Odisha Floods: सुवर्णरेखा समेत प्रमुख नदियों का जलस्तर घटा, छह जिलों में सुधरे हालात
ओडिशा के छह जिलों में शुक्रवार को बाढ़ की स्थिति में सुधार हुआ और पिछले 48 घंटों में भारी बारिश नहीं होने से सबसे अधिक प्रभावित बालासोर जिले की सुवर्णरेखा समेत सभी प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि सुवर्णरेखा की बाढ़ से बालियापाल, भोगराई और जलेश्वर प्रखंड जलमग्न हो गए थे और करीब 2.1 लाख लोग प्रभावित हुए।
राजघाट में नदी का जलस्तर 9.75 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 10.36 मीटर है। 20 अगस्त को जलस्तर 11.82 मीटर तक पहुंच गया था। उन्होंने बताया कि बालियापाल में करीब एक लाख, भोगराई में 70 हजार और जलेश्वर में 40 हजार लोग प्रभावित हुए।
जालका और बुधबलंगा नदियों का जलस्तर भी खतरे के निशान से नीचे आ गया है, हालांकि जिले के करीब 100 गांव अब भी बाढ़ के पानी से घिरे हैं। अधिकारियों के अनुसार, 14 अगस्त से शुरू हुई बाढ़ की दूसरी लहर से छह जिलों में 13 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और करीब पांच लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जाजपुर, भद्रक, केंद्रापड़ा, मयूरभंज और क्योंझर में स्थिति स्थिर है, हालांकि बैतरणी नदी का जलस्तर बढ़ने से केंद्रापड़ा और जाजपुर के कुछ हिस्सों में खतरा बना हुआ है।
जलभराव के कारण भद्रक और जाजपुर में शुक्रवार को शैक्षणिक संस्थान बंद रहे। भुवनेश्वर मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, शुक्रवार सुबह 8:30 बजे तक राज्य में पिछले 24 घंटों में औसतन 2.1 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य औसत 10.4 मिलीमीटर है। नयागढ़ में सर्वाधिक 35 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
आईएमडी ने शुक्रवार से तटीय और उत्तरी ओडिशा में छह दिनों तक बारिश का एक और दौर आने का पूर्वानुमान जताया है।
Manipur CM ने Japan जाने वाले 16 युवाओं से कहा: अपनी संस्कृति और पहचान कभी न भूलें
मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने शुक्रवार को कौशल प्रशिक्षण लेने के लिए जापान जाने वाले राज्य के युवाओं से अपील की कि वे अपनी जड़ों (संस्कृति, परंपराओं और राज्य से जुड़ाव) को न भूलें। कुल 16 युवा ‘राज्य आजीविका सशक्तीकरण एवं उद्यमिता’ (लाइवलीहुड एम्पावरमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप) पहल के तहत जापान के विभिन्न हिस्सों में कौशल प्रशिक्षण लेंगे। बातचीत के दौरान, सिंह ने युवाओं को सलाह दी कि वे कभी भी अपनी जड़ों को न भूलें और उनसे आग्रह किया कि वे हमेशा याद रखें कि वे मणिपुरी हैं, भले ही वे पूर्वी एशियाई देश में रह रहे हों।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा एक विदेशी सरजमीं, संस्कृति, परंपरा और विकास से रूबरू होंगे, लेकिन उन्हें अपनी पहचान से जुड़े रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पहले मणिपुर के लोग गर्व से खुद को मणिपुरी बताते थे, लेकिन अब कई लोग ऐसा करने में हिचकते हैं, पर इस सोच को बदलने की जरूरत है। अभ्यर्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक और मणिपुर सरकार के उपक्रम एसएलईई के बीच एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए।
इन अभ्यर्थियों ने राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) अंतरराष्ट्रीय अकादमी से जापानी का प्रशिक्षण पूरा किया है और उन्हें जापान के विभिन्न हिस्सों (जिनमें तोक्यो और ओकिनावा शामिल हैं) में स्वास्थ्य सेवा तथा आतिथ्य (मेहमाननवाजी) क्षेत्र में नौकरियां मिली हैं।
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