अरुणाचल प्रदेश के सांसद तापिर गाव ने शनिवार को कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की कथित घुसपैठ को लेकर लोगों की चिंता इस बात की याद दिलाती है कि स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों की चेतावनियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ऊपरी सुबनसिरी जिले के तक्सिंग क्षेत्र में चीन की कथित गतिविधियों को लेकर हाल में हुए विवाद के बाद उन्होंने यह टिप्पणी की है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा है कि भारत चीन से लगे सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े मामलों को बेहद गंभीर मानता है और एलएसी पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है।
भारतीय सेना ने घुसपैठ की खबरों को स्पष्ट रूप से खारिज किया है, जबकि मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि वह इस मामले को लेकर आरोप लगाने वाले स्थानीय निवासियों और रक्षा बलों दोनों से बात करेंगे। भाजपा सांसद गाव ने कहा कि उन्होंने 2019 में संसद में चीन की घुसपैठ का मुद्दा उठाया था, लेकिन लोगों ने इसे खास तवज्जो नहीं दी और यहां तक कह दिया कि ऐसी चिंताएं जाहिर करने से भारतीय सेना का हौसला कम हो सकता है। सांसद ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है।
इसकी संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि भारत शांति, बातचीत और मित्रता के पक्ष में है, लेकिन इसकी क्षेत्रीय अखंडता को कोई समझौता नहीं हो सकता। तक्सिंग में कथित घुसपैठ को लेकर विवाद तब शुरू हुआ, जब क्षेत्र के लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाली नाह वेलफेयर सोसाइटी (एनडब्ल्यूएस) ने सीमा के पास पीएलए (चीनी सेना) की गतिविधियों और अतिक्रमण का दावा किया।
सेना ने इन आरोपों को गलत और निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। सेना का स्पष्ट कहना है कि चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय क्षेत्र पर कब्जा करने या अरुणाचल प्रदेश के भीतर शिविर स्थापित करने की रिपोर्ट में कोई सच्चाई नहीं है।
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डिजिटल इंडिया के दौर में ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए ई-चालान व्यवस्था काफी प्रभावी साबित हुई है। लेकिन इसी सुविधा का फायदा उठाकर साइबर अपराधी लोगों को ठगने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। आजकल हजारों वाहन चालकों के मोबाइल पर फर्जी ई-चालान के संदेश भेजे जा रहे हैं, जिनमें जुर्माना भरने का दबाव बनाकर लोगों को नकली वेबसाइट पर ले जाया जाता है। ऐसे में बिना जांच-पड़ताल किए किसी भी लिंक पर क्लिक करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
कैसे काम करता है यह नया साइबर फ्रॉड?
साइबर ठग सबसे पहले वाहन मालिकों को ट्रैफिक चालान का एसएमएस भेजते हैं। संदेश में लिखा होता है कि आपके वाहन पर ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का जुर्माना लगाया गया है और निर्धारित समय के भीतर भुगतान नहीं करने पर अतिरिक्त कार्रवाई की जाएगी। मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही व्यक्ति एक फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाता है, जो देखने में सरकारी पोर्टल जैसी लगती है।
इसके बाद वहां बैंक अकाउंट, डेबिट या क्रेडिट कार्ड, यूपीआई और ओटीपी जैसी संवेदनशील जानकारी मांगी जाती है। कई मामलों में लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल में हानिकारक सॉफ्टवेयर डाउनलोड हो जाता है, जिससे साइबर अपराधियों को फोन और बैंकिंग ऐप्स तक पहुंच मिल सकती है।
असली और नकली ई-चालान मैसेज की पहचान कैसे करें?
फर्जी संदेशों से बचने का सबसे आसान तरीका वेबसाइट के लिंक की जांच करना है। सरकारी ई-चालान से जुड़े सभी आधिकारिक लिंक .gov.in डोमेन पर होते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि लिंक echallan.parivahan.gov.in जैसे सरकारी डोमेन का है, तो उसकी विश्वसनीयता अधिक होती है।
वहीं यदि एसएमएस में .com, .net, .xyz, .apk, bit.ly या किसी अन्य शॉर्ट लिंक का उपयोग किया गया है, तो सतर्क हो जाएं। ऐसे लिंक साइबर ठगी का हिस्सा हो सकते हैं। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी जांच अवश्य करें।
गलती से लिंक खुल जाए तो तुरंत उठाएं ये कदम
यदि आपने अनजाने में फर्जी लिंक खोल दिया है या बैंकिंग से जुड़ी कोई जानकारी साझा कर दी है, तो समय गंवाए बिना अपने बैंक की हेल्पलाइन पर संपर्क कर कार्ड, नेट बैंकिंग या यूपीआई सेवाओं को अस्थायी रूप से ब्लॉक कराएं। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें और ऑनलाइन साइबर क्राइम पोर्टल पर भी पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं। जितनी जल्दी शिकायत होगी, धन वापस मिलने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है।
ई-चालान चेक करने का सही तरीका
यदि आपको अपने वाहन के चालान की जानकारी चाहिए, तो हमेशा केवल आधिकारिक परिवहन विभाग के ई-चालान पोर्टल पर जाकर ही स्टेटस जांचें। किसी भी सोशल मीडिया पोस्ट, व्हाट्सऐप मैसेज या अनजान एसएमएस में दिए गए लिंक के जरिए भुगतान करने से बचें। सरकारी पोर्टल पर वाहन नंबर या चालान नंबर डालकर पूरी जानकारी सुरक्षित तरीके से प्राप्त की जा सकती है।
इन आसान सावधानियों से रहें सुरक्षित
साइबर अपराधियों से बचाव के लिए कुछ छोटी-छोटी सावधानियां बेहद कारगर साबित होती हैं। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। अपने मोबाइल में नियमित रूप से सिक्योरिटी अपडेट और एंटीवायरस सक्रिय रखें। यदि कोई संदिग्ध संदेश मिले, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट करें। जागरूकता ही साइबर ठगी से बचने का सबसे मजबूत हथियार है।
- डॉ. अनिमेष शर्मा
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