Sambhal में Chamunda Temple की जमीन से हटाया गया अवैध कब्जा, प्रशासन ने की कार्रवाई
उत्तर प्रदेश में संभल जिले के सिरसी नगर पंचायत क्षेत्र स्थित चामुंडा मंदिर की जमीन पर हुए अवैध कब्जे को जिला प्रशासन ने हटाने की कार्रवाई शुरू की। एक प्रशासनिक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि मंदिर की 72 वर्ग मीटर जमीन पर धर्मकांटा बनाकर कब्जा किया गया था।
उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) विकास चंद्र ने बताया कि सिरसी में अभिलेखों में गाटा संख्या-692 (खसरा) चामुंडा मंदिर के नाम दर्ज है। उन्होंने बताया कि मंजर अब्बास ने इस जमीन के 72 वर्ग मीटर हिस्से पर धर्मकांटा और मकान के रूप में अवैध निर्माण कर रखा था। उन्होंने बताया कि इस मामले में तहसीलदार अदालत में मुकदमा चला, जिसमें दोनों पक्षों को अपना-अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया।
मार्च 2026 में तहसीलदार ने मंजर अब्बास के खिलाफ बेदखली का आदेश दिया, लेकिन इसके खिलाफ उसने (अब्बास ने) जिलाधिकारी की अदालत में अपील की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसी आदेश के अनुपालन में आज बेदखली की कार्रवाई की गई। चामुंडा मंदिर के प्रबंधक विमल सैनी ने बताया कि गाटा संख्या-692 मंदिर की भूमि है, जो एक बीघा से अधिक है।
पिछले दो साल से मंदिर का निर्माण चल रहा है। पड़ोसी मंजर अब्बास ने 72 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा कर रखा था, जिससे मंदिर का गेट नहीं बन पा रहा था। कब्जा हटने से अब गेट का निर्माण हो सकेगा।
उन्होंने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले भी मंदिर की दूसरी तरफ असलम, सलीम, मुबारक आदि का अवैध कब्जा हटवाया गया था। मंजर अब्बास ने करीब 20 साल पहले धर्मकांटा और कोठी बनाकर कब्जा कर रखा था। मंजर अब्बास पहले कांग्रेस के नगर अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
वहीं मंजर अब्बास ने कहा कि मंदिर से उनका कोई विवाद नहीं है। उन्होंने दावा किया कि 35-40 साल पहले उन्होंने बैनामा कराया था। उस समय बराबर में चामुंडा मंदिर की जगह थी, लेकिन मंदिर नहीं बना था।
बाद में पूरी सैनी बिरादरी की मौजूदगी में मंदिर की नींव रखी गई थी। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने ग्राम समाज बनाम मंजर अब्बास मामले में तहसीलदार के फैसले के खिलाफ जिलाधिकारी के यहां अपील की थी, जो खारिज हो गई। अब मैंने कमिश्नर के यहां अपील की है, लेकिन कमिश्नर साहब मौजूद नहीं हैं, इसलिए आदेश नहीं हुआ है।
Jantar Mantar पर जातिगत Reservation के खिलाफ प्रदर्शन, आर्थिक आधार पर नीति की मांग
दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुक्रवार को सैकड़ों लोग जाति आधारित आरक्षण के विरोध में एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सकारात्मक भेदभाव की नीतियां जाति के बजाय आर्थिक आधार पर तय की जानी चाहिए। यह प्रदर्शन “आरक्षण हटाओ आंदोलन” नामक एक इंस्टाग्राम पेज की अपील के बाद आयोजित किया गया।
बाद में इस पेज ने लोगों से जंतर-मंतर पर प्रत्यक्ष प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी। इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
प्रमुख स्थानों पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए थे तथा प्रदर्शन स्थल के आसपास अवरोधक लगाए गए थे। प्रदर्शनकारियों में अधिकांश पुरुष थे। वे बैनर, पोस्टर और भगवा झंडे लेकर पहुंचे और अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा से जुड़े एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हमारी मांग है कि यह तय करते समय आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए कि किसे सरकारी सहायता की जरूरत है। जाति की परवाह किए बिना गरीब व्यक्ति को शिक्षा, कोचिंग और अन्य जरूरतों के लिए सहायता दी जानी चाहिए।” एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि वे मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा चाहते हैं। उनका तर्क था कि आरक्षण का लाभ हमेशा समाज के सबसे वंचित वर्गों तक नहीं पहुंच पाता।
उन्होंने कहा, “हम कई वर्षों से यह मुद्दा उठाते रहे हैं। हमारा कहना है कि सरकार को यह समीक्षा करनी चाहिए कि मौजूदा व्यवस्था अपने निर्धारित उद्देश्य को पूरा कर रही है या नहीं और क्या इसका लाभ जमीनी स्तर पर लोगों तक पहुंच रहा है।” कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था में ‘क्रीमी लेयर’ का प्रावधान लागू करने की भी मांग की। उन्होंने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से संबंधित नीतियों में बदलाव की मांग भी की।
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम यह नहीं कह रहे हैं कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बिना सहायता के छोड़ दिया जाना चाहिए। हमारा कहना है कि सहायता उन लोगों तक पहुंचनी चाहिए, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है। इसमें छात्रवृत्ति, फीस में सहायता और कोचिंग जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं।” एक प्रदर्शनकारी ने दशकों पहले लागू किए गए आरक्षण प्रावधानों को अब भी जारी रखने पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि सरकार को मौजूदा सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के संदर्भ में आरक्षण नीति की समीक्षा करनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम तथा उच्च शिक्षा से जुड़ी नीतियों, जिसमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) का ढांचा भी शामिल है, से संबंधित मुद्दे भी उठाए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुबह जंतर-मंतर पर जुटे कुछ लोगों को वहां से हटा दिया गया, क्योंकि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी।
उन्होंने बताया कि पुलिसकर्मी इलाके की ओर आने वाले लोगों की भी जांच कर रहे थे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन स्थल के आसपास इंटरनेट जैमर लगाए गए थे, जिससे इलाके में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया था। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी।
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