रुपए को गिरने से बचाने की जरूरत नहीं:PM सलाहकार बोले- मार्केट को तय करने दें करेंसी का स्तर, महंगाई-कंट्रोल करने पर ध्यान दे भारत
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने कहा कि भारत को रुपए में गिरावट रोकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय उसे मार्केट के हिसाब से अपना स्तर तय करने देना चाहिए। वहीं हमारा मुख्य फोकस महंगाई दर को कंट्रोल में रखने पर होना चाहिए। सान्याल ने कहा कि जब देश ने इन्फ्लेशन टारगेटिंग फ्रेमवर्क को अपनाया था, तब उसने करेंसी एक्सचेंज रेट के ऊपर मॉनेटरी पॉलिसी को चुना था। महंगाई कंट्रोल करना प्राथमिक लक्ष्य संजीव सान्याल ने बताया कि ओपन कैपिटल अकाउंट वाली अर्थव्यवस्थाओं में पॉलिसी मेकर्स के सामने कई चुनौतियां होती हैं। भारत का फ्रेमवर्क इस सिद्धांत पर आधारित है कि कोई भी देश एक साथ स्वतंत्र मॉनेटरी पॉलिसी चलाने और अपनी करेंसी की विनिमय दर को सख्ती से कंट्रोल करने का काम नहीं कर सकता। भारत जैसे बड़े और आंतरिक रूप से मजबूत देश के लिए रुपए की दर तय करने के बजाय महंगाई दर को लक्षित करना ही सही कदम है। इन्फ्लेशन टारगेटिंग फ्रेमवर्क की सफलता सान्याल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को रुपए के स्तर में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन्फ्लेशन टारगेटिंग सिस्टम ने देश में बहुत अच्छा काम किया है। एक समय था जब भारत में महंगाई दर 8% से 12% के दायरे में रहती थी, जबकि पिछले एक दशक में यह सफलतापूर्वक घटकर 2% से 6% के दायरे में आ गई है। विदेशी मुद्रा भंडार का सही इस्तेमाल संजीव सान्याल ने यह भी कहा कि रुपए को बाजार के भरोसे छोड़ने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि केंद्रीय बैंक या संबंधित अधिकारी पूरी तरह चुप बैठेंगे। उन्होंने कहा कि फॉरेक्स रिजर्व का इस्तेमाल करेंसी में होने वाले अचानक या तेज उतार-चढ़ाव की रफ्तार को धीमा करने और झटकों को संभालने के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसका उपयोग रुपए को उसके स्वाभाविक स्तर पर पहुंचने से रोकने के लिए नहीं होना चाहिए। कमजोर रुपए से एक्सपोर्टर्स को फायदा सान्याल ने बताया कि रुपए का कमजोर होना अर्थव्यवस्था के लिए हमेशा नुकसानदायक होता है। उन्होंने कहा कि यदि देश में महंगाई दर कंट्रोल रहती है, तो रुपए में गिरावट से भारतीय एक्सपोर्टर्स को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलती है। दुनिया के कई देशों की करेंसी में काफी उतार-चढ़ाव आता रहता है, इसलिए अगर घरेलू स्तर पर कीमतें स्थिर हैं, तो कमजोर रुपया अर्थव्यवस्था के लिए रुकावट नहीं बनता। चीन से अलग है भारत का दृष्टिकोण सान्याल के मुताबिक, मुख्य चिंता यह होनी चाहिए कि क्या करेंसी में आ रही गिरावट से देश के भीतर महंगाई बढ़ रही है। यदि महंगाई कंट्रोल में है और जरूरत पड़ने पर ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं, तो रुपए को जबरन बचाना सही तरीका नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का यह कदम चीन की तरह जानबूझकर अपनी करेंसी को कमजोर करने जैसा नहीं है, बल्कि भारतीय रुपए की यह चाल पूरी तरह से स्वाभाविक और ऑर्गेनिक है। लंबे समय में परचेजिंग पावर पैरिटी (PPP) अपनी भूमिका निभाएगी। क्या होता है इन्फ्लेशन टारगेटिंग फ्रेमवर्क? यह एक मॉनेटरी पॉलिसी फ्रेमवर्क है जिसके तहत देश का सेंट्रल बैंक जैसे RBI एक तय सीमा (2% से 6%) के भीतर महंगाई दर को बनाए रखने का लक्ष्य रखता है, ताकि कीमतों में स्थिरता बनी रहे। क्या है परचेजिंग पावर पैरिटी (PPP)? परचेजिंग पावर पैरिटी यानी क्रय शक्ति समता, दो अलग-अलग देशों की करेंसी की खरीदने की क्षमता की तुलना करने का एक आर्थिक पैमाना है। ये खबर भी पढ़ें… चांदी ₹5,772 गिरकर ₹2.27 लाख किलो पर आई: 10 ग्राम सोने का दाम ₹1,196 कम होकर ₹1.53 लाख हुआ, कैरेट के हिसाब से देखें कीमत सोने-चांदी की कीमतों में 19 अगस्त को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी की कीमत 5,772 रुपए गिरकर 2.27 लाख रुपए पर आ गई है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 1,196 रुपए कम होकर 1.53 लाख रुपए पर है। पूरी खबर पढ़ें…
चांदी ₹3,939 गिरकर ₹2.29 लाख किलो पर आई:10 ग्राम सोने का दाम ₹212 कम होकर ₹1.54 लाख हुआ, कैरेट के हिसाब से देखें कीमत
सोने-चांदी की कीमतों में 19 अगस्त को गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी की कीमत 3,939 रुपए गिरकर 2.29 लाख रुपए पर आ गई है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 212 रुपए कम होकर 1.54 लाख रुपए पर है। सोने-चांदी के दाम में गिरावट के 2 मुख्य कारण सोना इस साल ₹20,669 महंगा और चांदी ₹1,195 गिरी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 20,669 रुपए महंगा हो चुका है। वहीं, चांदी 1,195 रुपए सस्ती हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.54 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.29 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। निवेशकों के लिए सलाह: क्या सोने-चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट खरीदारी का सही मौका है या अभी और इंतजार करना चाहिए? कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 3 बातों का रखें ध्यान असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके
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