यमुनोत्री धाम की यात्रा में बना नया रिकॉर्ड, पहली बार श्रद्धालुओं की संख्या पहुंची 6.68 लाख
उत्तराखण्ड में मानसून की कठिन चुनौतियों के बावजूद चारधाम यात्रा निर्बाध जारी है. इस यात्राकाल के 125 दिनों में ही दर्शनार्थियों की संख्या 48 लाख के पार पहुंच चुकी है. यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 05 लाख 22 हजार अधिक है. यमुनोत्री धाम की यात्रा ने नया रिकॉर्ड बनाया है. यहां पहली बार श्रद्धालुओं की संख्या 06 लाख 68 हजार से अधिक पहुंच गई है. इससे पूर्व वर्ष 2025 में 06 लाख 44 हजार 637 श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन को पहुंचे थे.
यात्रा को बेहद सतर्कता और निगरानी के साथ संचालित
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल यात्रा प्रबंधन के चलते चारधाम यात्रा हर वर्ष नए रिकॉर्ड कायम कर रही है. मानसून सीजन को देखते हुए यात्रा को बेहद सतर्कता और निगरानी के साथ संचालित किया जा रहा है. यात्रा से जुड़े रुद्रप्रयाग, चमोली, और उत्तरकाशी जनपद में आपदा प्रबंधन विभाग को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड में रखा गया है. मुख्यमंत्री के निर्देश पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं. मौसम के मिजाज को देखते हुए प्रशासन ने तीर्थयात्रियों के लिए विशेष एडवाइजरी भी जारी की है, लेकिन आस्था मौसम पर भी भारी पड़ रही है.
22 हजार 634 यात्री अधिक पहुंचे
इस वर्ष 19 अप्रैल को गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाटोद्घाटन के साथ चारधाम यात्रा का आगाज हुआ था. शुक्रवार 21 अगस्त तक इस यात्राकाल के 125 दिनों में कुल 48 लाख 04 हजार 897 श्रद्धालु चारधाम दर्शन कर चुके हैं, जबकि बीते वर्ष 2025 में इसी अवधि में 42 लाख 82 हजार 263 यात्री चारधाम दर्शन को पहुंचे थे. इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में 05 लाख 22 हजार 634 यात्री अधिक पहुंचे हैं.
3 लाख 62 हजार 304 यात्री अधिक पहुंचे
चारों धामों में अब तक की कुल संख्या पर नजर दौड़ाएं तो बद्रीनाथ में 16 लाख 54 हजार 263, केदारनाथ में 14 लाख 65 हजार 370, गंगोत्री में 07 लाख 47 हजार 671 और यमुनोत्री धाम में 06 लाख 68 हजार 163 यात्री दर्शन कर चुके हैं. जबकि हेमकुंट साहिब में 02 लाख 69 हजार 430 श्रद्धालु शीश नवा चुके हैं. भगवान बद्रीविशाल के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है. बद्रीनाथ में पिछले वर्ष के मुकाबले 03 लाख 62 हजार 304 यात्री अधिक पहुंचे हैं.
यमुनोत्री धाम में प्रतिवर्ष श्रद्धालुओं की संख्या
2025------6,44,637
2024------5,15,067
2023------5,60,918
2022------6,21,538
2021--------33,311
2020---------7728
2019---------4,65,534
2018---------3,94,445
2017---------3,92,208
2016---------1,55,129
2015---------1,22,926
2014---------038,294
2013---------253110
2012---------413615
2011---------448945
2010---------309634
2009--------322242
2008--------327611
2007--------287870
2006--------216883
2005--------169046
2004--------102331
2003--------78,050
2002--------54023
2001--------54074
2000-------88672
सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
उत्तराखण्ड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, चारधाम यात्रियों की सुरक्षा प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसके लिए चारों धामों और यात्रा पड़ावों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं. यात्रा बिना किसी बाधा के संचालित हो रही है, लेकिन मौसम खराब होने पर यात्रा को नियंत्रित भी किया जा रहा है. यात्रा से जुड़े सभी जनपदों के डीएम भी व्यवस्थाओं पर पूरी नजर बनाए हुए हैं.
