भारतीय वायुसेना की ताकत में एक बड़ा इजाफा होने जा रहा है। अब दुश्मन चाहे पाताल में छिपा हो या फिर कंक्रीट के मोटे बंकरों के पीछे उन्हें भारतीय वायुसेना नहीं छोड़ेगी। अब भारत एक ही प्रहार में सब कुछ मटिया मेट कर देगी क्योंकि डीआरडीओ ने तैयार कर लिया है एक ऐसा स्वदेशी बंकर बस्टर बम जिसका वजन है 500 किग्र और निशाना एकदम अचूक सितंबर अक्टूबर के महीने में आसमान से जब यह बम गिरेगा तो दुश्मन की रूह कांप उठेगी। दरअसल रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी कि डीआरडीओ और भारतीय वायुसेना जल्द ही सुखोई 30 एमकेआई लड़ाकू जेट से स्वदेशी पीजीबी 500 यानी कि प्रिसजन गाइडेड बम का परीक्षण करने वाले हैं। यह कोई साधारण बम नहीं है। यह 500 किलोग्राम का महाशक्तिशाली बंकर बस्टर है। जिससे खासतौर पर दुश्मनों के कमांड सेंटर्स, रणनीतिक बुनियादी ढांचे और उन बंकरों को तबाह करने के लिए तैयार किया गया है। जिन्हें भेदना मुश्किल था। लेकिन अब यह बंकर बस्टर उन्हें भी बर्बाद कर देंगे।
इस पीजीबी 500 की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसकी प्रसीजन क्षमता। यह बम जीपीएस और आईएएस यानी कि इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम से लैस है। इसका मतलब यह है कि इसे एक बार छोड़ने के बाद यह खुद अपना रास्ता तय करेगा और मिलीमीटर की सटीकता के साथ सीधे लक्ष्य पर गिरेगा। सुर छठी एमकेआई जैसे फाइटर एयरक्राफ्ट पर इसके परीक्षण के दौरान इसकी एोडायनेमिक स्टेबिलिटी और रिलीज क्षमता की जांच की जाएगी। अब सवाल यह उठता है कि पाकिस्तान जैसे जो देश हैं वो इससे क्यों डर रहे हैं? दरअसल सीमा पार छिपे आतंकी बंकरों में छिपकर जमीन के नीचे बने हुए बंकरों में अपना ठिकाना बनाते हैं। लेकिन अब पीजीबी 500 जैसे हथियार उन्हें पूरी तरीके से नेस्तानाबूत कर देंगे।
ब्रह्मोस, अस्त्र और रुद्रम जैसी मिसाइलों के बाद अब यह बम सुखोई को एक ऐसा खतरनाक हंटर बनाएगा जिससे बचना दुश्मनों के लिए नामुमकिन हो जाएगा। अगर हम बात करें इस पीजीबी 500 की खूबियों की तो 500 किलो वजनी ये महाशक्तिशाली स्वदेशी प्रसीजन गाइडेड बम है जो कि दुश्मनों के कंक्रीट वाले बंकर अंडरग्राउंड कमांड सेंटर्स और रणनीतिक ठिकानों को पलक झपकते ही तबाह कर देता है। आधुनिक जीपीएस और आईएएस नेविगेशन तकनीक से लैस है। यह बंकर बस्टर मिलीमीटर की सटीकता के साथ सीधे लक्ष्य को प्रहार करता है। सुकुल छठी एमकेआई जैसे घातक लड़ाकू विमानों पर यह तैनात होगा और यह हथियार भारतीय वायुसेना की जो मारक क्षमता है उसे कई गुना तक बढ़ा देगा जिससे पाताल में छिपे दुश्मनों का भी बचना नामुमकिन हो जाएगा। यह जो प्रोजेक्ट है यह मेक इन इंडिया के तहत एक बड़ी जीत है। जहां भारत अब खुद स्वदेशी उत्पाद करके अपने बंकर बस्टर्स को तैयार कर रहा है।
स्वदेशीकरण और रणनीतिक फ़ायदा
यह प्रोजेक्ट 'मेक इन इंडिया' पहल का हिस्सा है। DRDO, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और प्राइवेट इंडस्ट्रीज़ के साथ मिलकर काम कर रहा है। घरेलू उत्पादन से सप्लाई चेन मज़बूत होगी और लागत कम होगी। इससे भारत की सटीक हमला करने की क्षमता बढ़ेगी, जिससे सीमा सुरक्षा और रणनीतिक क्षमताएँ मज़बूत होंगी। अन्य स्वदेशी हथियारों के साथ-साथ, इससे वायु सेना और भी ज़्यादा सक्षम बनेगी। सफल परीक्षण के बाद सेना में शामिल करने और बड़े पैमाने पर उत्पादन की प्रक्रिया शुरू होगी। यह भारत की रक्षा औद्योगिक क्षमता की परिपक्वता को दर्शाता है। क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच स्वदेशी हथियारों का विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Continue reading on the app