मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने शुक्रवार को कौशल प्रशिक्षण लेने के लिए जापान जाने वाले राज्य के युवाओं से अपील की कि वे अपनी जड़ों (संस्कृति, परंपराओं और राज्य से जुड़ाव) को न भूलें। कुल 16 युवा ‘राज्य आजीविका सशक्तीकरण एवं उद्यमिता’ (लाइवलीहुड एम्पावरमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप) पहल के तहत जापान के विभिन्न हिस्सों में कौशल प्रशिक्षण लेंगे। बातचीत के दौरान, सिंह ने युवाओं को सलाह दी कि वे कभी भी अपनी जड़ों को न भूलें और उनसे आग्रह किया कि वे हमेशा याद रखें कि वे मणिपुरी हैं, भले ही वे पूर्वी एशियाई देश में रह रहे हों।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा एक विदेशी सरजमीं, संस्कृति, परंपरा और विकास से रूबरू होंगे, लेकिन उन्हें अपनी पहचान से जुड़े रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पहले मणिपुर के लोग गर्व से खुद को मणिपुरी बताते थे, लेकिन अब कई लोग ऐसा करने में हिचकते हैं, पर इस सोच को बदलने की जरूरत है। अभ्यर्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक और मणिपुर सरकार के उपक्रम एसएलईई के बीच एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए।
इन अभ्यर्थियों ने राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) अंतरराष्ट्रीय अकादमी से जापानी का प्रशिक्षण पूरा किया है और उन्हें जापान के विभिन्न हिस्सों (जिनमें तोक्यो और ओकिनावा शामिल हैं) में स्वास्थ्य सेवा तथा आतिथ्य (मेहमाननवाजी) क्षेत्र में नौकरियां मिली हैं।
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हेमंत सोरेन सरकार के लिए एक और झटके के तौर पर, झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC CGL परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस फैसले से परीक्षा के ज़रिए चुने गए कुल 1,932 उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है। इससे पहले गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC परीक्षाओं को रद्द करने पर भी रोक लगा दी थी। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। राज्य सरकार ने पहले गड़बड़ियों के आरोपों के कारण 39 परीक्षाएं रद्द कर दी थीं और छह परीक्षाएं टाल दी थीं; इनमें हाल की भर्ती प्रक्रियाएं और पहले की कई परीक्षाएं शामिल हैं। JPSC परीक्षाओं के ज़रिए चुने गए और अभी सरकारी नौकरी कर रहे कई उम्मीदवारों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर करके राज्य सरकार के आदेश को चुनौती दी थी।
नियुक्त उम्मीदवारों का कहना था कि उन्हें गड़बड़ियों की जांच से कोई आपत्ति नहीं है। उन्हें मुख्य आपत्ति इस बात से है कि जिस चयन प्रक्रिया के ज़रिए उनकी नियुक्ति हुई थी, उसी पूरी परीक्षा को ही रद्द कर दिया गया। उनका तर्क था कि अगर गड़बड़ी साबित होती है, तो ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए, न कि उन उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ जिन्हें एक वैध भर्ती प्रक्रिया के ज़रिए नौकरी मिली थी।
कौन-सी परीक्षाएं रद्द की गई हैं?
सरकार के इस कदम में कई अहम पदों के लिए भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। रद्द की गई परीक्षाओं में ड्रग इंस्पेक्टर, सरकारी इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर, सरकारी पॉलिटेक्निक में लेक्चरर, सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर, असिस्टेंट कंज़र्वेटर ऑफ़ फ़ॉरेस्ट और फ़ॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के पद शामिल हैं। इस लिस्ट में झारखंड कंबाइंड सिविल सर्विसेज़ परीक्षा के अलग-अलग संस्करण भी शामिल हैं।जिन दूसरी परीक्षाओं के रद्द होने या जिनकी जांच होने की संभावना है, उनमें फ़ूड सेफ़्टी ऑफिसर, चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर, फ़ूड एनालिस्ट, डिप्टी डायरेक्टर (प्रॉसिक्यूशन), प्रोजेक्ट मैनेजर, फ़ैक्टरी और बॉयलर इंस्पेक्टर, एग्रीकल्चर ऑफिसर, जियोलॉजिस्ट, केमिस्ट और कई अन्य प्रशासनिक और तकनीकी पदों के लिए होने वाली भर्तियां शामिल हैं।
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