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नृपेंद्र मिश्रा के फैसले के बिना कोई काम नहीं होता था, चंपत राय ने जारी की 20 पेज की चिट्ठी

अयोध्या राम मंदिर का संचालन करने वाले ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी पद से दान में अनियमितताओं के आरोपों के बीच हटने को मजबूर हुए चंपत राय ने एक खुला पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता वाली मंदिर निर्माण समिति ने सभी फैसलों को मंज़ूरी दी और उनकी मदद के लिए नियुक्तियां कीं। उन्होंने कहा कि मिश्रा ने अपनी पसंद के लोगों को श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति में शामिल किया। राय ने बताया कि उनमें से एक व्यक्ति छह साल में सिर्फ़ दो बार अयोध्या आया, और दूसरे से सिर्फ़ सुरक्षा से जुड़े सुझाव ही मांगे गए। राय ने कहा कि तीसरा सदस्य नियमित था और हमेशा मिश्रा के साथ बैठकों में शामिल होता था। उन्होंने आगे कहा कि बैठकें हर महीने और कभी-कभी हर 15 दिन में होती थीं। राय ने ज़ोर देकर कहा कि समिति के पास पूरा अधिकार था। उन्होंने कहा कि समिति की मंज़ूरी के बिना कोई भी काम नहीं किया गया। राय ने उस पत्र में कहा अगर बाहर कोई फ़ैसला लिया गया, तो उसे स्वीकार नहीं किया गया। अगर कुछ किया गया, तो उसे हटा दिया गया। यह पत्र वायरल हो गया है और समिति के कामकाज को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

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राय का कहना था कि मिश्रा ने निर्माण से जुड़े सभी मामलों में खुद को एकमात्र अधिकारी के तौर पर पेश किया, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि मंदिर उन्हीं की वजह से हकीकत बन पाया है। राय ने 2020 में कोविड महामारी के दौरान मंदिर का निर्माण शुरू होने के बाद उसके उद्घाटन को सुनिश्चित करने का श्रेय मिश्रा को दिया। राय ने लिखा यह पूरी तरह से नृपेंद्र जी के काम का नतीजा है। राय ने कहा कि जब भी निर्माण कार्य में कोई तकनीकी या लॉजिस्टिकल बाधा आती, तो मिश्रा तुरंत सबसे काबिल लोगों से संपर्क करते, उन्हें अयोध्या लाते और समस्याओं का समाधान करवाते। राय ने यह भी बताया कि विद्वानों और विशेषज्ञों ने सेवा की भावना से योगदान दिया और कोई पारिश्रमिक नहीं लिया।

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यह चिट्ठी राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने में गड़बड़ी के आरोपों की जांच करने वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की आखिरी रिपोर्ट आने के कुछ दिनों बाद लिखी गई थी। SIT की रिपोर्ट में ट्रस्ट के कामकाज में "बड़ी खामियां" तो बताई गई थीं, लेकिन उसने उन्हें और एक पूर्व ट्रस्टी को आरोपों से बरी कर दिया था। मिश्रा ने कमेटी के अंदरूनी मतभेद की खबरों को खारिज कर दिया और कहा कि उन्होंने राय की चिट्ठी नहीं देखी है। "जब तक मैं चिट्ठी नहीं देख लेता, तब तक मैं बस यही कहूंगा कि यह आपकी [मीडिया की] मनगढ़ंत कहानी है। ऐसी कोई चिट्ठी नहीं है और न ही ऐसी कोई आलोचना की गई है, भले ही वह नौ पन्नों की ही क्यों न हो। उन्होंने ऐसी कोई आलोचना नहीं की है। यह सिर्फ़ एक मनगढ़ंत कहानी है। 

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BJP और JDS विधायकों ने Vidhana Soudha तक निकाला मार्च, मंत्री नागेंद्र का मांगा इस्तीफा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (सेक्युलर) के विधायकों ने राज्य संचालित निगम में करोड़ों रुपये के कथित गबन के मामले में आरोपी मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को यहां विधान सौध तक मार्च निकाला। विधायकों ने विधानसभा में प्रवेश करने की भी कोशिश की और वे मार्शलों के अवरोध को तोड़कर सदन में घुस गए। इन विधायकों ने काले रंग की टी-शर्ट पहनी हुई थी और उन्हें रोक रहे मार्शलों ने कहा कि सदन के अंदर काले रंग की टी-शर्ट पहनना प्रतिबंधित है।

विपक्ष के नेता आर. अशोक और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा और जद (एस) पिछले कई दिनों से नागेंद्र के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, इससे पहले भी उन्होंने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, ‘‘मंत्री नागेंद्र को हटाया जाए, उन्हें बर्खास्त किया जाए।’’ विधानसभा के प्रवेश द्वार पर काले रंग की टी-शर्ट पहने भाजपा और जद(एस) के विधायकों को मार्शलों ने रोक दिया।

मार्शलों द्वारा रोके जाने पर विधायकों ने आपत्ति जताई और उनकी मार्शलों से तीखी बहस हुई। आर. अशोक ने नागेंद्र को लगातार समर्थन देने को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘‘सबूत होने के बावजूद, क्या सिर्फ एक व्यक्ति (नागेंद्र) को बचाने के लिए कांग्रेस द्वारा पूरे विधानसभा सत्र को बाधित किया जाना उचित है?

क्या यह न्यायसंगत है? कांग्रेस नेताओं को मुझे जवाब देना चाहिए।’’ उन्होंने नागेंद्र को निर्दोष बताने संबंधी उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि नागेंद्र के खिलाफ 31 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने कहा, मैंने सीबीआई के आरोपपत्र सहित कई दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं।

क्या आपको अब भी इस पर कोई संदेह है? उन्हें (नागेंद्र को) तुरंत बर्खास्त करें और विधानसभा की कार्यवाही होने दें। पत्रकारों को संबोधित करते हुए विजयेन्द्र ने कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टों की, भ्रष्टों द्वारा और भ्रष्टों के लिए सरकार होने का आरोप लगाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के धन को कांग्रेस के लाभ और 2024 के लोकसभा चुनाव में उसके प्रचार के लिए अवैध रूप से स्थानांतरित किया गया था। विपक्षी दल भाजपा ने नागेंद्र को हटाने की मांग को लेकर कर्नाटक विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही को कई दिनों तक बाधित किया है। कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि एसटी विकास निगम से धन के गबन के आरोपों के बाद सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली पिछली कैबिनेट से इस्तीफा देने वाले नागेंद्र को तीन अगस्त को शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था।

वह वर्तमान में योजना और सांख्यिकी मंत्री हैं।

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ENG vs PAK: तीन दिन भी नहीं टिका पाकिस्तान, 39 साल बाद से नहीं मिली जीत, इंग्लैंड ने बुरी तरह रौंदा

इंग्लैंड ने इस मैच में सिर्फ एक ही पारी में बैटिंग की जबकि पाकिस्तान ने दो पारी में बल्लेबाजी की और दोनों पारियों में मिलाकर भी इंग्लैंड के बराबर रन नहीं बना सकी. इंग्लैंड ने सीरीज में बढ़त ले ली है. Fri, 21 Aug 2026 21:30:50 +0530

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