झारखंड का स्वर्ग कहे जाने वाली पतरातू घाटी का होगा कायाकल्प, पारंपरिक कला से महकेगा पर्यटन
Jharkhand News: रांची से पतरातू और रामगढ़ जाने वाले रास्ते पर फैली खूबसूरत पीठौरिया-पतरातू घाटी को नए सिरे से संवारने की योजना तैयार कर ली गई है. अपनी हरियाली, गहरी खाइयों और बादलों से बातें करती घुमावदार सड़कों के लिए पहचानी जाने वाली यह घाटी अब एक अनोखे अंदाज में नजर आएगी. झारखंड सरकार से जुड़े उपक्रम और संबंधित विभाग बरसात का मौसम बीतते ही घाटी के सुंदरीकरण का काम तेज गति से शुरू करने जा रहे हैं. इस पूरी योजना का मुख्य केंद्र बिंदु राज्य की पारंपरिक सोहराय पेंटिंग होगी. घाटी की खुली दीवारों और प्रमुख स्थानों पर सोहराय कलाकृतियां उकेरी जाएंगी, ताकि यहां आने वाला हर सैलानी प्रकृति के साथ-साथ झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को भी करीब से महसूस कर सके.
जलेबी मोड़ और हसीन वादियों का जादू
पीठौरिया-पतरातू घाटी को अक्सर झारखंड का स्वर्ग कहा जाता है. पहाड़ के सीने को चीरती हुई जलेबी जैसी घुमावदार सड़कें यहां ड्राइविंग करने वालों के लिए रोमांच पैदा करती हैं. चारों तरफ घने जंगल, पहाड़ियों से नीचे गिरते पानी के छोटे-छोटे झरने, पतरातू डैम का विशाल जलक्षेत्र और सड़क किनारे अठखेलियां करती बंदरों की टोलियां इस सफर को यादगार बना देती हैं. पर्व-त्योहारों और छुट्टियों के दिनों में यहां हजारों की संख्या में लोग घूमने पहुंचते हैं. स्वतंत्रता दिवस और नववर्ष जैसे मौकों पर तो पर्यटकों की भारी भीड़ के कारण कई बार घाटी में लंबा जाम भी लग जाता है. यह भीड़ बताती है कि यह जगह सैलानियों के दिल में कितनी खास जगह बना चुकी है.
सोहराय कला से मिलेगी नई पहचान
घाटी की दीवारों को सजाने के लिए चुनी गई सोहराय पेंटिंग झारखंड की बेहद प्राचीन और समृद्ध आदिवासी कला है. मुख्य रूप से हजारीबाग और आसपास के इलाकों में महिलाएं धान की फसल कटने के बाद और मवेशियों से जुड़े त्योहारों पर अपने घरों की कच्ची दीवारों को इस कला से सजाती हैं. इसमें मिट्टी, लकड़ी के कोयले और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करके पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों तथा ज्यामितीय आकृतियों को बहुत ही खूबसूरती से बनाया जाता है. साल 2020 में सोहराय पेंटिंग को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग भी मिल चुका है. रांची एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशनों और कई सरकारी इमारतों के बाद अब जब यह कला खुली वादियों में दिखेगी, तो पूरे इलाके की छटा ही बदल जाएगी.
स्थानीय लोगों को मिलेंगे रोजगार के अवसर
सुंदरीकरण की यह पहल केवल घाटी को चमकाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलेगी. घाटी में पेंटिंग का काम होने से स्थानीय कलाकारों और ग्रामीण महिलाओं को सीधे तौर पर काम मिलेगा. इसके अलावा जब घाटी ज्यादा आकर्षक और व्यवस्थित बनेगी, तो यहां पर्यटकों की संख्या में और बढ़ोतरी होगी. पर्यटकों की बढ़ती संख्या से इलाके के छोटे दुकानदारों, ढाबा संचालकों, बड़े होटलों और रिसॉर्ट्स के कारोबार में तेजी आएगी. इससे स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार और आजीविका के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे क्षेत्र का समग्र आर्थिक विकास संभव हो सकेगा.
सुरक्षा और स्वच्छता पर भी देना होगा ध्यान
घाटी को सुंदर बनाने के साथ-साथ यहां बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है. समाज के विभिन्न वर्गों, व्यवसायियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि केवल पेंटिंग बनाने से काम पूरा नहीं होगा. सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे घाटी के खतरनाक मोड़ों पर मजबूत रेलिंग लगाएं, व्यू प्वाइंट्स को सुरक्षित बनाएं और पूरे इलाके में कूड़ेदान की पर्याप्त व्यवस्था करें. पर्यटकों के लिए साफ पानी, रोशनी और सार्वजनिक शौचालयों का बेहतर प्रबंध होना चाहिए. नियमित रखरखाव की ठोस व्यवस्था होने से ही घाटी की यह नई सुंदरता लंबे समय तक बरकरार रह सकेगी.
बरसात के बाद जब पहाड़ियां अपने सबसे हरे-भरे रूप में होंगी, तब सोहराय के प्राकृतिक रंग इस घाटी को एक जादुई रूप देंगे. यह प्रयास झारखंड के पर्यटन मानचित्र पर पतरातू घाटी को एक नए मुकाम पर ले जाने का काम करेगा.
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