IND vs SL : भारत को दूसरे टेस्ट से पहले लग सकता है बड़ा झटका, कोलंबो में प्रैक्टिस सेशन से मिला बड़ा हिंट
IND vs SL : भारत और श्रीलंका के बीच 23 अगस्त से दूसरा टेस्ट मैच खेला जाने वाला है. 27 अगस्त तक चलने वाले इस मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम को बड़ा झटका लग सकता है. इसका पूरा हिंट टीम इंडिया के प्रैक्टिस सेशन से हुआ है. आज यानी 21 अगस्त शुक्रवार को टीम इंडिया ने दूसरे टेस्ट मैच से पहले अभ्यास सत्र में हिस्सा लिया. कोलंबो में टीम इंडिया के कप्तान शुभमन गिल और हेड कोच गौतम गंभीर की निगरानी में भारतीय खिलाड़ियों ने अभ्यास सत्र में हिसाल लिया.
इस अभ्यास सत्र के दौरान एक बड़ा हिंट मिला है, जो भारत और श्रीलंका के बीच रविवार से कोलंबो के सिहाली स्पोर्ट्स क्लब में होने वाले मैच पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है. अभ्यास सत्र से मिले इस हिंट से टीम इंडिया को बड़ा झटका लग सकता है. ये पूरा मामला क्या है. इंडियन क्रिकेट टीम को कैसे बड़ा नुकसान हो सकता है. आइए इसके बारे में जानते हैं
Think Tank Meeting underway at SSC Colombo! #SLvsIND #TeamIndia pic.twitter.com/1VbynQlY9w
— Ankan Kar (@AnkanKar) August 21, 2026
दूसरे टेस्ट से पहले भारत को लग सकता है बड़ा झटका
भारतीय टीम के आज के प्रैक्टिस सेशन में दो खिलाड़ियों ने हिस्सा नहीं लिया है. इन 2 खिलाड़ियों में टीम के सालामी बल्लेबाज केएल राहुल और भारत के चाइनामैन स्पिनर कुलदीप यादव शामिल हैं. ये दोनों खिलाड़ी आज टीम के साथ कोलंबो में अभ्यास करने नहीं आए. ऐसे में सभी ने नेट्स में गेंदबाजी और बल्लेबाजी की लेकिन इन दोनों खिलाड़ियों ने कोई अभ्यास नहीं किया. इन दोनों का प्रैक्टिस सेशन में हिस्सा नहीं लेना दूसरे टेस्ट मैच से इनके बाहर होने की ओर संकेत दे रहा है. अगर ऐसा हुआ तो ये भारतीय क्रिकेट टीम के लिए कोलंबो टेस्ट से पहले बड़ा झटका होगा.
Indian Team starts Training at SSC, Colombo.
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KL Rahul & Kuldeep Yadav missing the session #TeamIndia #SLvsIND pic.twitter.com/JsOQ9YKvFE
क्या ये दो खिलाड़ी होंगे दूसरे टेस्ट से बाहर?
आपको बता दें कि, भारतीय क्रिकेट टीम के सलामी बल्लेबाज केएल राहुल गाले में खेले गए पहले टेस्ट मैच के दौरान बल्लेबाजी करते हुए चोटिल हो गए थे. उनको पूरी बॉडी में क्रैंप आ रहे थे. उनके हाथ की बीच वाली उंगली में चोट थी, जिसके चलते पहले टेस्ट मैच के डे-1 के अंत से पहले ही उन्हें दर्द में मैदान से बाहर जाना पड़ा था. इसके बाद राहुल ने रेट किया और इलाज के बाद वो बाद में बल्लेबाजी करने के लिए भी आए. वहीं राहुल को दूसरी पारी में भी बल्लेबाजी करते हुए देखा गया, लेकिन अब अगर उनकी चोट ठीक नहीं हुई है और उनकी रिकवरी पूरी तरह से नहीं हुई है, तो उनको दूसरे टेस्ट से रेस्ट दिया जा सकता है.
वहीं चाइनामैन स्पिनर कुलदीप यादव को दूसरे टेस्ट मैच से बाहर कर उनकी जगह पर सारांश जैन को प्लेइंग-11 में मौका देने की तमाम रिपोर्ट सामने आ रही हैं. कुलदीप यादव का प्रदर्शन भी पहले टेस्ट में इतना खास नहीं रखा था. अब उनको दूसरे टेस्ट मैच में नहीं खिलाना भी श्रीलंका की स्पिन ट्रेक पिचों पर टीम इंडिया के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकता है.
Wicket inspection for one more time - Coach, Selector & Captain before Indian Team Wraps up Practice at SSC, Colombo! #TeamIndia #SLvsIND pic.twitter.com/uCQB9FFjSt
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केएल राहुल तो आराम के लिहाज से इस प्रैक्टिस सेशन से रिलीफ दिया गया होगा. वहीं कुलदीप यादव का हिस्सा न लेना गंभीर सवाल खड़े करता है. क्या ऐसा में सारांश जैन को टीम इंडिया के लिए टेस्ट डेब्यू करने का मौका मिलेगा. ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा.
