ओरी बोले- आकांक्षा चमोला आस्तीन का सांप हैं:गौरव खन्ना के नाम से व्यूज बढ़ा रही हैं; शो में किया था गौरव से तलाक का खुलासा
सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ओरी ने गौरव खन्ना को तलाक देने के मामले में आकांक्षा चमोला पर निशाना साधा है। ओरी (ओरहान आवत्रामाणि) ने आकांक्षा चमोला को 'आस्तीन का सांप' कहा है। एक इंस्टाग्राम पोस्ट पर कमेंट करते हुए ओरी ने लिखा कि आकांक्षा अपने पति गौरव के नाम का इस्तेमाल सिर्फ व्यूज और रीच बढ़ाने के लिए कर रही हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक शो में आकांक्षा ने गौरव से 18 महीने से अलग रहने और तलाक लेने का खुलासा किया था। ओरी बोले- गौरव का नाम इस्तेमाल कर व्यूज बढ़ा रहीं सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की गई थी, जिसमें सवाल उठाया गया था कि क्या आकांक्षा चमोला और शगुन पांडे मिलकर गौरव खन्ना की इमेज खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। इस पोस्ट पर कमेंट करते हुए ओरी ने लिखा कि आकांक्षा सिर्फ गौरव का नाम इस्तेमाल कर रही हैं। ओरी ने बताया कि शो 'खतरों के खिलाड़ी 15' की शूटिंग के दौरान उन्होंने केप टाउन में एक महीने तक गौरव के साथ वैनिटी वैन शेयर की थी। उस वक्त तक उन्हें यह भी नहीं पता था कि गौरव शादीशुदा हैं, क्योंकि वे अपने निजी जीवन को काम से अलग रखते हैं। आकांक्षा को बताया 'आस्तीन का सांप' ओरी ने अपने कमेंट में आकांक्षा के व्यवहार पर नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा कि किसी अच्छे और सीधे इंसान की परीक्षा लेना और उसका फायदा उठाना गलत बात है। ओरी ने आगे लिखा, "यह लड़की आस्तीन का सांप है।" उन्होंने आरोप लगाया कि आकांक्षा तलाक की बात को पब्लिसिटी का जरिया बना रही हैं, जिससे गौरव की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। शो में आकांक्षा ने किया था तलाक का खुलासा आकांक्षा चमोला ने हाल ही में रियलिटी शो 'लॉक अप 2' के प्रीमियर एपिसोड में अपने और गौरव खन्ना के अलग होने की बात कही थी। उन्होंने बताया था कि वे दोनों पिछले 18 महीनों से अलग रह रहे हैं और जल्द ही कानूनी रूप से अलग हो जाएंगे। इसके अलावा आकांक्षा ने शो में खुद के 'बायसेक्सुअल' होने की बात भी कबूली थी। इस दौरान गौरव खन्ना ने पूरे मामले पर पूरी तरह चुप्पी साधे रखी है। एक रील बनाने के ₹76 लाख लेते हैं ओरी ओरी, जिनका असली नाम ओरहान अवत्रामानी है, लंबे समय से अपनी कमाई और प्रोफेशन को लेकर चर्चा में रहे हैं। हाल ही में उन्होंने इस बात का खुलासा किया कि वे पैसे कैसे कमाते हैं। एक पॉडकास्ट में ओरी ने बताया कि ब्रांड एंडोर्समेंट और स्पॉन्सर्ड कंटेंट उनकी कमाई का बड़ा जरिया है। उन्होंने एक रील के लिए 76 लाख रुपए तक लेने की बात स्वीकार की है। इसके अलावा, ओरी प्राइवेट इवेंट्स में शामिल होने के लिए भी मोटी फीस वसूलते हैं। कौन हैं ओरहान अवत्रामानी? ओरी को पहली बार अंबानी परिवार के कार्यक्रमों और बॉलीवुड हस्तियों के साथ वैकेशन्स पर स्पॉट किया गया था। इंस्टाग्राम पर उनके 2.5 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। वे अक्सर जान्हवी कपूर, खुशी कपूर और इंडस्ट्री के अन्य बड़े सितारों के साथ देखे जाते हैं। ओरी ने अब तक बॉलीवुड के कई हाई-प्रोफाइल इवेंट्स में अपनी मौजूदगी से एक खास जगह बना ली है। वे अक्सर अपने क्रिप्टिक जवाबों के कारण भी चर्चा में रहते हैं। ये खबर भी पढ़ें 'गौरव खन्ना को TRP के लिए तलाक नहीं दिया':आकांक्षा बोलीं- पेपर्स तैयार हैं, सिर्फ साइन करना बाकी; रियलटी शो में अलग होने का ऐलान किया था एक्ट्रेस आकांक्षा चमोला ने पति और एक्टर गौरव खन्ना से अपने तलाक को लेकर खुलकर बात की है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने उन खबरों को खारिज किया जिनमें दावा किया जा रहा था कि उन्होंने लॉक-अप शो में टीआरपी या पब्लिसिटी पाने के लिए अलग होने का ऐलान किया था। पूरी खबर पढ़ें
राम मंदिर निर्माण पर नया विवाद, चंपत राय के बयान से बढ़ी हलचल; नृपेंद्र मिश्रा ने दिया जवाब
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़ा विवाद एक बार फिर चर्चा में है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की ओर से सामने आए पत्र में मंदिर निर्माण के दौरान निर्णय लेने की प्रक्रिया और नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर कई अहम बातें कही गई हैं. इसके बाद राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष रहे नृपेंद्र मिश्रा की प्रतिक्रिया ने मामले को और चर्चा में ला दिया है.
