राम मंदिर निर्माण पर नया विवाद, चंपत राय के बयान से बढ़ी हलचल; नृपेंद्र मिश्रा ने दिया जवाब
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़ा विवाद एक बार फिर चर्चा में है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की ओर से सामने आए पत्र में मंदिर निर्माण के दौरान निर्णय लेने की प्रक्रिया और नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर कई अहम बातें कही गई हैं. इसके बाद राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष रहे नृपेंद्र मिश्रा की प्रतिक्रिया ने मामले को और चर्चा में ला दिया है.
चंपत राय के पत्र में क्या कहा गया?
चंपत राय ने अपने पत्र में राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया और ट्रस्ट के कामकाज से जुड़े कई पहलुओं का उल्लेख किया है. रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण से संबंधित महत्वपूर्ण फैसलों में नृपेंद्र मिश्रा की अध्यक्षता वाली निर्माण समिति की अहम भूमिका रही. उनके मुताबिक विशेषज्ञों और तकनीकी टीम की मदद से निर्माण से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाता था.
पत्र में मंदिर निर्माण के दौरान अलग-अलग विशेषज्ञों, इंजीनियरों और निर्माण एजेंसियों की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है. इससे यह संकेत मिलता है कि इतने बड़े धार्मिक और इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट के लिए कई स्तरों पर निर्णय प्रक्रिया बनाई गई थी.
नृपेंद्र मिश्रा ने क्या कहा?
चंपत राय के पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि उन्होंने पत्र देखा ही नहीं है. मीडिया से बातचीत में उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को विवाद पैदा करने की कोशिश बताया. उनका कहना था कि मंदिर निर्माण का काम अपनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ा और इससे जुड़े मामलों को अनावश्यक विवाद का रूप नहीं दिया जाना चाहिए.
नृपेंद्र मिश्रा ने यह भी बताया कि मंदिर निर्माण से जुड़े तय 70 कार्यों में से बड़ी संख्या में काम पूरे हो चुके हैं. इससे साफ है कि उनका जोर निर्माण परियोजना की प्रगति पर है, न कि सामने आए आरोप-प्रत्यारोप पर.
मंदिर निर्माण में मिश्रा की भूमिका क्यों अहम रही?
नृपेंद्र मिश्रा राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष रहे हैं. निर्माण के शुरुआती दौर से ही वह मंदिर की डिजाइन, इंजीनियरिंग, निर्माण तकनीक और अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय जैसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं. पुराने रिकॉर्ड में भी निर्माण समिति की बैठकों में उनकी मौजूदगी और तकनीकी टीमों के साथ समीक्षा का उल्लेख मिलता है.
चंपत राय के हालिया पत्र ने इसी भूमिका को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है. हालांकि, पत्र में किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के बजाय निर्माण व्यवस्था और जिम्मेदारियों को लेकर विवरण दिए जाने की बात सामने आई है.
विवाद की पृष्ठभूमि में चढ़ावे का मामला
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले को लेकर भी चर्चा चल रही है. जांच के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा के नाम को आरोपी के तौर पर शामिल नहीं किया गया है.
हालांकि, इस मामले की जांच और उससे जुड़ी रिपोर्ट को लेकर सार्वजनिक बहस जारी है. सुप्रीम कोर्ट ने भी SIT की स्टेटस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग स्वीकार नहीं की है.
निर्माण लगभग अंतिम चरण में
राम मंदिर परिसर का मुख्य निर्माण अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है. हालिया जानकारी के अनुसार मंदिर के अलावा संग्रहालय और अन्य सुविधाओं से जुड़े काम भी आगे बढ़ रहे हैं. राम कथा संग्रहालय की गैलरियों के लिए सामग्री और प्रस्तुति की तैयारी भी की जा रही है.
क्या आगे बढ़ेगा विवाद?
चंपत राय के पत्र और नृपेंद्र मिश्रा की प्रतिक्रिया के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल मंदिर निर्माण की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने की कोशिश है या फिर इससे ट्रस्ट के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर नई बहस शुरू होगी. फिलहाल दोनों पक्षों की बातों को साथ रखकर देखें तो मंदिर निर्माण में नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर कोई विवादित दावा सामने आने के बजाय उनकी जिम्मेदारी और निर्णय प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आई हैं.
