60 के बाद ये 5 बीमारियां कर सकती हैं परेशान, डॉक्टर की ये 5 बातें गांठ बांध लेंगे तो नहीं होगी दिक्कत
World Senior Citizens Day: 60 की उम्र पार करते ही कई तरह की बीमारियां परेशान करने लगती है. अगर पहले से कोई क्रोनिक बीमारी हो तो मामला और अधिक बढ़ सकता है. 60 के बाद मुख्य तौर पर जोड़ों का दर्द, हड्डियों की कमजोरी, हाई बीपी और डायबिटीज जैसी समस्याओं का खतरा रहता है. लेकिन ऐसा नहीं है कि ये बीमारियां सबको हो. अगर जवानी से ही कुछ एहतियात बरती जाए तो 60 के बाद भी तंदुरुस्त रहा जा सकता है. एम्स में नेशनल सेंटर ऑफ एजिंग के पूर्व सुप्रीडेंटेंट डॉ. प्रसून चटर्जी ने इसके लिए बेस्ट तरीका बताया है जिनकी बदौलत 60 बाद भी आप फिट रह सकते हैं.
CBSE Revaluation Row in SC: 1.68 लाख छात्रों की शिकायतों पर SC सख्त; केंद्र से सोमवार तक मांगा हलफनामा, 25 अगस्त को फैसला
सीबीएसई द्वारा 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों की जांच के लिए लागू किए गए नए डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के बाद से देशभर के छात्रों में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। अंकों में विसंगतियों, अनचेक्ड उत्तरों और री-इवैल्यूएशन पोर्टल के तकनीकी ग्लिच के चलते लाखों छात्रों का उच्च शिक्षण संस्थानों व राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में दाखिला अधर में लटक गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी स्तर पर खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
1.68 लाख छात्रों की आपत्तियां और पोर्टल की समयसीमा पर सवाल
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को जानकारी दी कि छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए एक-एक सदस्यीय समिति गठित की गई थी और पोर्टल को एक सप्ताह के लिए खोला गया था, जिसमें 1.68 लाख छात्रों ने आवेदन किया। इसके जवाब में याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि प्रभावित छात्रों की तादाद बहुत बड़ी थी और केवल एक हफ्ते की अवधि बेहद कम थी।
कई ऐसे छात्र भी हैं जिन्होंने निर्धारित समय पर फीस देकर आवेदन किया, लेकिन उन्हें अब तक न तो उत्तर पुस्तिका की कॉपी मिली और न ही पुनर्मूल्यांकन का कोई परिणाम जारी हुआ।
ग्रेस मार्क्स देने से केंद्र का इनकार, प्रवेश परीक्षाओं के शेड्यूल का हवाला
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि 2026 की 12वीं बोर्ड परीक्षा में ओएसएम विसंगतियों का सामना करने वाले छात्रों को ग्रेस मार्क्स देना संभव नहीं होगा। उन्होंने तर्क दिया कि आईआईटी और विश्वविद्यालयों की प्रवेश काउंसलिंग सीबीएसई नतीजों से जुड़ी होती है, इसलिए पूरी प्रक्रिया को अनिश्चितकाल के लिए नहीं खींचा जा सकता था।
हालांकि, पीठ ने सवाल उठाया कि जिन छात्रों को पोर्टल क्रैश या तकनीकी गड़बड़ी के कारण समय पर अवसर नहीं मिला, उनके अधिकारों का संरक्षण कैसे किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगी प्रभावित छात्रों की विस्तृत लिस्ट, सोमवार तक हलफनामे का आदेश
चीफ जस्टिस की पीठ ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ता को एक विस्तृत तालिका के साथ रिजॉइंडर दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें दो श्रेणियों का ब्योरा मांगा गया है- पहले वो छात्र जिन्होंने आवेदन किया मगर कोई जवाब नहीं मिला, और दूसरे वो जो इंटरनेट या बुनियादी ढांचे की खामी की वजह से आवेदन करने से वंचित रह गए।
अदालत ने केंद्र और सीबीएसई को सोमवार तक अपना आधिकारिक हलफनामा रिकॉर्ड पर रखने को कहा है, जिसके बाद मंगलवार को इस संवेदनशील मुद्दे पर अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
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