Bijendra Yadav ने फिजूलखर्ची रोकने पर दिया जोर, Bihar SDG Conclave में बताईं विकास की प्राथमिकताएं
बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने शुक्रवार को कहा कि राज्य ने वित्तीय क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है, लेकिन विकास को गति देने के लिए संसाधनों के अपव्यय पर नियंत्रण और प्रत्येक व्यय को परिणामदायी बनाना आवश्यक है। यादव यहां ‘बिहार सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) कॉन्क्लेव-2026’ के दो दिवसीय समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समय के साथ लोगों की आवश्यकताएं बदलती हैं, इसलिए तकनीक और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप कार्यप्रणाली में भी बदलाव जरूरी है।
उन्होंने कहा कि विकास एक सतत प्रक्रिया है, जिसके लिए विवेकपूर्ण व्यय, नई तकनीक और प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार मौसम सेवा केंद्रों के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में है तथा पंचायत स्तर तक मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से ज्ञान, विज्ञान और ईमानदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
‘विकसित बिहार-2047 की दिशा में तीव्र प्रगति’ विषय पर आयोजित कॉन्क्लेव में आर्थिक परिवर्तन, समावेशी विकास, जिला आधारित योजना, एसडीजी के स्थानीयकरण तथा विकसित बिहार-2047 की प्राथमिकताओं पर मंथन किया गया। नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि दुनिया की लगभग 55 प्रतिशत आबादी शहरों में रहती है और शहरी क्षेत्रों का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 80 प्रतिशत से अधिक योगदान है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार बिहार के 12 शहरों में आधुनिक टाउनशिप विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है, जहां बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, इंटरनेट, गुणवत्तापूर्ण सड़क, पार्क, शिक्षा, खेल और पर्यावरण संरक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि बिहार के विकास के बिना भारत का समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि स्वच्छ जल एवं स्वच्छता श्रेणी में बिहार 98 अंकों के साथ देश में तीसरे स्थान पर है। इस क्षेत्र में सितंबर 2025 तक 26,960.3 करोड़ रुपये खर्च किए गए तथा 1.75 करोड़ ग्रामीणों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया।
उन्होंने कहा कि नीति आयोग के अनुसार वर्ष 2015-16 से 2019-21 के बीच बिहार में बहुआयामी गरीबी 51.8 प्रतिशत से घटकर 33.7 प्रतिशत रह गई और इस अवधि में लगभग 2.25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले। विजयलक्ष्मी ने बताया कि वर्ष 2024-25 में बिहार की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वृद्धि दर 13.2 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 9.8 प्रतिशत से अधिक है। नीति आयोग के सदस्य के. वी. राजू ने कहा कि कॉन्क्लेव के दौरान मिले सुझावों पर आयोग गंभीरता से विचार करेगा, बशर्ते उन्हें योजना एवं विकास विभाग के माध्यम से औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया जाए।
उन्होंने डेटा संग्रहण तथा पंचायत स्तर पर सूचकांक विकसित कर योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने पर बल दिया।
Meerut SSP रहे अविनाश पांडेय पर सपा नेताओं ने लगाया मारपीट का आरोप, जांच शुरू
उत्तर प्रदेश के मेरठ में ललिता गौतम हत्याकांड के विरोध में हुए प्रदर्शन के सिलसिले में समाजवादी पार्टी (सपा) के दो नेताओं ने तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अविनाश पांडेय पर अपने कक्ष में उनके साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है। इन आरोपों पर पुलिस का कोई आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है। सपा नेताओं -डॉ. दिग्विजय सिंह भाटी और मोहित जाटव- ने शुक्रवार को सपा विधायक अतुल प्रधान के आवास पर संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि 19 अगस्त को एसएसपी से मिलने के दौरान उनके साथ गाली-गलौज की गई और उन्हें कथित तौर पर लात-घूंसों तथा जूतों से पीटा गया।
भाटी ने आरोप लगाया कि एसएसपी के कक्ष में पिटाई के बाद उन्हें सिविल लाइंस थाना प्रभारी अखिलेश कुमार गौड़ के माध्यम से एसओजी कार्यालय ले जाया गया, जहां उनके हाथ-पैर बांधकर डंडों से कथित तौर पर मारपीट की गई। उन्होंने दावा किया, ‘‘पुलिसवालों ने मोबाइल पर एक ‘अश्लील’ गाना बजाया और हमसे उसपर नाचने को कहा। हम खड़े भी नहीं हो पा रहे थे, फिर भी हमें नचाया जा रहा था।’’ भाटी ने दावा किया कि मारपीट के कारण उन्हें अंदरूनी चोटें आईं और उनकी एक आंख सूज गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें धमकी दी गई थी कि यदि उन्होंने घटना के बारे में मीडिया में बात की तो उनका और बुरा हाल किया जाएगा। जाटव ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों से उनके ‘‘मुठभेड़’’ की बात कही गई थी। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
सपा विधायक अतुल प्रधान ने मामले में मुकदमा दर्ज करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि दोनों नेताओं से कथित तौर पर जबरन यह लिखवाया गया कि उनकी स्कूटी से दुर्घटना हुई थी। उन्होंने कहा कि पुलिस कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से घटना की सच्चाई सामने आ सकती है। इस बीच, पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, अमरोहा के हसनपुर निवासी रघुराज सिंह के बेटे दिग्विजय सिंह भाटी के खिलाफ अमरोहा और मेरठ में कुल नौ मुकदमे दर्ज हैं।
इनमें डिडौली, हसनपुर, सैदनगली और रजबपुर थानों के मामले शामिल हैं। मेरठ के दौराला और मेडिकल थानों में भी भाटी के खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं। उनके खिलाफ वर्ष 2008 और 2010 में मेरठ में भी मामले दर्ज हुए थे।
रिकॉर्ड के अनुसार, इन मुकदमों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के अलावा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2) भी शामिल की गई है। हालांकि, दिग्विजय सिंह भाटी और मोहित जाटव द्वारा लगाए गए मारपीट के आरोपों पर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण अभी तक जारी नहीं किया गया है। अपर पुलिस महानिदेशक (मेरठ जोन) भानु भास्कर ने मामले की जांच सहारनपुर के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) अभिषेक सिंह को सौंपी है।
इससे पहले बृहस्पतिवार देर रात अविनाश पांडेय को मेरठ के एसएसपी पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। अविनाश पांडेय और सिविल लाइंस थाना प्रभारी अखिलेश कुमार गौड़ से आरोपों के संबंध में संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
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