Delhi Master Plan 2047 में Urban Farming पर जोर, खाली छतों और भूखंडों पर होगी खेती
दिल्ली के नए मास्टर प्लान में इसे अधिक हरी-भरी और टिकाऊ राजधानी बनाने के दृष्टिकोण के तहत सब्जयों की खेती, छत पर खेती, ऊर्ध्वाधर उद्यान (वर्टिकल गार्डन) और यहां तक कि हाइड्रोपोनिक्स और एक्वापोनिक्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। शहरी खेती जल्द ही दिल्ली के नजारे का एक प्रमुख हिस्सा बन सकती है। हाइड्रोपोनिक्स खेती की एक ऐसी तकनीक है जिसमें मिट्टी के बिना पौधे उगाए जाते हैं।
इसमें पौधों की जड़ों को पानी में घुले पोषक तत्व (जरूरी खनिज और खाद) दिए जाते हैं, जिससे पौधे बढ़ते हैं। वहीं एक्वापोनिक्स खेती की एक ऐसी तकनीक है जिसमें मछली पालन और पौधों की खेती एक साथ की जाती है। बृहस्पतिवार को जारी दिल्ली मास्टर प्लान-2047 (एमपीडी 2047) में इमारतों और भूखंडों के स्तर पर शहरी खेती तथा सामुदायिक उद्यान विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
इसके तहत निवासी और समुदाय शहर में बेकार पड़ी जगहों का इस्तेमाल खाद्य उत्पादन के लिए कर सकेंगे। योजना के तहत घरों की छतों, खाली पड़ी जमीनों और सामुदायिक जगहों पर कई तरह की शहरी खेती को बढ़ावा देने की बात कही गई। इनमें सब्जी उद्यान, गमलों में खेती, औषधीय पौधों की बागवानी, ऊर्ध्वाधर खेती, हाइड्रोपोनिक्स और एक्वापोनिक्स शामिल हैं।
घनी आबादी वाले दिल्ली जैसे शहर में (जहां पारंपरिक खेती के लिए जमीन की उपलब्धता सीमित है) शहरी खेती की यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मास्टर प्लान के अनुसार, खाली भूखंडों का इस्तेमाल अस्थायी तौर पर शहरी खेती या बागवानी के लिए किया जा सकता है। वहीं, इमारतों के अंदर ऊर्ध्वाधर खेती को भवन की संरचनात्मक सुरक्षा संबंधी मानकों को पूरा करने की शर्त पर अनुमति दी जाएगी।
Sambhal में Chamunda Temple की जमीन से हटाया गया अवैध कब्जा, प्रशासन ने की कार्रवाई
उत्तर प्रदेश में संभल जिले के सिरसी नगर पंचायत क्षेत्र स्थित चामुंडा मंदिर की जमीन पर हुए अवैध कब्जे को जिला प्रशासन ने हटाने की कार्रवाई शुरू की। एक प्रशासनिक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि मंदिर की 72 वर्ग मीटर जमीन पर धर्मकांटा बनाकर कब्जा किया गया था।
उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) विकास चंद्र ने बताया कि सिरसी में अभिलेखों में गाटा संख्या-692 (खसरा) चामुंडा मंदिर के नाम दर्ज है। उन्होंने बताया कि मंजर अब्बास ने इस जमीन के 72 वर्ग मीटर हिस्से पर धर्मकांटा और मकान के रूप में अवैध निर्माण कर रखा था। उन्होंने बताया कि इस मामले में तहसीलदार अदालत में मुकदमा चला, जिसमें दोनों पक्षों को अपना-अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया।
मार्च 2026 में तहसीलदार ने मंजर अब्बास के खिलाफ बेदखली का आदेश दिया, लेकिन इसके खिलाफ उसने (अब्बास ने) जिलाधिकारी की अदालत में अपील की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसी आदेश के अनुपालन में आज बेदखली की कार्रवाई की गई। चामुंडा मंदिर के प्रबंधक विमल सैनी ने बताया कि गाटा संख्या-692 मंदिर की भूमि है, जो एक बीघा से अधिक है।
पिछले दो साल से मंदिर का निर्माण चल रहा है। पड़ोसी मंजर अब्बास ने 72 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा कर रखा था, जिससे मंदिर का गेट नहीं बन पा रहा था। कब्जा हटने से अब गेट का निर्माण हो सकेगा।
उन्होंने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले भी मंदिर की दूसरी तरफ असलम, सलीम, मुबारक आदि का अवैध कब्जा हटवाया गया था। मंजर अब्बास ने करीब 20 साल पहले धर्मकांटा और कोठी बनाकर कब्जा कर रखा था। मंजर अब्बास पहले कांग्रेस के नगर अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
वहीं मंजर अब्बास ने कहा कि मंदिर से उनका कोई विवाद नहीं है। उन्होंने दावा किया कि 35-40 साल पहले उन्होंने बैनामा कराया था। उस समय बराबर में चामुंडा मंदिर की जगह थी, लेकिन मंदिर नहीं बना था।
बाद में पूरी सैनी बिरादरी की मौजूदगी में मंदिर की नींव रखी गई थी। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने ग्राम समाज बनाम मंजर अब्बास मामले में तहसीलदार के फैसले के खिलाफ जिलाधिकारी के यहां अपील की थी, जो खारिज हो गई। अब मैंने कमिश्नर के यहां अपील की है, लेकिन कमिश्नर साहब मौजूद नहीं हैं, इसलिए आदेश नहीं हुआ है।
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