़ोतरी पर कहा कि इसका मुख्य श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाता है। पुतिन ने कहा कि भारत के साथ रूस के रिश्ते लगभग सभी क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने जयशंकर से पीएम मोदी को अपनी शुभकामनाएं पहुंचाने की अपील की और कहा कि वह जल्द ही पीएम मोदी से मुलाकात उम्मीद कर रहे हैं। दरअसल रूस और भारत ने 2030 तक आपसी कारोबार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए भारत खासतौर पर रूस को अपनी दवाइयों, कृषि, उत्पादों, मशीनरी और दूसरे सामानों की बिक्री बढ़ाना चाहता है। रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। जुलाई 2025 के मुकाबले जुलाई 2026 में रूस से भारत का तेल आयात 62.4% बढ़ा।
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विदेश मंत्री दो दिवसीय दौरे पर रूस पहुंचे हैं और इस दौरे के दौरान उन्होंने मॉस्को पहुंचते ही सबसे पहले राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन से मुलाकात की। यह मुलाकात सिर्फ एक भेंट नहीं थी बल्कि इसमें भारत और रूस के भविष्य के आर्थिक रणनीतिक रिश्तों पर पूरा खाका तैयार किया गया। विदेश मंत्री जयशंकर ने राष्ट्रपति पुतिन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संदेश सौंपा। उन्होंने पुतिन को बताया कि पीएम मोदी आगामी एसईओ शिखर सम्मेलन और फिर भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उनका स्वागत करने के लिए बेहद उत्सुक है। यह बैठक इसलिए भी खास है क्योंकि 12 और 13 सितंबर को राष्ट्रपति पुतिन खुद नई दिल्ली आ सकते हैं और इस मुलाकात के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बैठकों को अंजाम देना शुरू किया और यह बैठकें भारत और रूस की द्विपक्षी संबंधों को बेहतर करने के लिए की जा रही हैं। इसी सिलसिले में विदेश मंत्री जयशंकर ने 27वें भारत रूस अंतर सरकारी आयोग की सह अध्यक्षता भी की और यहां पर जो आंकड़े निकल कर सामने आए वह हैरान करने वाले हैं।
पिछले 5 सालों में भारत और रूस के बीच द्विपक्ष व्यापार चार गुना बढ़ गया है। साल 2021-22 में जो व्यापार 13 अरब डॉलर था वो साल 2025-26 में बढ़कर करीब $ अरब डॉलर तक पहुंच गया है। जो कि दिखाता है कि भारत और रूस की साझेदारी लगातार आगे बढ़ रही है। लेकिन यहां पर एक बड़ी चुनौती भी है जिसका सामना दोनों देश कर रहे हैं। जिसको लेकर विदेश मंत्री जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि व्यापार असंतुलन यानी कि ट्रेड इमंबैलेंस का मुद्दा है जो दोनों देशों के बीच कुछ रुकावट ला सकता है। रूस से आयात तो बढ़ गया है लेकिन भारत का निर्यात उस अनुपात में नहीं है जिस से 50 अरब डॉलर का अंतर पैदा हो गया है। इस बात को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट किया कि असंतुलन को दूर करना अब भारत की प्राथमिकता है और इस बातचीत के दौरान ऊर्जा, परमाणु क्षेत्र और फर्टिलाइज़र्स पर विशेष जोर दिया गया।
राष्ट्रपति पुतिन ने भी भरोसा दिलाया है कि रूस भारतीय किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए फर्टिलाइज़र्स की आपूर्ति बढ़ा रहा है और आगे भी इसे जारी रखेगा। इसके अलावा दोनों देशों के बीच पेमेंट मैकेनिज्म को लेकर भी मजबूत करने पर बातचीत हुई और मार्केट एक्सेस को आसान बनाने पर काम करने पर सहमति बनी है। आप एक बार खुद देखिए कि विदेश मंत्री ने इस बैठक में क्या कुछ कहा है। इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तीन मुख्य प्रस्ताव रखे हैं। जो पहला प्रस्ताव है वो है परिणामों पर जोर। अब सिर्फ बैठकों से काम नहीं हो सकता। आगे देखना होगा कि हर वर्किंग ग्रुप को ठोस नतीजे देने होंगे। दूसरा बड़ा प्रस्ताव था बिजनेस कनेक्ट। सरकारों का काम माहौल बनाना है। लेकिन जो असली व्यापार है वह व्यापार कंपनियां करती है। इसलिए व्यापारियों को भी सीधा जोड़ने पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जोर दिया और तीसरा है नए अवसर। यानी कि बदलते हुए वैश्विक हालात में नए क्षेत्र जैसे कि स्किल मोबिलिटी,नई टेक्नोलॉजी इन सारे क्षेत्रों में नई-नई संभावनाओं को तलाशने पर भी दोनों देशों को जोर देना होगा।
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