भारत-श्रीलंका टेस्ट सीरीज के लिए भारत का स्क्वाड
शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), यशस्वी जायसवाल, देवदत्त पडिक्कल, सरफराज खान, ऋषभ पंत, ध्रुव जुरेल, रवींद्र जडेजा, सारांश जैन, मानव सुथार, कुलदीप यादव, प्रसिद्ध कृष्णा, मोहम्मद सिराज, आकिब नबी, और गुरनूर बरार.
Sawan Last Monday 2026: 24 अगस्त को सावन का आखिरी सोमवार, शिव मंदिर में पूजा से पहले जरूर जानें ये 8 नियम
Sawan Last Monday 2026: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए विशेष माना जाता है। साल 2026 में सावन का चौथा और आखिरी सोमवार 24 अगस्त को पड़ रहा है। उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार इस दिन सावन मास का अंतिम प्रदोष और व्रत भी रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सावन सोमवार पर भगवान शिव का जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पित करने और विधि-विधान से पूजा करने से भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
अगर आप सावन के आखिरी सोमवार पर शिव मंदिर जाकर पूजा करने की तैयारी कर रहे हैं, तो कुछ पारंपरिक नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। मंदिर में प्रवेश करने से लेकर शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाने तक हर पूजा सामग्री और विधि का अपना धार्मिक महत्व बताया गया है।
1. स्नान के बाद पहनें साफ कपड़े
शिव मंदिर जाने से पहले स्नान करके साफ और धुले हुए कपड़े पहनने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता में पूजा के दौरान शरीर और मन की स्वच्छता को विशेष महत्व दिया गया है। इसलिए मंदिर जाने से पहले स्वयं को स्वच्छ रखना शुभ माना जाता है।
2. मंदिर के बाहर उतारें जूते-चप्पल
मंदिर में प्रवेश करने से पहले जूते-चप्पल बाहर निर्धारित स्थान पर उतार दें। पूजा स्थल और गर्भगृह की पवित्रता को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में जूते पहनकर जाने से बचना चाहिए।
3. 'ॐ नमः शिवाय' का करें जाप
मंदिर में प्रवेश करते समय भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करने की परंपरा है। मान्यता है कि मंत्र जाप से मन पूजा और आराधना में एकाग्र होता है।
4. जलाभिषेक के लिए घर से ले जाएं जल
धार्मिक परंपराओं में शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए साफ पात्र में घर से जल ले जाने की बात कही जाती है। हालांकि अलग-अलग मंदिरों में जलाभिषेक की व्यवस्था अलग हो सकती है, इसलिए मंदिर की स्थानीय व्यवस्था और परंपरा का भी ध्यान रखें।
5. सबसे पहले करें शुद्ध जल से अभिषेक
पूजा की शुरुआत शिवलिंग पर शुद्ध जल या गंगाजल अर्पित करके करने की परंपरा है। इसके बाद दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से बने पंचामृत का अभिषेक किया जाता है। इसके बाद बेलपत्र, भांग और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है।
6. शिवलिंग पर न चढ़ाएं तुलसी, हल्दी और सिंदूर
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की पूजा में तुलसी, हल्दी और सिंदूर अर्पित नहीं किए जाते हैं। इसलिए सावन सोमवार की पूजा के दौरान इन चीजों को शिवलिंग पर चढ़ाने से बचने की परंपरा है।
7. तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाएं
भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करने की विशेष परंपरा है। मान्यता के अनुसार पूजा में साफ, साबुत और तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है। बेलपत्र कटा-फटा न हो, इसका ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
8. पहले गणेश, माता पार्वती, कार्तिकेय और नंदी के करें दर्शन
कई शिव मंदिरों में शिवलिंग के दर्शन और जलाभिषेक से पहले भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान कार्तिकेय और नंदी जी के दर्शन-पूजन की परंपरा है। इसके बाद शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है।
शिवलिंग की पूरी परिक्रमा क्यों नहीं की जाती?
शिवलिंग की परिक्रमा को लेकर भी एक विशेष धार्मिक मान्यता है। शिवलिंग से निकलने वाले जल के मार्ग को जलाधारी, निर्मली या गोमुखी कहा जाता है। मान्यता है कि इस जल निकास वाले हिस्से को लांघना नहीं चाहिए। इसलिए भक्त जलाधारी तक जाकर वहीं से वापस लौटते हैं और इसी को परिक्रमा की पूर्णता माना जाता है।
ध्यान दें: ये बातें धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और मंदिरों में पूजा की विधि में कुछ अंतर हो सकता है। मंदिर की स्थानीय परंपरा और पुजारी के निर्देशों का पालन करना उचित है।
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