चंपत राय के पत्र में क्या कहा गया?
चंपत राय ने अपने पत्र में राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया और ट्रस्ट के कामकाज से जुड़े कई पहलुओं का उल्लेख किया है. रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण से संबंधित महत्वपूर्ण फैसलों में नृपेंद्र मिश्रा की अध्यक्षता वाली निर्माण समिति की अहम भूमिका रही. उनके मुताबिक विशेषज्ञों और तकनीकी टीम की मदद से निर्माण से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाता था.
पत्र में मंदिर निर्माण के दौरान अलग-अलग विशेषज्ञों, इंजीनियरों और निर्माण एजेंसियों की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है. इससे यह संकेत मिलता है कि इतने बड़े धार्मिक और इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट के लिए कई स्तरों पर निर्णय प्रक्रिया बनाई गई थी.
नृपेंद्र मिश्रा ने क्या कहा?
चंपत राय के पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि उन्होंने पत्र देखा ही नहीं है. मीडिया से बातचीत में उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को विवाद पैदा करने की कोशिश बताया. उनका कहना था कि मंदिर निर्माण का काम अपनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ा और इससे जुड़े मामलों को अनावश्यक विवाद का रूप नहीं दिया जाना चाहिए.
नृपेंद्र मिश्रा ने यह भी बताया कि मंदिर निर्माण से जुड़े तय 70 कार्यों में से बड़ी संख्या में काम पूरे हो चुके हैं. इससे साफ है कि उनका जोर निर्माण परियोजना की प्रगति पर है, न कि सामने आए आरोप-प्रत्यारोप पर.
मंदिर निर्माण में मिश्रा की भूमिका क्यों अहम रही?
नृपेंद्र मिश्रा राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष रहे हैं. निर्माण के शुरुआती दौर से ही वह मंदिर की डिजाइन, इंजीनियरिंग, निर्माण तकनीक और अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय जैसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं. पुराने रिकॉर्ड में भी निर्माण समिति की बैठकों में उनकी मौजूदगी और तकनीकी टीमों के साथ समीक्षा का उल्लेख मिलता है.
चंपत राय के हालिया पत्र ने इसी भूमिका को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है. हालांकि, पत्र में किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के बजाय निर्माण व्यवस्था और जिम्मेदारियों को लेकर विवरण दिए जाने की बात सामने आई है.
विवाद की पृष्ठभूमि में चढ़ावे का मामला
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले को लेकर भी चर्चा चल रही है. जांच के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा के नाम को आरोपी के तौर पर शामिल नहीं किया गया है.
हालांकि, इस मामले की जांच और उससे जुड़ी रिपोर्ट को लेकर सार्वजनिक बहस जारी है. सुप्रीम कोर्ट ने भी SIT की स्टेटस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग स्वीकार नहीं की है.
निर्माण लगभग अंतिम चरण में
राम मंदिर परिसर का मुख्य निर्माण अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है. हालिया जानकारी के अनुसार मंदिर के अलावा संग्रहालय और अन्य सुविधाओं से जुड़े काम भी आगे बढ़ रहे हैं. राम कथा संग्रहालय की गैलरियों के लिए सामग्री और प्रस्तुति की तैयारी भी की जा रही है.
क्या आगे बढ़ेगा विवाद?
चंपत राय के पत्र और नृपेंद्र मिश्रा की प्रतिक्रिया के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल मंदिर निर्माण की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने की कोशिश है या फिर इससे ट्रस्ट के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर नई बहस शुरू होगी. फिलहाल दोनों पक्षों की बातों को साथ रखकर देखें तो मंदिर निर्माण में नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर कोई विवादित दावा सामने आने के बजाय उनकी जिम्मेदारी और निर्णय प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आई हैं.
ऐसे में इस पूरे मामले को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों और जांच से सामने आने वाले तथ्यों का इंतजार करना जरूरी होगा.
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