Janhvi Kapoor को दिल्ली हाईकोर्ट से आंशिक राहत! अश्लील कंटेंट हटाने का आदेश, लेकिन फैन पेज पर पूरी तरह रोक से इनकार
अभिनेत्री जान्हवी कपूर द्वारा दायर पर्सनैलिटी राइट्स (Personality Rights) से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इंटरनेट पर मौजूद उनके खिलाफ आपत्तिजनक, अश्लील और पोर्नोग्राफिक कंटेंट को तुरंत हटाने का आदेश दिया है। हालांकि, अदालत ने अभिनेत्री के नाम या फोटो से बने सभी फैन पेजों और लिंक को एकमुश्त ब्लॉक करने की मांग को खारिज कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने 552 URL को हटाने का निर्देश दिया। शुरुआती जांच के दौरान, कोर्ट ने पाया कि इन URL पर मौजूद कंटेंट बहुत ज़्यादा अश्लील या पोर्नोग्राफिक लग रहा था।
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फैन पेज के बारे में कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने साफ किया कि किसी सेलिब्रिटी के नाम से चलने वाला हर फैन पेज अपने आप गैर-कानूनी नहीं होता। ऐसे पेजों पर तस्वीरें, वीडियो, फिल्म से जुड़ी जानकारी, तारीफ या आलोचना हो सकती है। कोर्ट ने सवाल किया कि सिर्फ़ इसलिए सभी फैन क्लब कैसे बंद किए जा सकते हैं क्योंकि वे किसी सेलिब्रिटी के नाम या तस्वीर का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, अगर किसी पेज पर अश्लील कंटेंट है या वह पैसे कमाने के लिए सेलिब्रिटी की पहचान का इस्तेमाल करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
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मामले में AI से बने नकली कंटेंट का मुद्दा भी शामिल था
खबरों के मुताबिक, जान्हवी की याचिका में AI से बनी तस्वीरों/डीपफेक, नकली अकाउंट (इम्पर्सनेशन अकाउंट) और अश्लील कंटेंट का मुद्दा भी उठाया गया था। कोर्ट ने कहा कि ऐसे गंभीर और साफ तौर पर आपत्तिजनक कंटेंट पर अलग से विचार किया जाना चाहिए।
जान्हवी कपूर के पर्सनैलिटी राइट्स मामले के बारे में और जानकारी
जानकारी के लिए बता दें कि जान्हवी कपूर ने दिल्ली हाई कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। इसमें उन्होंने AI से बने डीपफेक, अश्लील कंटेंट, नकली अकाउंट और हज़ारों ऑनलाइन लिंक पर बिना इजाज़त कमर्शियल इस्तेमाल के खिलाफ अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा की मांग की थी। हाल ही में, दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ खास अश्लील URL को हटाने का आदेश दिया, लेकिन फैन पेज पर पूरी तरह रोक लगाने से इनकार कर दिया। जान्हवी कपूर का वर्क फ्रंट
काम की बात करें तो, जान्हवी कपूर को आखिरी बार तेलुगु एक्शन ड्रामा 'पेद्दी' में देखा गया था, जिसमें राम चरण और शिवराजकुमार ने अहम भूमिकाएँ निभाई थीं। बुची बाबू सना के निर्देशन में बनी यह फ़िल्म 4 जून, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी। इसका प्रीमियर 9 जुलाई, 2026 को नेटफ़्लिक्स पर हुआ, जबकि इसका हिंदी वर्शन 30 जुलाई, 2026 को रिलीज़ किया गया था।
‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान के तहत 2.5 लाख छात्रों ने भेजे निबंध, 140 श्रेष्ठ विचारों पर CM धामी स्वयं करेंगे विद्यार्थियों से संवाद
Uttarakhand: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर शुरू किए गए ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान को प्रदेश के विद्यार्थियों से अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिल रही है. राज्यभर से अब तक 2.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने अपने निबंध एवं सुझाव पोर्टल पर जमा कर उत्तराखंड के भविष्य को लेकर अपना विजन साझा किया है. बता दें कि मुख्यमंत्री धामी ने बीते 10 अगस्त को प्रदेशभर के कक्षा 11वीं एवं 12वीं के लगभग तीन लाख विद्यार्थियों के साथ ऑनलाइन संवाद करते हुए उनसे आह्वान किया था कि वे बताएं कि आने वाले वर्षों में वे अपने उत्तराखंड को किस रूप में देखना चाहते हैं. मुख्यमंत्री के इस आह्वान के बाद सरकारी एवं निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों ने बड़े उत्साह के साथ अभियान में भागीदारी की.
विद्यार्थियों ने इन विषयों पर साझा किया अपना विजन
विद्यार्थियों ने पर्यटन, रोजगार, सामाजिक विकास, वन एवं पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक सहित आठ प्रमुख विषयों पर अपने सुझाव और नए विचार प्रस्तुत किए हैं. खास बात यह है कि ये केवल निबंध नहीं, बल्कि उत्तराखंड की नई पीढ़ी की आकांक्षाओं और भविष्य के प्रदेश को लेकर उनकी सोच का दस्तावेज बन रहे हैं. मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों से प्राप्त अच्छे और व्यावहारिक सुझावों का स्वयं अवलोकन किया जाएगा तथा उपयोगी विचारों को राज्य की नीतियों एवं भविष्य की कार्ययोजनाओं में शामिल करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा.
140 श्रेष्ठ विचारों पर होगी चर्चा
इस अभियान के अंतर्गत 140 श्रेष्ठ विचारों का चयन किया जाएगा. चयनित विद्यार्थियों को शासन के वरिष्ठ अधिकारियों एवं सचिवों के साथ अपने विचारों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इन विद्यार्थियों के साथ स्वयं संवाद कर उनके विजन और अनुभवों को सुनेंगे. इसके साथ ही श्रेष्ठ विद्यार्थियों को करियर एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग और अन्य पुरस्कार प्रदान किए जाने की भी व्यवस्था की गई है.
छात्रों को दिया जा रहा डिजिटल प्रमाण पत्र
पोर्टल पर निबंध जमा करने वाले विद्यार्थियों को डिजिटल प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जा रहा है. अभियान में प्रदेश के पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों के साथ ही सरकारी और निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों की व्यापक भागीदारी देखने को मिल रही है. अभियान के संयोजक डॉ. राहुल अग्रवाल ने बताया कि नई पीढ़ी को सीधे राज्य की विकास प्रक्रिया और नीति निर्माण की सोच से जोड़ने की यह एक अभिनव पहल है. प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से लगातार प्रविष्टियां प्राप्त हो रही हैं. 24 अगस्त निबंध जमा करने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं अभियान की नियमित समीक्षा कर रहे हैं. सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की युवा पीढ़ी केवल विकास योजनाओं की लाभार्थी न रहे, बल्कि ‘विकसित उत्तराखंड’ की संकल्पना और नीति निर्माण में सक्रिय भागीदार भी बने.
सीएम धामी ने इस अभियान पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि- “हमारे विद्यार्थी केवल उत्तराखंड का भविष्य नहीं हैं, बल्कि उनके विचार आज के उत्तराखंड को भी नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं. ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ के माध्यम से हम नई पीढ़ी की सोच को सुन रहे हैं. युवाओं के अच्छे और व्यावहारिक सुझावों को प्रदेश के विकास में स्थान दिया जाएगा. हमारा संकल्प है कि युवा जिस उत्तराखंड का सपना देख रहे हैं, उसे साकार करने में उन्हें भी सहभागी बनाया जाए.”
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