UP में Cab Aggregators के लिए नई नियमावली लागू, Dynamic Pricing पर लगाई 50% की सीमा
उत्तर प्रदेश सरकार ने परिवहन और आपूर्ति सेवाओं को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने के लिए उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक एवं वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली 2026 लागू कर दी है। नियमावली के तहत परिवहन एग्रीगेटरों द्वारा लिए जाने वाले ‘डायनेमिक’ किराये को निर्धारित मूल किराये से अधिकतम 50 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है। बाइस मई को अधिसूचित नियमावली में लाइसेंस, सुरक्षा, चालक कल्याण, किराया, शिकायत निवारण, वाहन प्रदूषण की निगरानी और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के नियम तय किए गए हैं।
सरकार ने सेवाओं और वाहनों की निगरानी के लिए ‘यूपी माय फ्लीट’ एग्रीगेटर पोर्टल भी शुरू किया है। ये नियम उन डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पर लागू होंगे जो यात्रियों को वाहन की सुविधा देते हैं या सामान की डिलीवरी के लिए चालकों को दुकानदारों, ई-कॉमर्स कंपनियों या सामान भेजने वालों से जोड़ते हैं। राज्य सरकार ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि इन नियमों के दायरे में ऐप से संचालित यात्री परिवहन सेवाओं के साथ-साथ सामान पहुंचाने की सेवाएं भी आएंगी।
नियमों के तहत प्रदाताओं को 25,000 रुपये आवेदन शुल्क और पांच लाख रुपये लाइसेंस शुल्क देना होगा। सुरक्षा जमा राशि उनके वाहनों के बेड़े के आकार से जुड़ी होगी। नियमों के तहत 100 बसों या 1,000 अन्य मोटर वाहनों तक के बेड़े के लिए 10 लाख रुपये, 1,000 बसों या 10,000 अन्य मोटर वाहनों तक के बेड़े के लिए 25 लाख रुपये और 1,000 बसों या 10,000 अन्य मोटर वाहनों से अधिक के बेड़े के लिए 50 लाख रुपये की सुरक्षा जमा राशि तय की गई है।
Delhi Master Plan 2047 में Urban Farming पर जोर, खाली छतों और भूखंडों पर होगी खेती
दिल्ली के नए मास्टर प्लान में इसे अधिक हरी-भरी और टिकाऊ राजधानी बनाने के दृष्टिकोण के तहत सब्जयों की खेती, छत पर खेती, ऊर्ध्वाधर उद्यान (वर्टिकल गार्डन) और यहां तक कि हाइड्रोपोनिक्स और एक्वापोनिक्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। शहरी खेती जल्द ही दिल्ली के नजारे का एक प्रमुख हिस्सा बन सकती है। हाइड्रोपोनिक्स खेती की एक ऐसी तकनीक है जिसमें मिट्टी के बिना पौधे उगाए जाते हैं।
इसमें पौधों की जड़ों को पानी में घुले पोषक तत्व (जरूरी खनिज और खाद) दिए जाते हैं, जिससे पौधे बढ़ते हैं। वहीं एक्वापोनिक्स खेती की एक ऐसी तकनीक है जिसमें मछली पालन और पौधों की खेती एक साथ की जाती है। बृहस्पतिवार को जारी दिल्ली मास्टर प्लान-2047 (एमपीडी 2047) में इमारतों और भूखंडों के स्तर पर शहरी खेती तथा सामुदायिक उद्यान विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
इसके तहत निवासी और समुदाय शहर में बेकार पड़ी जगहों का इस्तेमाल खाद्य उत्पादन के लिए कर सकेंगे। योजना के तहत घरों की छतों, खाली पड़ी जमीनों और सामुदायिक जगहों पर कई तरह की शहरी खेती को बढ़ावा देने की बात कही गई। इनमें सब्जी उद्यान, गमलों में खेती, औषधीय पौधों की बागवानी, ऊर्ध्वाधर खेती, हाइड्रोपोनिक्स और एक्वापोनिक्स शामिल हैं।
घनी आबादी वाले दिल्ली जैसे शहर में (जहां पारंपरिक खेती के लिए जमीन की उपलब्धता सीमित है) शहरी खेती की यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मास्टर प्लान के अनुसार, खाली भूखंडों का इस्तेमाल अस्थायी तौर पर शहरी खेती या बागवानी के लिए किया जा सकता है। वहीं, इमारतों के अंदर ऊर्ध्वाधर खेती को भवन की संरचनात्मक सुरक्षा संबंधी मानकों को पूरा करने की शर्त पर अनुमति दी जाएगी।
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