ED ने YS Avinash Reddy के हैदराबाद और कडप्पा स्थित छह ठिकानों पर छापे मारे
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री वाई.एस. विवेकानंद रेड्डी की हत्या से जुड़े धन शोधन मामले की जांच के तहत युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) सांसद वाई.एस. अविनाश रेड्डी, उनके पिता और कुछ अन्य लोगों के परिसरों पर छापेमारी की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों 0ने बताया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज मामले में हैदराबाद और कडप्पा में कुल छह जगहों पर तलाशी ली गई।
उन्होंने बताया कि छापेमारी के दौरान कडप्पा से सांसद वाई.एस. अविनाश रेड्डी और उनके पिता वाई.एस. भास्कर रेड्डी के परिसरों की भी तलाशी ली गई। ईडी का मामला हत्या के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दर्ज प्राथमिकी और आरोपपत्रों पर आधारित है। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के चाचा विवेकानंद रेड्डी की मार्च 2019 में कडप्पा जिले के पुलिवेंदुला स्थित उनके घर पर हत्या कर दी गई थी।
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सीबीआई ने 2020 में जांच का जिम्मा अपने हाथ में लिया और आरोप लगाया कि इसमें कई लोगों की संलिप्तता है और इसके लिए जटिल साजिश रची गई थी। शुरुआत में राज्य पुलिस ने इस मामले की जांच की थी लेकिन 2020 में जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया गया। केंद्रीय जांच एजेंसी ने हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप में 16 अप्रैल 2023 को भास्कर रेड्डी को गिरफ्तार किया।
US Nuclear Industry भारत के SHANTI Act नियमों पर चार सितंबर तक देगा विस्तृत सुझाव
सागर कुलकर्णी वाशिंगटन, 21 अगस्त अमेरिकी परमाणु उद्योग उस ‘शांति अधिनियम’ को लागू करने के लिए तैयार किए गए मसौदा नियमों और विनियमों पर भारत को विस्तृत सुझाव देगा जिसने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोल दिया है। परमाणु ऊर्जा विभाग ने ‘भारत में बदलाव के लिए परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास (शांति) अधिनियम’ के मसौदा नियम एवं विनियम पिछले सप्ताह जारी किए थे तथा उन पर चार सितंबर तक सुझाव देने का अनुरोध किया गया है। अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) ने भारत के कानूनी विशेषज्ञों और वाशिंगटन स्थित परमाणु ऊर्जा संस्थान के साथ इस मुद्दे पर बृहस्पतिवार को चर्चा की।
यूएसआईएसपीएफ ने असैन्य परमाणु क्षेत्र में अवसरों का पता लगाने के लिए अमेरिकी परमाणु उद्योग के प्रतिनिधियों के एक शिष्टमंडल का इस साल की शुरुआत में भारत में नेतृत्व किया था। सोशल मीडिया पर यूएसआईएसपीएफ ने एक पोस्ट में कहा, ‘‘यूएसआईएसपीएफ चार सितंबर की समयसीमा तक भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) को उद्योग की ओर से एक विस्तृत सुझाव-पत्र सौंपने के लिए समन्वय कर रहा है।’’ यूएसआईएसपीएफ ने शांति अधिनियम के हाल में जारी मसौदा नियमों और विनियमों पर अपनी परमाणु उद्योग समिति के लिए एक ऑनलाइन बैठक भी आयोजित की। यूएसआईएसपीएफ ने कहा, ‘‘ऑनलाइन बैठक में विभिन्न परमाणु क्षेत्रों के वरिष्ठ उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए।
इसमें मसौदा शांति नियमों और विनियमों के प्रमुख प्रावधानों तथा उद्योग के लिए उनके मायने, निजी क्षेत्र के प्रवेश, लाइसेंस, दायित्व और परियोजनाओं की संरचना पर इनके प्रभाव तथा उन क्षेत्रों पर चर्चा की गई जिन पर उद्योग को ध्यान देने और सरकार को संभावित सुझाव देने की जरूरत है।’’ उसने बताया कि दिल्ली स्थित पीएलआर चैंबर्स के सुहान मुखर्जी और परमाणु ऊर्जा संस्थान में राष्ट्रीय सुरक्षा एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के वरिष्ठ निदेशक टेड जोन्स ने ऑनलाइन बैठक को संबोधित किया। ये मसौदा नियम परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने की दिशा में भारत की ओर से उठाए गए पहले विस्तृत कदम हैं। इनमें लाइसेंस, बीमा और मंजूरी से जुड़ी प्रक्रियाएं तय की गई हैं लेकिन संवेदनशील गतिविधियों पर सरकार का नियंत्रण बरकरार रखा गया है।
शांति अधिनियम भारत के असैन्य परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों और संयुक्त उपक्रमों के लिए खोलता है। इसके तहत उन्हें परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण, स्वामित्व और संचालन करने, उन्हें बंद करने की प्रक्रिया पूरी करने तथा परमाणु अनुसंधान एवं विकास कार्य करने की अनुमति होगी। भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
इसके अलावा 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) स्थापित करने का लक्ष्य है।
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