बैक्टीरिया ‘फॉरएवर केमिकल्स’ को लेकर जापानी शोध में बड़ा खुलासा
टोक्यो, 22 अगस्त (आईएएनएस)। जापान में एक शोध दल ने नदी की तलछट में ऐसे बैक्टीरिया की पहचान की है, जो पानी और पर्यावरण में मौजूद बेहद टिकाऊ प्रदूषक पीएफएएस को हटाने में सक्षम हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह खोज इन तथाकथित ‘फॉरएवर केमिकल्स’ से होने वाले प्रदूषण से निपटने का कम लागत वाला तरीका विकसित करने की उम्मीद जगाती है।
जापानी विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में पाया गया कि प्रदूषित नदी की तलछट से अलग किए गए कुछ बैक्टीरियल स्ट्रेन पीएफओएस और पीएफओए की सांद्रता को कम कर सकते हैं। पीएफएएस ऐसे रसायनों का एक बड़ा समूह है, जिनके कार्बन-फ्लोरीन बंध बेहद मजबूत होते हैं। इसी वजह से ये प्राकृतिक वातावरण में आसानी से टूटते नहीं हैं और लंबे समय तक पानी, मिट्टी तथा वन्यजीवों में बने रह सकते हैं। इस कारण इन्हें ‘फॉरएवर केमिकल्स’ कहा जाता है।
इस का इस्तेमाल पानी और तेल को दूर रखने की क्षमता तथा रासायनिक स्थिरता के कारण विभिन्न उत्पादों में किया जाता है। इनका उपयोग कपड़ों से लेकर अग्निशमन फोम तक में किया गया है। सैन्य प्रतिष्ठानों और औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास भी इन रसायनों की अधिक मात्रा पाई गई है।
कोबे विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर हिदेयुकी इनुई ने कहा, “यदि हम प्राकृतिक पर्यावरण से एकत्र किए गए बैक्टीरिया को संवर्धित कर उनका इस्तेमाल कर सकें, तो कम लागत में प्रदूषण को दूर करना संभव होगा।”
क्योडो न्यूज एजेंसी के मुताबिक, शोध दल ने ओसाका प्रीफेक्चर की सामोंडो नदी के किनारे से तलछट (गाद) के नमूने एकत्र किए। इसके बाद वैज्ञानिकों ने ऐसे बैक्टीरियल स्ट्रेन को अलग कर उनकी पहचान की, जो पीएफओएस और पीएफओए की सांद्रता कम करने में सक्षम थे। यह अध्ययन जर्नल ऑफ वॉटर प्रोसेस इंजीनियरिंग के अगस्त अंक में ऑनलाइन प्रकाशित हुआ है।
शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला के बाहर भी इसकी उपयोगिता की जांच की। उन्होंने पाया कि एक बैक्टीरियल स्ट्रेन ने औद्योगिक कचरा लैंडफिल से निकलने वाले लीचेट में पीएफएएस की मात्रा को उल्लेखनीय रूप से कम कर दिया।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि पीएफएएस का बैक्टीरियल कोशिकाओं पर अवशोषित होना इन हानिकारक रसायनों को हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, कुछ सूक्ष्मजीवों द्वारा पीएफएएस को तोड़ने की क्षमता पहले भी सामने आ चुकी है, लेकिन इस प्रक्रिया में कौन से बैक्टीरिया प्रमुख भूमिका निभाते हैं तथा रासायनिक विघटन और कोशिकाओं पर अवशोषण में से किसका कितना योगदान है, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
--आईएएनएस
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Hafiz Saeed NIA Summons: पहलगाम आतंकी हमले में हाफिज सईद पर कसा शिकंजा; विदेश मंत्रालय के जरिए समन भेजेगी NIA
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को पर्यटकों पर हुए भीषण आतंकी हमले की जांच में एनआईए ने पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उसके सरगना हाफिज सईद पर शिकंजा कस दिया है।
हमले में 26 बेकसूर लोगों की जान गई थी। जांच एजेंसी ने हाल ही में हाफिज सईद के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके बाद अब जम्मू की विशेष एनआईए अदालत में उसका ट्रायल शुरू कराने की औपचारिक कानूनी प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
विदेश मंत्रालय के जरिए भेजा जाएगा कोर्ट समन
एनआईए की ओर से आतंकी सरगना हाफिज सईद को कोर्ट का समन भारत के विदेश मंत्रालय के जरिए औपचारिक रूप से पाकिस्तान भेजा जाएगा। इस समन के जरिए 76 वर्षीय हाफिज सईद को जम्मू स्थित विशेष एनआईए अदालत में ट्रायल के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया जाएगा।
विशेष जज द्वारा पहले ही उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया जा चुका है, ताकि उसे न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में लाया जा सके।
सप्लीमेंट्री चार्जशीट में साजिश और युद्ध छेड़ने का आरोप
एनआईए ने अपनी जांच में पाया कि पहलगाम हमले की पूरी साजिश सीमा पार पाकिस्तान में हाफिज सईद और उसके हैंडलर्स ने रची थी। एजेंसी ने उसे व्यक्तिगत रूप से और प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा तथा उसके मुखौटा संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) के प्रमुख के रूप में आरोपी बनाया है।
उस पर भारतीय न्याय संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और आतंक फैलाने की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
पेश न होने पर बिना हाजिरी के चलेगा ट्रायल और आएगा फैसला
यदि हाफिज सईद अंतरराष्ट्रीय कानूनी समन के बावजूद अदालत में पेश नहीं होता है, तो एनआईए कोर्ट भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 356 के तहत आगे की कार्रवाई करेगी। इस कानूनी प्रावधान के तहत अदालत भगोड़े आरोपी की गैर-मौजूदगी में भी ट्रायल की प्रक्रिया पूरी कर सकती है और अंतिम फैसला सुना सकती है।
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