झारखंड का स्वर्ग कहे जाने वाली पतरातू घाटी का होगा कायाकल्प, पारंपरिक कला से महकेगा पर्यटन
Jharkhand News: रांची से पतरातू और रामगढ़ जाने वाले रास्ते पर फैली खूबसूरत पीठौरिया-पतरातू घाटी को नए सिरे से संवारने की योजना तैयार कर ली गई है. अपनी हरियाली, गहरी खाइयों और बादलों से बातें करती घुमावदार सड़कों के लिए पहचानी जाने वाली यह घाटी अब एक अनोखे अंदाज में नजर आएगी. झारखंड सरकार से जुड़े उपक्रम और संबंधित विभाग बरसात का मौसम बीतते ही घाटी के सुंदरीकरण का काम तेज गति से शुरू करने जा रहे हैं. इस पूरी योजना का मुख्य केंद्र बिंदु राज्य की पारंपरिक सोहराय पेंटिंग होगी. घाटी की खुली दीवारों और प्रमुख स्थानों पर सोहराय कलाकृतियां उकेरी जाएंगी, ताकि यहां आने वाला हर सैलानी प्रकृति के साथ-साथ झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को भी करीब से महसूस कर सके.
जलेबी मोड़ और हसीन वादियों का जादू
पीठौरिया-पतरातू घाटी को अक्सर झारखंड का स्वर्ग कहा जाता है. पहाड़ के सीने को चीरती हुई जलेबी जैसी घुमावदार सड़कें यहां ड्राइविंग करने वालों के लिए रोमांच पैदा करती हैं. चारों तरफ घने जंगल, पहाड़ियों से नीचे गिरते पानी के छोटे-छोटे झरने, पतरातू डैम का विशाल जलक्षेत्र और सड़क किनारे अठखेलियां करती बंदरों की टोलियां इस सफर को यादगार बना देती हैं. पर्व-त्योहारों और छुट्टियों के दिनों में यहां हजारों की संख्या में लोग घूमने पहुंचते हैं. स्वतंत्रता दिवस और नववर्ष जैसे मौकों पर तो पर्यटकों की भारी भीड़ के कारण कई बार घाटी में लंबा जाम भी लग जाता है. यह भीड़ बताती है कि यह जगह सैलानियों के दिल में कितनी खास जगह बना चुकी है.
सोहराय कला से मिलेगी नई पहचान
घाटी की दीवारों को सजाने के लिए चुनी गई सोहराय पेंटिंग झारखंड की बेहद प्राचीन और समृद्ध आदिवासी कला है. मुख्य रूप से हजारीबाग और आसपास के इलाकों में महिलाएं धान की फसल कटने के बाद और मवेशियों से जुड़े त्योहारों पर अपने घरों की कच्ची दीवारों को इस कला से सजाती हैं. इसमें मिट्टी, लकड़ी के कोयले और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करके पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों तथा ज्यामितीय आकृतियों को बहुत ही खूबसूरती से बनाया जाता है. साल 2020 में सोहराय पेंटिंग को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग भी मिल चुका है. रांची एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशनों और कई सरकारी इमारतों के बाद अब जब यह कला खुली वादियों में दिखेगी, तो पूरे इलाके की छटा ही बदल जाएगी.
स्थानीय लोगों को मिलेंगे रोजगार के अवसर
सुंदरीकरण की यह पहल केवल घाटी को चमकाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलेगी. घाटी में पेंटिंग का काम होने से स्थानीय कलाकारों और ग्रामीण महिलाओं को सीधे तौर पर काम मिलेगा. इसके अलावा जब घाटी ज्यादा आकर्षक और व्यवस्थित बनेगी, तो यहां पर्यटकों की संख्या में और बढ़ोतरी होगी. पर्यटकों की बढ़ती संख्या से इलाके के छोटे दुकानदारों, ढाबा संचालकों, बड़े होटलों और रिसॉर्ट्स के कारोबार में तेजी आएगी. इससे स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार और आजीविका के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे क्षेत्र का समग्र आर्थिक विकास संभव हो सकेगा.
सुरक्षा और स्वच्छता पर भी देना होगा ध्यान
घाटी को सुंदर बनाने के साथ-साथ यहां बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है. समाज के विभिन्न वर्गों, व्यवसायियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि केवल पेंटिंग बनाने से काम पूरा नहीं होगा. सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे घाटी के खतरनाक मोड़ों पर मजबूत रेलिंग लगाएं, व्यू प्वाइंट्स को सुरक्षित बनाएं और पूरे इलाके में कूड़ेदान की पर्याप्त व्यवस्था करें. पर्यटकों के लिए साफ पानी, रोशनी और सार्वजनिक शौचालयों का बेहतर प्रबंध होना चाहिए. नियमित रखरखाव की ठोस व्यवस्था होने से ही घाटी की यह नई सुंदरता लंबे समय तक बरकरार रह सकेगी.
बरसात के बाद जब पहाड़ियां अपने सबसे हरे-भरे रूप में होंगी, तब सोहराय के प्राकृतिक रंग इस घाटी को एक जादुई रूप देंगे. यह प्रयास झारखंड के पर्यटन मानचित्र पर पतरातू घाटी को एक नए मुकाम पर ले जाने का काम करेगा.
यह भी पढ़ें: झारखंड में अब शव हटाने की वजह से लेट नहीं होगी ट्रेन, खास सिस्टम हुआ लागू
SP Krishna Kumar Bishnoi: छलक पड़े संभल SP कृष्ण कुमार बिश्नोई के आंसू.. बिजनौर विदा होने से पहले कह दी ये दिल की बात, आप भी सुनें
संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई तबादले के बाद विदाई समारोह में भावुक हो गए और मातहतों को संबोधित करते हुए रो पड़े।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation
IBC24