ऐसे में इस पूरे मामले को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों और जांच से सामने आने वाले तथ्यों का इंतजार करना जरूरी होगा.
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अब बिना डिलीवरी फीस के अमेजन से गुजरात बोर्ड की किताबें मंगा सकते हैं छात्र, भूपेंद्र सरकार ने किया समझौता
गुजरात के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए राज्य सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की है. गुजरात स्टेट बोर्ड ऑफ स्कूल टेक्स्टबुक्स ने गुरुवार को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन इंडिया के साथ एक महत्वपूर्ण MoU पर हस्ताक्षर किया. इसका उद्देश्य छात्रों को स्कूल की पाठ्यपुस्तकें आसानी से, पारदर्शी तरीके से और समय पर उपलब्ध कराना है.
शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युम्न वाजा की मौजूदगी में हुए इस समझौते के बाद छात्रों और अभिभावकों को किताबें खरीदने के लिए बुकस्टोर या अधिकृत विक्रेताओं के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. वे अमेजन के जरिए अपनी कक्षा और माध्यम के अनुसार जरूरी किताबें ऑनलाइन ऑर्डर कर सकेंगे.
‘एक क्लिक पर छात्रों तक किताबें’ का लक्ष्य
इस पहल का मुख्य उद्देश्य ‘Books to Students with Just One Click’ है. इसके तहत गुजरात स्टेट बोर्ड द्वारा प्रकाशित विभिन्न कक्षाओं और माध्यमों की पाठ्यपुस्तकें अमेजन के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जाएंगी. सबसे खास बात यह है कि किताबें प्रिंटेड कीमत पर घर तक पहुंचाई जाएंगी और छात्रों या अभिभावकों से डिलीवरी चार्ज नहीं लिया जाएगा. राज्य सरकार द्वारा मुफ्त उपलब्ध कराई जाने वाली किताबों के अलावा जिन छात्रों को अतिरिक्त पाठ्यपुस्तकों की जरूरत है, वे अब उन्हें ऑनलाइन खरीद सकेंगे.
निजी स्कूलों के छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा
गुजरात स्टेट बोर्ड ऑफ स्कूल टेक्स्टबुक हर साल सेल्फ-फाइनेंस्ड स्कूलों के छात्रों के लिए करीब 1.5 करोड़ गुणवत्तापूर्ण पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराता है. अभी तक इन किताबों की आपूर्ति अधिकृत वितरकों के माध्यम से विभिन्न जिलों के बुकसेलर्स तक की जाती थी. नई व्यवस्था के बाद अमेजन के व्यापक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का इस्तेमाल कर किताबों को छात्रों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी. इससे नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में दुकानों पर भीड़, लंबी कतार और किताबें खरीदने में लगने वाले समय की समस्या कम हो सकती है.
‘ईज ऑफ एजुकेशन’ की दिशा में कदम
शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युम्न वाजा ने इस पहल को डिजिटल दौर में ‘ईज ऑफ एजुकेशन’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात मजबूत शिक्षा व्यवस्था तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल 100 प्रतिशत नामांकन और स्कूलों में सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना भी है.
अमेजन ने भी साझेदारी को बताया अहम
अमेजन इंडिया की बुक्स कैटेगिरी लीडर राशी बहादुर ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री तक पहुंच किसी छात्र की पढ़ाई और विकास में बाधा नहीं बननी चाहिए. उन्होंने गुजरात सरकार के साथ साझेदारी पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे राज्य के लाखों छात्रों और शिक्षकों तक शैक्षणिक सामग्री को अधिक सुलभ और किफायती बनाने में मदद मिलेगी. इस MoU के जरिए गुजरात सरकार और अमेजन इंडिया के बीच शिक्षा सामग्री की उपलब्धता को आसान बनाने के लिए एक नया डिजिटल चैनल तैयार हुआ है. इससे खासतौर पर निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों को किताबें खरीदने की प्रक्रिया में सुविधा मिलने की उम्मीद है.
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